शुगर सेक्टर के शेयरों में शुक्रवार के कारोबार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। बलरामपुर चीनी मिल्स, त्रिवेणी इंजीनियरिंग, धामपुर शुगर, उत्तम शुगर, डालमिया भारत, श्री रेणुका शुगर्स और EID Parry समेत कई चीनी कंपनियों के शेयरों में 7% तक की बढ़त दर्ज की गई। इस तेजी की सबसे बड़ी वजह घरेलू और वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी है। वैश्विक स्तर पर कच्ची चीनी की कीमत एक साल के हाई लेवल पर पहुंचकर करीब 16.6 सेंट प्रति पाउंड हो गई है, जबकि व्हाइट शुगर की कीमत 15 महीने के हाई पर पहुंच गई है। यही वजह है कि शुगर स्टॉक्स तेजी से ऊपर चढ़ रहे हैं। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।
भारत में भी पिछले एक महीने में चीनी की कीमत करीब 10% बढ़ी है और मुंबई में इसका भाव लगभग ₹5,000-₹5,090 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। चीनी की कीमतों में यह उछाल सीधे तौर पर चीनी मिलों की कमाई और मुनाफे के लिए सकारात्मक माना जा रहा है, इसलिए निवेशकों की नजर अब इस पूरे सेक्टर पर टिक गई है।
शुक्रवार के कारोबार में Triveni Engineering सबसे ज्यादा चर्चा में रहा और शेयर करीब 7% चढ़कर ₹283 के आसपास पहुंच गया। Balrampur Chini Mills में लगभग 5% की तेजी आई और शेयर ₹654 के करीब पहुंच गया। इसी तरह Dhampur Sugar Mills करीब 5% बढ़कर ₹168 और Uttam Sugar भी लगभग 5% चढ़कर ₹278 के आसपास पहुंच गया। EID Parry में 2% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। इन शेयरों में तेजी सिर्फ घरेलू चीनी कीमतों की वजह से नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता इसका बड़ा कारण है।
वैश्विक बाजार में चीनी की सप्लाई को लेकर सबसे बड़ी चिंता ब्राजील से आ रही है। ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है और वहां खराब मौसम के कारण गन्ने की कटाई में देरी की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा ब्राजील ने अपनी दो-साप्ताहिक फसल और उत्पादन रिपोर्ट को भी निलंबित कर दिया है। इससे बाजार में भविष्य की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। जब दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक देश से सप्लाई पर सवाल उठते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर तेजी का दबाव बनना स्वाभाविक है।
इसकी एक और महत्वपूर्ण वजह एथेनॉल की बढ़ती मांग है। ब्राजील में चीनी की जगह गन्ने के रस का एक बड़ा हिस्सा एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है, क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में एथेनॉल ज्यादा फायदे का कारोबार बन रहा है। जून में ब्राजील के करीब 58% गन्ने के रस को एथेनॉल उत्पादन की तरफ डायवर्ट किया गया। इसके बाद जुलाई में वहां अनिवार्य एथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य को 30% से बढ़ाकर 32% कर दिया गया। इसका सीधा मतलब है कि गन्ने का ज्यादा हिस्सा चीनी उत्पादन के बजाय एथेनॉल में जा सकता है। इससे बाजार में उपलब्ध चीनी की मात्रा घटने की आशंका बढ़ती है और कीमतों को सपोर्ट मिलता है।
सिर्फ ब्राजील ही नहीं, बल्कि दुनिया के दूसरे प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्रों में भी मौसम संबंधी चुनौतियां चिंता बढ़ा रही हैं। यूरोप और ब्रिटेन में तेज गर्मी और El Niño जैसी परिस्थितियों ने फसल को लेकर चिंता बढ़ाई है। यूरोपीय क्षेत्र के चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर करीब 14.98 मिलियन टन किया गया है। एशिया में दुनिया के तीसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक थाईलैंड ने भी अपने उत्पादन अनुमान में 15.6% की कटौती करके इसे लगभग 9.5 मिलियन टन कर दिया है। भारत में भी गन्ने की उपलब्धता और आने वाले उत्पादन को लेकर बाजार सतर्क है। यही वजह है कि वैश्विक चीनी बाजार में सप्लाई कम होने की आशंका लगातार मजबूत हो रही है।
भारत के लिए यह स्थिति और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और प्रमुख निर्यातक है। अगर घरेलू उत्पादन घटता है और एथेनॉल की डिमांड बढ़ती है, तो निर्यात के लिए उपलब्ध अतिरिक्त चीनी की मात्रा कम हो सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक भारत को अगले कुछ सीजन तक पर्याप्त अतिरिक्त चीनी उपलब्ध नहीं होने की संभावना है। भारत ने मौजूदा सीजन में करीब 8 लाख टन चीनी निर्यात करने के बाद 30 सितंबर तक शिपमेंट पर रोक लगा रखी है। इससे वैश्विक बाजार में भारत से मिलने वाली सप्लाई भी सीमित हो सकती है।
ग्लोबल शुगर मार्केट में संभावित कमी के अलग-अलग अनुमान भी तेजी की कहानी को मजबूत कर रहे हैं। Green Pool ने वैश्विक चीनी बाजार में करीब 3.3 मिलियन टन की कमी का अनुमान लगाया है। StoneX का अनुमान लगभग 1.7 मिलियन टन की कमी का है, जबकि International Sugar Organisation ने करीब 0.26 मिलियन टन का डेफिसिट अनुमानित किया है। हालांकि इन अनुमानों में अंतर काफी बड़ा है, लेकिन सभी का एक सामान्य संकेत है कि वैश्विक चीनी बाजार में सप्लाई और डिमांड के बीच संतुलन को लेकर चिंता बढ़ रही है।
घरेलू बाजार में भी कम बारिश ने चीनी की कीमतों को अतिरिक्त सपोर्ट दिया है। गन्ने की फसल पर मौसम का असर पड़ने की आशंका के बीच आगामी त्योहारी सीजन में चीनी की मांग बढ़ने की उम्मीद है। अगर त्योहारी मांग मजबूत रहती है और उत्पादन अनुमान कमजोर रहते हैं, तो चीनी की कीमतों को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है। यही उम्मीद चीनी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी को बढ़ावा दे रही है।
हालांकि, निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि चीनी शेयरों में तेजी हमेशा एक जैसी नहीं रहती। चीनी उद्योग काफी हद तक कमोडिटी कीमतों, गन्ने की उपलब्धता, सरकारी नीतियों, निर्यात नियमों और एथेनॉल ब्लेंडिंग जैसे कारकों पर निर्भर करता है। अगर भविष्य में उत्पादन बेहतर रहता है, चीनी की कीमतें गिरती हैं या सरकार निर्यात और घरेलू कीमतों को कंट्रोल करने के लिए कोई बड़ा कदम उठाती है, तो इन शेयरों पर दबाव भी आ सकता है।
इसलिए मौजूदा तेजी को केवल देखकर किसी शेयर में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। फिलहाल, बाजार की नजर चीनी की कीमतों, ब्राजील और भारत की फसल, मानसून, एथेनॉल नीति और अपकमिंग त्योहारी डिमांड पर रहेगी। चीनी की कीमतों में मजबूती बनी रहती है, तो बलरामपुर चीनी, त्रिवेणी इंजीनियरिंग, धामपुर शुगर और अन्य शुगर कंपनियों के शेयर निवेशकों के रडार पर बने रह सकते हैं।
डिस्क्लेमर- लाइव हिंदुस्तान किसी भी निवेश से पहले एक्सपर्ट की राय लेने की सलाह देता है।