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गौतम अदाणी ने CareEdge से मांगा ‘दुनिया का पहला’ प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर क्रेडिट फ्रेमवर्क

September 2, 2026

By Oneindia Staff

Time Published: Wednesday, September 2, 2026, 20:45 [IST]

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भारत में तेजी से बदल रहे बुनियादी ढांचे के मूल्यांकन के लिए नए तरह के क्रेडिट फ्रेमवर्क की जरूरत बताई है। उन्होंने केयरएज ग्रुप से एकीकृत प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए दुनिया का पहला व्यापक क्रेडिट फ्रेमवर्क तैयार करने का आग्रह किया।

31 अगस्त को मुंबई में केयरएज ग्रुप के वार्षिक सम्मेलन में बोलते हुए अदाणी ने कहा कि पारंपरिक क्रेडिट रेटिंग मॉडल मुख्य रूप से किसी एक परिसंपत्ति और उससे होने वाले नकदी प्रवाह का आकलन करते हैं। लेकिन भारत में अब ऐसी परियोजनाएं विकसित हो रही हैं, जिनका असर एक अकेली संपत्ति तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत को कम मानकों की नहीं, बल्कि व्यापक दृष्टिकोण की जरूरत है।

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अदाणी ने बुनियादी ढांचे को तीन हिस्सों में बांटा

अदाणी के मुताबिक मौजूदा रेटिंग व्यवस्था रिप्लेसमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर यानी पुरानी परिसंपत्तियों के विस्तार या रखरखाव को काफी हद तक समझती है। इसके बाद डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर आता है, जहां स्पष्ट मांग वाले क्षेत्रों में नई क्षमता तैयार की जाती है।

तीसरी श्रेणी उन्होंने प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर की बताई। इसमें ऐसी परियोजनाएं शामिल हैं, जो सिर्फ मौजूदा मांग पूरी नहीं करतीं, बल्कि नए उद्योग, नई मांग और पूरा आर्थिक इकोसिस्टम तैयार करती हैं।

इसी मॉडल को समझाने के लिए उन्होंने अदाणी ग्रुप की तीन परियोजनाओं- मुंद्रा, विझिंजम और खवड़ा का उदाहरण दिया।

मुंद्रा: बंदरगाह से बड़ा बना पूरा इकोसिस्टम

गुजरात का मुंद्रा पोर्ट कभी ऐसे तटीय इलाके में विकसित किया गया था, जहां औद्योगिक गतिविधियां और ग्राहक मांग सीमित थी। आज यह रेल, लॉजिस्टिक्स, बिजली और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ा बड़ा कारोबारी केंद्र बन चुका है।

अदाणी ने कहा कि मुंद्रा का मूल्यांकन सिर्फ बंदरगाह की कमाई के आधार पर करना उसके वास्तविक आर्थिक प्रभाव को सीमित करके देखना होगा। यहां विकसित हर नई सुविधा दूसरे कारोबारों की क्षमता बढ़ाती है और पूरे नेटवर्क की उपयोगिता बढ़ती है।

विझिंजम: 'कुछ न करने' का जोखिम भी समझना होगा

केरल के विझिंजम इंटरनेशनल पोर्ट का उदाहरण देते हुए अदाणी ने कहा कि रणनीतिक परियोजनाओं में सिर्फ निर्माण का जोखिम नहीं, बल्कि परियोजना नहीं बनाने की लागत भी देखी जानी चाहिए।

उनके मुताबिक भारत को लंबे समय तक कंटेनर कार्गो के लिए विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब पर निर्भर रहना पड़ा। विझिंजम को लेकर लंबे समय तक कई प्रयास सफल नहीं हुए, लेकिन परियोजना के शुरू होने के बाद बंदरगाह ने तेजी से क्षमता हासिल की।

अदाणी का तर्क था कि पारंपरिक मॉडल निर्माण और नकदी प्रवाह के जोखिम को तो मापते हैं, लेकिन किसी परियोजना से मिलने वाली रणनीतिक और राष्ट्रीय क्षमता का मूल्यांकन भी जरूरी है।

खवड़ा: ऊर्जा परियोजना से आगे का प्लेटफॉर्म

गुजरात के कच्छ में खवड़ा का उदाहरण देते हुए अदाणी ने कहा कि इसे केवल नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना मानना इसकी संभावित भूमिका को कम करके आंकना होगा। अदाणी ग्रुप यहां 30 गीगावाट का नवीकरणीय ऊर्जा प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है।

उनके मुताबिक खवड़ा में ऊर्जा, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों के जुड़ने की संभावना है। इसलिए इसका असर सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा।

AI के लिए भी चाहिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर

अदाणी ने अपने तर्क को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ते हुए कहा कि AI सिर्फ एल्गोरिदम और सॉफ्टवेयर पर निर्भर नहीं है। बड़े पैमाने पर AI के लिए डेटा सेंटर, बिजली, कूलिंग सिस्टम, ट्रांसमिशन नेटवर्क, जमीन और भरोसेमंद स्वच्छ ऊर्जा जैसी बुनियादी सुविधाएं जरूरी होंगी।

उनके मुताबिक भविष्य में AI की प्रतिस्पर्धा इस बात पर भी निर्भर करेगी कि कौन देश और कंपनियां ऐसी इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता तेजी से तैयार कर पाती हैं।

CareEdge को क्यों दी चुनौती?

अदाणी ने केयरएज से सवाल किया कि एकीकृत प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए दुनिया का पहला व्यापक क्रेडिट फ्रेमवर्क भारत से क्यों नहीं विकसित होना चाहिए? उन्होंने प्रस्तावित मॉडल में किसी परियोजना की अकेली कमाई के बजाय उसके आसपास बनने वाले इकोसिस्टम, नेटवर्क प्रभाव और रणनीतिक महत्व को भी शामिल करने की बात कही।

साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि नए मॉडल का मतलब क्रेडिट रेटिंग के मानकों को कमजोर करना नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक जरूरत ऐसे स्वतंत्र और गतिशील मॉडल की है, जो बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर की वास्तविक क्षमता और उसके व्यापक आर्थिक प्रभाव को माप सके।

अदाणी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर का असली मूल्य केवल बैलेंस शीट में दिखाई देने वाले आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता। इसका प्रभाव लोगों की जिंदगी और अर्थव्यवस्था में आए बदलाव से भी समझना होगा।