मुजफ्फरपुर45 मिनट पहले
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एसपी ऑफिस का अकाउंटेंट वेतन-एरियर की रकम पत्नी व दो महिला सिपाहियों के खाते में भेजता रहा, 26 को सजा
मुजफ्फरपुर एसपी ऑफिस के जिस अकाउंटेंट सुशील कुमार चौधरी के हाथ में पुलिसकर्मियों की सैलरी का हिसाब था, उसी ने सरकारी खजाने का हिसाब बिगाड़ दिया। अकाउंटेंट सुशील कुमार चौधरी पुलिसकर्मियों के वेतन, टीए और एरियर की राशि में हेरफेर कर करीब 7 करोड़ रुपए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर सरकारी खजाना लूटता रहा।
वर्ष 2006 से सितंबर 2010 तक यह खेल चला। इस मामले का भंडाफोड़ होने पर अकाउंटेंट समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। अकाउंटेंट की सहयोगी रही सिपाही बेबी कुमारी को सोमवार को आय से अधिक संपत्ति मामले में विशेष निगरानी कोर्ट-2 विशेष न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर ने दोषी ठहराया। वह लखीसराय की रहने वाली है। उसे न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया गया। सजा के बिंदु पर 26 अक्टूबर को सुनवाई होगी।
पुलिस जांच में सामने आया कि सुशील चौधरी पुलिसकर्मियों की सैलरी और दूसरे भुगतान की प्रक्रिया का बाहरी कर्मी की मदद से वेतन भुगतान की सीडी तैयार करवाता था। इसी सीडी में हेरफेर कर असली खातों की जगह अपने, पत्नी अनिता चौधरी और महिला सिपाही शकुंतला देवी व बेबी कुमारी के खाते दर्ज कर देता था। इसके बाद पुलिसकर्मियों के वेतन, टीए और अन्य मद की सरकारी राशि उन खातों में पहुंच जाती थी। करीब चार साल तक सरकारी राशि के ट्रांसफर का खेल चलता रहा। स्थानीय पुलिस की जांच में करीब सात करोड़ रुपए की सरकारी राशि के गबन की बात सामने आई। गड़बड़ी की शिकायत के बाद तत्कालीन डीएसपी हेडक्वार्टर मनीष कुमार के आवेदन पर 1 अक्टूबर 2010 को नगर थाने में केस दर्ज हुआ।
एक ही एटीएम से मोटी निकासी से खुला मामला चार साल से अकाउंटेंट सुशील चौधरी का खेल जारी था। एसपी ऑफिस से शाम में निकलने के बाद सुशील ट्रेन पकड़ कर समस्तीपुर आवास शाम में जाता। समस्तीपुर में ही एसबीआई की एटीएम से हर शाम एक ही समय मोटी निकासी वह करता था। लंबे समय से वॉच करने के बाद एसबीआई अधिकारी ने मुजफ्फरपुर एसपी को गोपनीय पत्र भेजा। तत्कालीन एसपी पत्र पढ़ने के बाद दंग रह गए। अपने कक्ष से सटे कक्ष में बैठे तत्कालीन हेड क्वार्टर डीएसपी मनीष कुमार को बुलाया। जांच के बाद एक साथ महिला सिपाहियों व अकाउंटेंट के यहां छापेमारी के बाद पूरे मामले का पर्दाफाश किया गया।
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