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'मैंने ये सबकुछ उनके लिए किया',30 साल की उम्र में ही मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने क्यों छोड़ी आर्मी? सामने आया सच

September 12, 2026

Time Published: Saturday, September 12, 2026, 15:24 [IST]

सोशल मीडिया पर 'नेशनल क्रश' के नाम से मशहूर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी (Aide-de-Camp) रह चुके मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने महज 30 साल की उम्र में सेना से प्री-मैच्योर रिटायरमेंट लेकर सबको हैरान कर दिया है। 12 साल तक देश की सेवा करने के बाद अचानक वर्दी उतारने के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए थे। हाल ही में यूट्यूबर राज शमानी के पॉडकास्ट 'फिगरिंग आउट' में ऋषभ सांब्याल ने अपने इस कठिन फैसले पर खुलकर बातचीत की और बताया कि क्यों उन्होंने सेना से रिटायरमेंट लेने का फैसला किया।

ऋषभ सिंह सांब्याल की बातों से साफ है कि फैसला अचानक लिया गया कदम नहीं था। इसके पीछे परिवार, निजी जिम्मेदारियों और जिंदगी के एक ऐसे मोड़ की कहानी है, जहां उन्हें अपने लिए और अपने माता-पिता के लिए फैसला लेना पड़ा।

Major Rishabh Singh Sambyal

30 की उम्र में रिटायरमेंट का फैसला मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने क्यों लिया?

ऋषभ सांब्याल ने बताया कि सेना छोड़ना उनका पहला विकल्प नहीं था। उन्होंने करीब 12 साल देश की सेवा में लगाए। बचपन से लेकर 30 साल की उम्र तक उनका बड़ा हिस्सा सेना को समर्पित रहा। लेकिन जिंदगी में कुछ ऐसे हालात आए, जहां उन्हें परिवार को प्राथमिकता देनी पड़ी।

राज शमानी से बातचीत में ऋषभ ने कहा,

"मेरे लिए सबसे बड़ा सवाल यह था कि माता-पिता के लिए इससे बड़ी कुर्बानी क्या हो सकती है। मेरे सामने ऐसी स्थिति थी, जहां मुझे अपने लिए या अपने माता-पिता के लिए फैसला करना था। मैं खुद को इतना स्वार्थी नहीं बना सकता था कि सिर्फ अपनी जिंदगी के बारे में सोचूं। मैं आज जहां हूं, उनकी वजह से हूं और जो फैसला लिया, वह भी अपने साथ-साथ उनके लिए लिया।"

उन्होंने यह भी साफ किया कि सेना छोड़ना उनकी पहली इच्छा नहीं थी। उन्होंने कहा,

"मैंने 12 साल अपनी जिंदगी देश की सेवा में दिए हैं और मुझे इस पर गर्व है। लेकिन जब सामने कुछ ऐसी जिम्मेदारियां आ जाएं, जहां आपकी जरूरत हो, तो उनसे भागा नहीं जा सकता। यह मेरे लिए आसान फैसला नहीं था, लेकिन मुझे फैसला लेना पड़ा।"

यानी ऋषभ की बातों से संकेत मिलता है कि रिटायरमेंट का सबसे बड़ा कारण निजी और पारिवारिक जिम्मेदारियां थीं। उन्होंने इसे किसी असंतोष या सेना से दूरी बनाने के तौर पर पेश नहीं किया।

Major Rishabh Singh Sambyal

ऋषभ सांब्याल राष्ट्रपति के ADC बनने की कहानी भी दिलचस्प है

ऋषभ सांब्याल ने बताया कि उन्हें शुरू में यह तक नहीं पता था कि राष्ट्रपति के एडीसी की भूमिका क्या होती है। वह इस पद पर जाने के लिए खुद से लाइन में नहीं लगे थे।

एक सैन्य अभ्यास के दौरान उनके कमांडिंग ऑफिसर ने बताया कि वह इस जिम्मेदारी के लिए शॉर्टलिस्ट हुए हैं। जब उनसे पूछा गया कि वह क्या करना चाहते हैं, तो उनका पहला जवाब भी हां नहीं था। उन्होंने दूसरे विकल्पों का नाम लिया और कहा कि वह एडीसी की भूमिका नहीं चाहते।

