Updated On: Aug 09, 2026 | 05:41 PM IST
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सार
CJI Surya Kant NALSAR Convocation News: हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी में CJI सूर्यकांत को कॉन्वोकेशन में चीफ गेस्ट के रूप में बुलाने पर विवाद शुरू हो गया है।

CJI सूर्यकांत ( सोर्स- सोशल मीडिया)
विस्तार
NALSAR Students Protest CJI SuryaKant: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (NALSARU) में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को 2026 के कॉन्वोकेशन सेरेमनी की अध्यक्षता करने के लिए निमंत्रण मिला है। जानकारी सामने आने के बाद विश्वविद्यालय में उनका विरोध शुरू हो गया। कुछ छात्रों ने सीजेआई सूर्यकांत द्वारा हाल ही में युवाओं को कॉकरोच कहने और उनके अन्य बयानों का जिक्र करते हुए विश्वविद्यालय में आपत्ति दर्ज की है।
सेशन 2026 बैच के छात्रों के एक समूह ने विश्विद्यालय के वाइस-चांसलर, फैकल्टी मेंबर्स, रजिस्ट्रार और विश्वविद्यालय प्रशासन के अन्य दूसरे सदस्यों को पत्र लिखकर सीजेआई सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाने के निर्णय पर फिर से विचार करने की अपील की है।
CJI की हालिया टिप्पणी पर जताई चिंता
विश्वविद्यालय प्रशासन को दिए गए पत्र में छात्रों ने हाल के ज्यूडिशियल डेवलपमेंट्स पर भी चिंता व्यक्त की है। इसमें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन को लेकर मुख्य न्यायाधीश द्वारा की गईं कथित टिप्पणी और भारतीय युवाओं की तुलना कॉकरोच से करना शामिल है। छात्रों ने पत्र में लिखा, हम छात्र माननीय मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को हमारे कॉन्वोकेशन में मुख्य अतिथि के रूप में बुलाने को लेकर ग्रेजुएट हो रहे बैच की चिंताओं को शेयर कर रहे हैं।
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छात्रों के मुद्दे पर बेपरवाही दिखाने का आरोप
पत्र में आगे उन्होंने कहा कि युवाओं को कॉकरोच बोलने से लेकर दिल्ली में पुलिस की बर्बरता के वीडियो देखने का समय न होने जैसे असंवेदनशील बयान देने तक…मुख्य न्यायाधीश ने हम जैसे छात्रों को लेकर बेपरवाही दिखाई है। हमारे कॉलेज में उन्हें बुलाकर हमें ऐसी डिग्री देना, जोकि इतनी इमोशनल और एकेडमिक अहमियत रखती हैं, हमें ठीक नहीं लगता। हालांकि, वीडियो और कॉकरोच वाले बयान को लेकर सीजेआई सूर्यकांत द्वारा बाद में सफाई भी दी गई थी। सीजेआई ने सफाई देते हुए कहा था कि उनके बयान को मीडिया में तोड़-मरोड़कर दिखाया गया।
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CJI को बुलाना एकेडमिक फ्रीडम के खिलाफ
छात्रों ने अपने पत्र में यह भी बताया कि अभी के हालात में प्रधान न्यायाधीश को बतौर मुख्य अतिथि बुलाना संवैधानिक जिम्मेदारी और एकेडमिक स्वतंत्रता से जुड़े मूल्यों के खिलाफ होगा। इसलिए, उन्होंने विश्वविद्यालय अथॉरिटी से अपने फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की है।
पत्र में आखिर में लिखा है कि हम विश्वविद्यालय प्रशासन से रिक्वेस्ट करते हैं कि वे माननीय मुख्य न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश के रूप में बुलाने के अपने प्रस्ताव पर फिर से विचार करें और उम्मीद करते हैं कि विश्वविद्याल इसे ग्रेजुएट हो रहे छात्र समूहों की एक जैसी चिंता के रूप में देखेगी, न कि किसी एक बैच की चिंता के रूप में।
