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Anxiety Vs Stress: एंग्जायटी को समझ लेते हैं रोज का स्ट्रेस, जानें दोनों में क्या है फर्क

July 27, 2026

Anxiety Vs Stress: एंग्जायटी को समझ लेते हैं रोज का स्ट्रेस, जानें दोनों में क्या है फर्क

स्ट्रेस से कितनी अलग होती है एंग्जायटी

हर समय बेचैनी रहना और किसी काम में मन न लगना… एंग्जायटी भी हो सकती है. आज की लाइफ में स्ट्रेस का होना एक नॉर्मल बात है. बिजी लाइफ, काम का प्रेशर और जिम्मेदारियों की वजह से लोगों की मेंटल हेल्थ बिगड़ी हुई है. कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि कुछ लोगों को ये तक पता नहीं होता कि उन्हें स्ट्रेस है. वैसे लोग एंग्जायटी को स्ट्रेस समझने की भूल भी करते हैं. अधिकतर को ये पता ही नहीं होता कि आखिर ये क्यों होती है. इसके लक्षण क्या है और सबसे जरूरी की एंग्जायटी को दूर कैसे किया जा सकता है.

कई रिसर्च में ये भी सामने आया है कि डायबिटीज का लेवल बढ़ने पर भी एंग्जायटी होने लगती है. इस आर्टिकल में हम आपको डॉक्टर के जरिए बताने जा रहे हैं कि एंग्जायटी रोज होने वाले स्ट्रेस से कितनी अलग होती है?

एंग्जायटी और स्ट्रेस में फर्क । Anxiety Vs Stress

डॉक्टर मेघा अग्रवाल, कंसलटेंट साइकाट्रिस्ट कहती हैं कि स्ट्रेस और एंग्जायटी एक जैसी लग सकती हैं, लेकिन दोनों एक चीज नहीं हैं. देखिए, स्ट्रेस आमतौर पर किसी खास वजह से होता है. जैसे ऑफिस का काम, एग्जाम, पैसों की टेंशन या घर की कोई परेशानी. जब वो वजह खत्म हो जाती है, तो स्ट्रेस भी धीरे धीरे कम होने लगता है.

लेकिन एंग्जायटी में ऐसा जरूरी नहीं होता. इसमें मन में डर या चिंता बनी रहती है, जबकि कई बार कोई साफ वजह भी नहीं होती. आपको बार बार लग सकता है कि कुछ बुरा होने वाला है, जबकि असल में सब ठीक होता है. यही स्ट्रेस और एंग्जायटी के बीच सबसे बड़ा फर्क है.

दिमाग ही नहीं शरीर पर भी असर

एक्सपर्ट कहती हैं कि एंग्जायटी सिर्फ आपके दिमाग पर ही असर नहीं डालती, इसका असर शरीर पर भी दिख सकता है. जैसे दिल की धड़कन तेज़ होना, सांस तेज़ चलना, ज्यादा पसीना आना, हाथ कांपना या शरीर में जकड़न महसूस होना. कई लोगों को पेट से जुड़ी दिक्कतें भी होने लगती हैं.

जैसे पेट खराब रहना, मितली आना, पेट में बेचैनी होना या टॉयलेट की आदतों में बदलाव आना. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारा दिमाग और पेट आपस में जुड़े होते हैं. जब मन परेशान होता है, तो उसका असर पेट पर भी दिखने लगता है.

एंग्जायटी को न लें हल्के में

डॉक्टर ने बताया अगर ये चिंता और घबराहट कई हफ्तों या महीनों तक बनी रहे और इसकी वजह से आपके काम, रिश्तों या रोज़मर्रा की जिंदगी पर असर पड़ने लगे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. ऐसे में किसी मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बात करना जरूरी है.

मैं हमेशा यही कहती हूं कि कभी कभी स्ट्रेस होना बिल्कुल सामान्य बात है. लेकिन अगर परेशानी खत्म होने के बाद भी चिंता बनी रहे, या वो आपकी रोज़ की जिंदगी में रुकावट बनने लगे, तो हो सकता है कि ये सिर्फ स्ट्रेस नहीं, बल्कि एंग्जायटी हो. ऐसे में समय पर मदद लेना बहुत जरूरी है.

मनीष रायसवाल

मनीष रायसवाल

मनीष रायसवाल वर्तमान में टीवी9 डिजिटल में लाइफस्टाइल बीट पर बतौर टीम लीड काम कर रहे हैं. मनीष के करियर की शुरुआत साल 2015 से इंडिया न्यूज के डिजिटल प्लेटफार्म Inkhabar के साथ बतौर सब एडिटर हुई थी. अलग-अलग पड़ावों को पार करते हुए इन्होंने इंडिया न्यूज, अमर उजाला और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है. 2009 से 2012 के बीच जामिया मिलिया इस्लामिया से बीए ऑनर्स मास मीडिया में ग्रेजुएशन और 2012-13 के बीच देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (दिल्ली) से डिप्लोमा करने के बाद मनीष पत्रकारिता से जुड़े हैं. मनीष लाइफस्टाइल के अलावा, हेल्थ, सोशल, वुमेन और बाल विकास और ट्रैवलिंग जैसे विषयों पर लिखना पसंद करते हैं. लाइफस्टाइल से जुड़े ज्यादातर टॉपिक्स पर इन्हें नई चीजें सीखने का शौक है.

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