बाद में वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत के बाद उन्हें समझ आया कि यह बेहद अलग तरह का अनुभव हो सकता है। उन्होंने मौका लेने का फैसला किया। हालांकि उनके कमांडिंग ऑफिसर ने उन्हें साफ चेतावनी दी थी कि यह कोई ऐसा काम नहीं है जिसे सिर्फ आजमाने के लिए चुना जा सकता है। अगर जाना है तो पूरी तैयारी और जिम्मेदारी के साथ जाना होगा। मार्च 2023 में वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी चुने गए। यह भारतीय सेना की सबसे प्रतिष्ठित और संवेदनशील जिम्मेदारियों में से एक मानी जाती है।

Major Rishabh Singh Sambyal

राष्ट्रपति की सुरक्षा में हर छोटी चीज पर नजर

राज शमानी के पॉडकास्ट में ऋषभ ने राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़ी कई ऐसी बातें बताईं, जो आम लोगों को शायद पता नहीं होतीं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति से मिलने वाले हर व्यक्ति को लेकर पूरी सावधानी बरती जाती है। किसी को राष्ट्रपति के पैर छूने या अचानक हाथ मिलाने की अनुमति नहीं होती। वजह यह है कि सामने वाले व्यक्ति की मंशा के बारे में पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता।

ऋषभ ने कहा,

"आप सामने वाले व्यक्ति की नीयत कैसे जान सकते हैं? आपको नहीं पता कि उसके दिमाग में क्या है। इसलिए राष्ट्रपति के आसपास हर चीज को लेकर बहुत सतर्क रहना पड़ता है।"

उन्होंने यहां तक बताया कि राष्ट्रपति जिस गिलास से पानी पीती हैं, उसे लेकर भी सावधानी बरती जाती है। उन्होंने कहा,

"आपको नहीं पता कि वह गिलास वहां किसने रखा है और उसमें कुछ मिला तो नहीं है। इसलिए छोटी से छोटी चीज को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।"

उनके मुताबिक राष्ट्रपति के आसपास करीब एक किलोमीटर तक के इलाके को भी सुरक्षा के लिहाज से सैनिटाइज रखा जाता है। वहां हथियार, धातु या किसी खतरनाक सामान की मौजूदगी को लेकर खास जांच होती है।

एडीसी का काम सिर्फ राष्ट्रपति के साथ चलना नहीं

ऋषभ ने बताया कि एडीसी की जिम्मेदारी सिर्फ राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में उनके साथ खड़े रहने तक सीमित नहीं होती। राष्ट्रपति की आधिकारिक और निजी जरूरतों से जुड़े कई काम इस भूमिका का हिस्सा होते हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा,

"राष्ट्रपति अगर प्रधानमंत्री से बात करना चाहती हैं, तो वह हमें बताएंगी। इसके बाद हम प्रधानमंत्री की टीम से संपर्क करते हैं और बातचीत की व्यवस्था करते हैं।"

यानी एडीसी राष्ट्रपति और कई अहम संस्थानों के बीच समन्वय की कड़ी की तरह काम करता है। इस भूमिका में हर समय सतर्क रहना पड़ता है। ऋषभ ने राष्ट्रपति मुर्मू के साथ अपने रिश्ते पर भी बात की। उन्होंने बताया कि उनसे पहली मुलाकात का अनुभव ऐसा था जैसे उनके सामने उनकी मां खड़ी हों। राष्ट्रपति के घरेलू और सहज व्यवहार ने उन्हें अपनी मां की याद दिलाई।

Major Rishabh Singh Sambyal

शादी क्यों नहीं की? ADC की नौकरी में क्या था नियम?

