Balaghat Abhijeet Dipke: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बालाघाट (Balaghat News) में संक्रमित बीमारी से 30 बच्चों (Balaghat 30 Child Death) की मौत के मामले में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए अब कॉकरोच जनता पार्टी संयोजक अभिजीत दिपके ने मध्य प्रदेश का दौरा किया है। 12 सितंबर शनिवार को आकर उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश प्रशासन और स्वास्व्थ्य विभाग (Health Department) पर भी सवाल उठाए हैं।
30 से ज्यादा बच्चों की मौत के बाद Balaghat पहुंचे Abhijit Dipke, आदिवासी परिवारों से मिलकर जाना बच्चों का हाल
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में संक्रामक बीमारियों से 30 से अधिक बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने शनिवार को प्रभावित… pic.twitter.com/nzQrxjyCVZ
— Bansal News Official (@BansalNews_) September 12, 2026
आपको बता दे दिपके का तब आना हुआ है जब हाईकोर्ट (MP High Court) ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए 30 बच्चों की मौत पर प्रशासन से जबाव मांगा है।
बच्चों की मौत पर प्रशासन से जवाबदेही की मांग
अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) ने बच्चों की मौत के मामले में प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके दुख के साथ पूरी संवेदना है और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। दिपके ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बच्चों की मौत की संख्या को स्वीकार किया है, लेकिन अभी तक जिम्मेदारी तय करने या किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने बच्चों की मौत के बाद मामले की गंभीरता से जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
हाईकोर्ट ने सरकार को जारी किए नोटिस
यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। एक जनहित याचिका (PIL) में जिले में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत का मामला उठाया गया है। याचिका में इन मौतों के पीछे संक्रामक बीमारियों के साथ-साथ कई अन्य कारणों का भी आरोप लगाया गया है। इसमें अस्पतालों में मरीजों की अधिक संख्या, दूषित पेयजल और बच्चों में पोषण की कमी जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया है। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब इस मामले में प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।
गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की ली जानकारी
दिपके ने आदोरी, कोरका और बोंडारी गांवों में पहुंचकर स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था के बारे में जानकारी जुटाई। उन्होंने ग्रामीणों से पूछा कि बीमारी के दौरान उन्हें किस तरह की चिकित्सा सुविधा मिली और बच्चों को इलाज के लिए कहां ले जाया गया।
गांवों में स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति, इलाज की उपलब्धता और अस्पतालों तक पहुंच जैसे मुद्दों पर भी जानकारी ली गई। स्थानीय युवाओं के साथ किए गए इस दौरे का उद्देश्य प्रभावित परिवारों की स्थिति को समझना और बच्चों की मौत से जुड़े तथ्यों को सामने लाना बताया गया। इस दौरान दिपके (CJP) ने प्रशासन से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने की मांग भी उठाई।
प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल
बच्चों की मौत के मामले में अब प्रशासन की भूमिका और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है। हालांकि बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों और किसी एक बीमारी या रोगजनक को जिम्मेदार ठहराने को लेकर जांच और आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल CJP संयोजक अभिजीत दिपके ने प्रभावित गांवों का दौरा कर परिवारों से मुलाकात की है और प्रशासन से जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। मामले में आगे सरकार और संबंधित विभाग की रिपोर्ट तथा हाईकोर्ट की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
हाई कोर्ट (Jabalpur News) ने जारी किया था नोटिस
बालाघाट जिले में संक्रामक बीमारियों से 30 से अधिक बच्चों की मौत के मामले को हाई कोर्ट (HC) ने गंभीरता से लिया था। याचिकाकर्ता द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर प्रस्तुत की गई रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की पीठ ने राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, कलेक्टर सहित अन्य अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
नरसिंहपुर निवासी अंशुल तिवारी ने समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों (News) के आधार पर जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बालाघाट में बच्चों को पर्याप्त उपचार नहीं मिल रहा था। इसमें 50 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल (Hospital) में करीब 400 बच्चों के उपचार किए जाने का भी उल्लेख किया गया था।
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