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CG High Court : गुजारा भत्ता मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पत्नी की आय पर सवाल कर सकता है पति

September 2, 2026

CG High Court : भरण-पोषण यानी गुजारा भत्ता (Maintenance, Subsistence Allowance) से जुड़े एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने कहा है कि पति को अपनी पत्नी की आय, कमाई और आय के स्रोत से जुड़े शपथ पत्र पर जिरह करने का पूरा अधिकार है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए दोनों पक्षों को अपनी बात रखने और दूसरे पक्ष से सवाल करने का समान अवसर मिलना चाहिए। हाईकोर्ट (High Court) ने दुर्ग फैमिली कोर्ट (Durg Family Court) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पति को पत्नी की आय से जुड़े दस्तावेजों पर जिरह करने से रोक दिया गया था।

पत्नी की आय पर सवाल करना पति का अधिकार

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी ने अपनी आय और संपत्ति से संबंधित जानकारी शपथ पत्र के जरिए अदालत के सामने रखी है, तो पति को उस जानकारी की सत्यता और आय के स्रोत के बारे में सवाल करने का अधिकार है। अदालत ने यह भी साफ किया कि यही अधिकार पत्नी को भी प्राप्त है। वह अपने पति की आय, संपत्ति और कमाई के स्रोत से जुड़े सवाल पूछ सकती है। अदालत के मुताबिक, दोनों पक्षों को समान अवसर दिए बिना निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट ने किया रद्द

मामला दुर्ग फैमिली कोर्ट से जुड़ा है। वहां पत्नी की ओर से भरण-पोषण के लिए आवेदन पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान पत्नी ने अपनी आय और संपत्ति से संबंधित जानकारी का शपथ पत्र अदालत में दाखिल किया। इसके बाद पति की ओर से इस शपथ पत्र के आधार पर जिरह की अनुमति मांगी गई थी। फैमिली कोर्ट ने पति को जिरह से रोक दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के रोक लगाने वाले आदेश को रद्द करते हुए पति को जिरह का अवसर देने की बात कही।

11 सितंबर को जिरह की अनुमति

मामले में दुर्ग फैमिली कोर्ट ने 11 सितंबर को पति को जिरह की अनुमति दी है। हालांकि हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिरह के दौरान एक ही सवाल को बार-बार दोहराया न जाए और सुनवाई को अनावश्यक रूप से लंबा न खींचा जाए। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिले, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया का अनावश्यक इस्तेमाल कर सुनवाई को लंबा भी न किया जाए।

रायपुर की महिला से जुड़ा है मामला

यह मामला रायपुर की रहने वाली एक महिला और उसके पति के बीच भरण-पोषण से जुड़ा है। महिला ने दुर्ग फैमिली कोर्ट में गुजारा भत्ता के लिए आवेदन दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान उसने अपनी आय और संपत्ति से जुड़ी जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से अदालत के सामने रखी। इसी जानकारी को लेकर पति की ओर से जिरह की मांग की गई थी। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद पति को पत्नी की आय और कमाई के स्रोत से जुड़े तथ्यों पर सवाल करने का अवसर मिलेगा।

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दोनों पक्षों को बराबर मौका जरूरी

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी का मूल आधार निष्पक्ष सुनवाई है। अदालत ने माना कि भरण-पोषण तय करते समय दोनों पक्षों की वास्तविक आर्थिक स्थिति सामने आना जरूरी है। इसके लिए पति और पत्नी, दोनों को एक-दूसरे की आय और संपत्ति से संबंधित जानकारी पर सवाल करने का समान अधिकार होना चाहिए। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिरह का उद्देश्य केवल सुनवाई को लंबा करना नहीं होना चाहिए। इसलिए सवाल प्रासंगिक हों और उन्हें अनावश्यक रूप से दोहराया न जाए।

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