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इलाज में देरी के कारण, किडनी और लिवर पर असर: स्क्रब टाइफस; प्रदेश में 9 माह में 360, सितंबर में एसएमएस पहुंचे 200 मरीज - Jaipur News

October 6, 2026

इलाज में देरी के कारण, किडनी और लिवर पर असर:स्क्रब टाइफस; प्रदेश में 9 माह में 360, सितंबर में एसएमएस पहुंचे 200 मरीज

जयपुर30 मिनट पहलेलेखक: सुरेन्द्र स्वामी

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बारिश के बाद स्क्रब टाइफस के मरीज तेजी से बढ़े हैं। एसएमएस अस्पताल में इस साल जनवरी से सितंबर तक प्रदेश के विभिन्न जिलों से करीब 360 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से 224 मरीज तो सिर्फ सितंबर माह में सामने आए हैं। अगस्त तक यह संख्या 136 थी।

डॉक्टरों के अनुसार स्क्रब टाइफस के संक्रमण का ट्रेंड भी बदल रहा है। पहले खेतों, झाड़ियों और जंगलों में पाए जाने वाले संक्रमित चिगर के काटने से जुड़ा माना जाता था। अब शहरी और ग्रामीण बस्तियों में घरों के आसपास भी संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल जैसे होने से लोग इसे मौसमी बुखार मानकर घर पर ही इलाज करते रहते हैं। समय पर बीमारी की पहचान और इलाज नहीं होने पर संक्रमण फेफड़ों, किडनी और लिवर को प्रभावित कर सकता है। मल्टी ऑर्गन फेल्योर तक की स्थिति बन सकती है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से स्क्रब टाइफस के मरीज एसएमएस अस्पताल पहुंच रहे हैं।

बुखार को सामान्य समझा, जांच में निमोनिया

केस-1; वैशाली नगर निवासी 28 वर्षीय स्मिता पिछले महीने कोटपूतली गई थीं। लौटने के बाद बुखार हुआ तो एसएमएस में जांच कराई। स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने समय पर इलाज जारी रखने की सलाह दी, लेकिन दवा में लापरवाही से तबीयत बिगड़ गई। उन्हें बाइलेटरल निमोनिया के साथ यूरिन संबंधी परेशानी होने लगी।

केस-2; विद्याधर नगर के 34 वर्षीय नवीन पत्नी के साथ 25 सितंबर को दौसा गए थे और वहां दो-तीन दिन रुके। एक अक्टूबर को बुखार आया तो इसे सामान्य मौसमी बुखार मानकर दवा लेते रहे। सांस लेने में तकलीफ और यूरिन संबंधी परेशानी बढ़ी। कांवटिया अस्पताल और फिर निजी अस्पताल में जांच कराने पर स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई।

बचाव: घास-झाड़ियों में पूरे कपड़े-जूते पहनकर जाएं

घर के आसपास घास और झाड़ियों की नियमित सफाई रखें। खेत, घास या झाड़ियों वाले इलाके में जाते समय शरीर को ढंकने वाले कपड़े और जूते पहनें। जरूरत के अनुसार कीट-रोधी रिपेलेंट का इस्तेमाल करें और घर के आसपास नमी व झाड़ियां जमा न होने दें।

काटने की जगह सिगरेट से जले जैसा निशान दिखे तो रहें सतर्क

स्क्रब टाइफस एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो संक्रमित चिगर यानी माइट के लार्वा के काटने से फैलता है। कई मरीजों में काटने वाली जगह पर काले रंग का घाव या पपड़ी बनती है, जो सिगरेट से जले निशान जैसी दिख सकती है। इसे ‘एस्कार’ कहा जाता है। तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और सांस लेने में परेशानी इसके लक्षण हो सकते हैं। समय पर इलाज नहीं होने पर संक्रमण गंभीर होकर अंगों को प्रभावित कर सकता है। डॉ. पुनीत सक्सेना, एसएमएस

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