ऋषभ सांब्याल अभी अविवाहित हैं। राज शमानी से बातचीत में उन्होंने राष्ट्रपति के एडीसी पद से जुड़े निजी त्याग के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा,

"मैं शादीशुदा नहीं हूं। राष्ट्रपति के एडीसी के लिए एक प्रावधान है कि इस भूमिका में रहते हुए वे शादी नहीं कर सकते। परिवार से दूर रहना मेरे लिए सबसे बड़ी कुर्बानी रही।"

उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति के साथ सेवा के दौरान सामान्य जिंदगी जीना आसान नहीं था। दोस्तों के साथ बाहर जाना, परिवार के साथ समय बिताना या आम इंसान की तरह निजी जीवन जीना काफी सीमित हो गया था।

ऋषभ ने कहा,

"मैं राष्ट्रपति के साथ सेवा करते हुए सामान्य इंसान की तरह बाहर जाकर जिंदगी का आनंद नहीं ले सकता था। यही वह कीमत थी जो मैंने इस जिम्मेदारी के लिए चुकाई।"

हालांकि रिटायरमेंट के बाद शादी को लेकर उन्होंने कोई तत्काल योजना नहीं बताई है। यानी फिलहाल उनका फोकस शादी से ज्यादा अपनी जिंदगी और आगे की जिम्मेदारियों पर नजर आता है।

अकेलापन था, लेकिन उसे कमजोरी नहीं बनने दिया

ऋषभ ने माना कि राष्ट्रपति के साथ काम करते हुए उन्हें कभी-कभी अकेलापन महसूस होता था। लेकिन वह इस अकेलेपन को नकारात्मक तरीके से नहीं देखते। उन्होंने कहा,

"हां, कभी-कभी अकेलापन महसूस होता है। लेकिन मैं उसी समय को खुद को समझने में लगाता हूं। इससे मुझे अपने विचारों, अपनी अच्छी बातों और अपनी कमियों पर सोचने का मौका मिलता है।"

उन्होंने बताया कि उन्हें रोज कम से कम एक घंटे अकेले रहना पसंद है। उस दौरान वह किसी से बात किए बिना सिर्फ खुद के साथ समय बिताते हैं। उनके लिए यह समय खुद को समझने और अपनी जिंदगी का आकलन करने का जरिया है।

Major Rishabh Singh Sambyal

ऋषभ सांब्याल का सैन्य करियर कितना शानदार रहा?

  • जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले से आने वाले ऋषभ सांब्याल का परिवार डोगरा राजपूत पृष्ठभूमि से जुड़ा है और परिवार में सेना की पुरानी परंपरा रही है। बचपन से ही उनका सपना सेना में जाने का था।
  • उन्होंने सैनिक स्कूल कपूरथला से शुरुआती पढ़ाई की। साल 2013 में एनडीए की परीक्षा पास की और 2014 में 133वें एनडीए कोर्स में शामिल हुए। 2017 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंध और मामलों में स्नातक की डिग्री पूरी की। इसी साल वह भारतीय सैन्य अकादमी पहुंचे, जहां सैन्य अध्ययन और रक्षा प्रबंधन की पढ़ाई की।
  • 2018 में उन्हें जाट रेजिमेंट में कमीशन मिला। 2021 के गणतंत्र दिवस परेड में उन्होंने जाट रेजिमेंट की टुकड़ी का नेतृत्व किया। इस टुकड़ी ने सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दल की ट्रॉफी जीती।
  • इसके बाद वह 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज से भी जुड़े, जिसे 'डैगर्स' के नाम से जाना जाता है। उन्हें बलिदान बैज भी मिला। सेना में उनका सफर लेफ्टिनेंट से कैप्टन और फिर मेजर तक पहुंचा।
  • करीब 12 साल की सेवा के बाद अब उन्होंने समय से पहले रिटायरमेंट लिया है। लेकिन उनकी कहानी यहीं खत्म होती है, ऐसा नहीं लगता। खुद ऋषभ भी कह चुके हैं कि वह किसी न किसी रूप में देश की सेवा जारी रखना चाहते हैं।

यही वजह है कि 30 साल की उम्र में वर्दी छोड़ने का उनका फैसला सिर्फ रिटायरमेंट की खबर नहीं है। यह एक ऐसे सैनिक की निजी कहानी है, जिसने देश की सेवा को अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा दिया और फिर परिवार की जरूरत के सामने अपने करियर को पीछे रखने का फैसला किया।