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चढ़ावा चोरी में पूर्व ट्रस्टी का खंगाला जा रहा CDR: अयोध्या में SIT कर रही जांच, आरोपी टिन्नू से पूछताछ में नाम आया था - Ayodhya News

July 24, 2026

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, नई एसआईटी के गठन की संभावनाओं के बीच जांच एजेंसियां विवेचना को मजबूत करने में जुटी हैं।

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इसी क्रम में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच किए जाने की सूचना सामने आई है। हालांकि, इस मामले में अब तक डॉ. अनिल मिश्र के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।

ये तस्वीर मंदिर परिसर में पुजारी प्रशिक्षण केंद्र के शुरू होने के दौरान की है।

ये तस्वीर मंदिर परिसर में पुजारी प्रशिक्षण केंद्र के शुरू होने के दौरान की है।

कस्टडी रिमांड में मिले बयानों के आधार पर जुटाए जा रहे साक्ष्य

सूत्रों के मुताबिक, आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू से कस्टडी रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में डॉ. अनिल मिश्र की कार्यप्रणाली से जुड़ी कई जानकारियां पुलिस को मिली हैं। इन्हीं बयानों के आधार पर जांच अधिकारी मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाने में लगे हैं। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विवेचना को मजबूत करने पर जोर

सूत्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट प्रारंभिक एसआईटी रिपोर्ट का अध्ययन कर रहा है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में अदालत विस्तृत विवेचना रिपोर्ट भी तलब कर सकती है। इसी वजह से जांच एजेंसियां हर पहलू को दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्यों के साथ मजबूत करने में जुटी हैं, ताकि रिपोर्ट में किसी प्रकार की कमी न रहे।

गोपाल राव के CDR भी जांच के दायरे में आने की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के पूर्व आमंत्रित सदस्य गोपाल राव के मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है। राम जन्मभूमि परिसर के आंतरिक प्रबंधन की जिम्मेदारी लंबे समय तक डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव के पास रही थी। माना जा रहा है कि दूसरी एसआईटी के औपचारिक गठन से पहले पुलिस मौजूदा विवेचना को अंतिम रूप देने का प्रयास कर रही है।

पहले बैच में 100 प्रशिक्षु

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर परिसर में पुजारी प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने की घोषणा की है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने बताया कि पहले चरण में 100 प्रशिक्षुओं को चार बैचों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

एक वर्ष की इस आवासीय ट्रेनिंग के दौरान प्रत्येक प्रशिक्षु को प्रतिमाह 2,000 रुपये मानदेय भी मिलेगा। प्रशिक्षण में वैदिक एवं रामानंदी परंपरा के अनुसार पूजा-पद्धति, मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठान, मंदिर प्रबंधन, अनुशासन, शुचिता और आचार संहिता का अभ्यास कराया जाएगा।

पहले भी तैयार हो चुके हैं 30 अर्चक

स्वामी गोविंद देव गिरी ने बताया कि राम मंदिर परिसर में वर्तमान में 14 मंदिर हैं, जिनके लिए प्रशिक्षित अर्चकों की आवश्यकता है। इससे पहले ट्रस्ट एक वर्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से 30 अर्चक तैयार कर चुका है।

श्रद्धालुओं को चरणामृत उपलब्ध कराने की तैयारी

ट्रस्ट की पुनर्गठित धार्मिक न्यास समिति ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे रामलला के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को चरणामृत आसानी से उपलब्ध कराया जा सके। इसके लिए नई व्यवस्था पर काम किया जा रहा है।