पटना46 मिनट पहलेलेखक: शशि सागर
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नीट यूजी में कम अंक लाने वाले सामान्य अभ्यर्थियों को फर्जी दिव्यांग बनाकर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की आरक्षित सीटें दिलाई जा रही थीं। ईओयू की जांच में अंतरराज्यीय सिंडिकेट का खुलासा हुआ है।
ईओयू ने पटना से मेडिकल छात्र और गिरोह के मुख्य सरगना डा. रविशंकर उर्फ सम्राट को गिरफ्तार किया था। उसके कबूलनामे और जांच रिपोर्ट से फर्जीवाड़े की परतें खुली हैं। जांच में सामने आया कि गिरोह फर्जी दिव्यांगता और जाली जाति प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल करता था। इनके सहारे नीट में फर्जी स्क्राइब बैठाए जाते थे। इसके बाद कम अंक वाले अभ्यर्थियों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षित सीटें दिलाई जाती थीं। बिहार के पूर्णिया मेडिकल कॉलेज और झारखंड के रिम्स रांची में भी बैकडोर दाखिले के मामले सामने आए हैं।
इस फर्जीवाड़े से गिरोह को दोहरा फायदा : पहला, परीक्षा में स्क्राइब की आड़ में सॉल्वर बैठाना। अभ्यर्थी को दिव्यांग बताकर एनटीए से स्क्राइब की अनुमति ली जाती थी। दूसरा, काउंसलिंग में आरक्षित सीट हासिल करना। कम अंक के बावजूद अभ्यर्थी को दिव्यांग कोटे से सरकारी कॉलेज में दाखिला दिलाया जाता था।
एनएमसीएच से जारी हुए 11 संदिग्ध प्रमाण पत्र
ईओयू ने रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र के जकरियापुर स्थित सुनैना अपार्टमेंट से दस्तावेज बरामद किए। यह फ्लैट रविशंकर का आवास है। यहां से एनएमसीएच के अधीक्षक और नेत्र रोग विभागाध्यक्ष के हस्ताक्षर-मुहर वाले 5 स्क्राइब प्रमाण पत्र मिले।
सभी फॉर्म में अभ्यर्थियों का ब्योरा भरा था। लेकिन सक्षम प्राधिकारी द्वारा सत्यापित किया जाने वाला पार्ट-B पूरी तरह खाली था। ईओयू जांच कर रही है कि प्रमाण पत्र फर्जी हैं या असली। एनएमसीएच के अधीक्षक से पूछताछ हो सकती है।
आंख और कान की दिव्यांगता ही क्यों चुनी?
ईओयू से पूछताछ में डा. रविशंकर सम्राट ने बताया कि कम अंक वाले अभ्यर्थियों के लिए आंख और कान की दिव्यांगता के प्रमाण पत्र बनवाए जाते थे। वजह भी बताई : काउंसलिंग या जांच के दौरान मेडिकल बोर्ड के लिए आंख-कान की दिव्यांगता का मौके पर तुरंत भौतिक सत्यापन करना जटिल होता है।
पटना में मिले 16 संदिग्ध फॉर्म पूर्णिया जीएमसीएच : कान की दिव्यांगता वाले फरार ईओयू की रिपोर्ट में दर्ज मॉडस ऑपरेंडी की पुष्टि पूर्णिया जीएमसीएच की कार्रवाई से भी होती है। राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच), पूर्णिया में फर्जी प्रमाण पत्र पर दिव्यांग कोटे से दाखिला लेने वाले सेकंड और थर्ड ईयर के 7 मेडिकल छात्रों को कॉलेज प्रशासन ने निष्कासित कर दिया।
रिम्स रांची : काजल कुमारी के नाम से खुला कनेक्शन रविशंकर ने ईओयू को बताया था कि वर्ष 2025 में झारखंड के मेडिकल कॉलेज में भी फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर दाखिले कराए गए थे। इसकी जांच वहां की सीआईडी कर रही है। रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में वर्ष 2025 सत्र के एमबीबीएस दाखिलों में फर्जीवाड़े की शिकायत मिली थी।
अगस्त में ही अलर्ट क्यों नहीं हुआ ? ईओयू ने अगस्त में ही गिरोह के दस्तावेज और मॉडस ऑपरेंडी पकड़ ली थी। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग, मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) और बीसीईसीईबी को समय रहते अलर्ट क्यों नहीं भेजा गया? अगर मुजफ्फरपुर मेडिकल बोर्ड दोबारा जांच नहीं करता, तो ये अयोग्य छात्र असली दिव्यांग अभ्यर्थियों का हक मारकर मेडिकल कॉलेज पहुंच चुके होते।
जांच के बाद होगी कार्रवाई एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर के मामले की जानकारी मिली है। दोनों संदिग्ध छात्रों का नामांकन रद्द कर दिया गया है। वर्तमान में चल रही नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद पूरे मामले की गहनता से जांच की जाएगी। संस्थानों से रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई होगी। - अनिल सिन्हा, ओएसडी, बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद
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