लखनऊ में नगर निगम के खरिका प्रथम वार्ड से भाजपा पार्षद कृष्ण नारायण केएन सिंह द्वारा सार्वजनिक पार्क में बनाए गए अवैध कार्यालय पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंडलायुक्त के पूर्व निर्देशों पर कार्रवाई न होने के बाद अदालत ने नगर आयुक्त को तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया है।
सार्वजनिक पार्क में बनाए गए अवैध कार्यालय पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है (file photo.)
- Published: 31 Aug 2026, 03:47 PM IST
- Last Updated: 31 Aug 2026, 03:47 PM IST
लखनऊ : राजधानी लखनऊ के सरोजनीनगर तहसील क्षेत्र अंतर्गत खरिका प्रथम वार्ड से भाजपा पार्षद कृष्ण नारायण केएन सिंह द्वारा सार्वजनिक पार्क में अवैध रूप से बनाए गए कार्यालय को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मंडलायुक्त के निर्देशों के बावजूद स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई कदम न उठाए जाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने नगर आयुक्त को तीन महीने के भीतर नियमानुसार जांच पूरी कर अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का स्पष्ट आदेश दिया है।
सार्वजनिक पार्क की जमीन पर बना लिया था पक्का दफ्तर
खरिका प्रथम वार्ड के पार्षद कृष्ण नारायण केएन सिंह ने क्षेत्र के एक सार्वजनिक पार्क की जमीन पर पक्का निर्माण कराकर अपना कार्यालय बना लिया था। इसी कार्यालय में पार्षद नियमित रूप से बैठते थे और बैठकों का आयोजन करते थे। इस अवैध कब्जे के खिलाफ स्थानीय निवासी सुल्तान खान ने प्रशासनिक स्तर पर कई शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन कोई सुनवाई न होने पर उन्होंने जीपीएस लोकेशन और तस्वीरों के पुख्ता साक्ष्यों के साथ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ता ने लगाया प्रशासनिक मिलीभगत का आरोप
याचिकाकर्ता सुल्तान खान ने अदालत को बताया कि भाजपा पार्षद के प्रभाव के कारण स्थानीय अधिकारी कोई कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। उन्होंने पहले मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत से लिखित शिकायत की थी, जिस पर मंडलायुक्त ने अतिक्रमण हटाने के निर्देश भी दिए थे। आरोप है कि स्थानीय लेखपाल रमेशराम पार्षद के सहयोगी के तौर पर काम करते रहे। जोन-8 से जोन-3 में स्थानांतरण हो जाने के बावजूद लेखपाल लगातार पार्षद के संपर्क में बने रहे और पार्क से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को दबाए रखा गया।
बंजर दर्ज भूमि पर निजी निर्माण गैरकानूनी: कोर्ट में सरकारी दलील
याचिका में उल्लेख किया गया कि खरिकापुर प्रथम वार्ड स्थित गाटा संख्या 535, जिसका कुल रकबा 0.2280 हेक्टेयर है, राजस्व अभिलेखों में बंजर भूमि के रूप में दर्ज है और स्थानीय स्तर पर इसका उपयोग सार्वजनिक पार्क के रूप में किया जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने अदालत में स्पष्ट किया कि बंजर भूमि केवल ग्राम सभा या सरकारी व सार्वजनिक उपयोग के लिए ही आरक्षित रखी जा सकती है। किसी भी जनप्रतिनिधि या निजी व्यक्ति को इस पर स्थायी निर्माण का कोई अधिकार नहीं है, लिहाजा यह अतिक्रमण की श्रेणी में आता है।
नगर आयुक्त 3 माह में करें नियमानुसार सख्त कार्रवाई
हाईकोर्ट ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि वर्तमान में यह इलाका लखनऊ नगर निगम की सीमा में शामिल है। अदालत ने याचिकाकर्ता को नगर आयुक्त के समक्ष आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ नई शिकायत दर्ज कराने की छूट दी है। साथ ही नगर आयुक्त को निर्देशित किया गया है कि शिकायत प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर संपूर्ण मामले की जांच पूरी की जाए और नियमों के तहत अवैध अतिक्रमण को हटाने की सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही अदालत ने याचिका को निस्तारित कर दिया।