business-finance

50 साल के सरकारी बॉन्ड की नीलामी: FD या G-Sec, निवेश के लिए क्या है सही विकल्प?

August 17, 2026

Published: Monday, August 17, 2026, 19:07 [IST]

भारत सरकार इस हफ्ते, यानी 17 से 21 अगस्त 2026 के दौरान अल्ट्रा-लॉन्ग बॉन्ड की बिक्री करने जा रही है। जारी शेड्यूल के मुताबिक, इस नीलामी में 11,000 करोड़ रुपये के 50-साल वाले और 17,000 करोड़ रुपये के 15-साल वाले सरकारी बॉन्ड (G-Sec) शामिल हैं। बाजार में लंबी अवधि वाले नए बॉन्ड आने से इनकी यील्ड (ब्याज दर) पर असर पड़ सकता है। ऐसे में जो निवेशक कई सालों के लिए अपने पैसे लॉक-इन करना चाहते हैं, उन्हें रिटेल डायरेक्ट जी-सेक, टारगेट-मैच्योरिटी फंड और बैंक एफडी की आपस में तुलना करके ही निवेश का फैसला लेना चाहिए।

फिलहाल यील्ड का क्या हाल है? हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो 10-साल वाले बॉन्ड की यील्ड 6.78 प्रतिशत, 30-साल वाले की 7.41 प्रतिशत और 50-साल वाले पार यील्ड 7.48 प्रतिशत के करीब है। वहीं बड़े बैंकों में 1 साल से अधिक की एफडी पर 6.00 से 6.75 प्रतिशत तक ब्याज मिल रहा है। इस हफ्ते नीलामी के असर और निवेश के बाकी विकल्पों को परखने के लिए इन आंकड़ों को एक पैमाने के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

Government Bond Auction 2026: Is Investing in 50-Year G-Secs Better Than Bank FDs or TMFs?
इंस्ट्रूमेंटअवधिअनुमानित दरतारीख
जी-सेक10 साल~6.78%17 जुलाई 2026
जी-सेक30 साल~7.41%27 जुलाई 2026
जी-सेक50 साल (पार)~7.48%1 जुलाई 2026
बैंक एफडी>1 साल6.00–6.75%21 जुलाई 2026

अल्ट्रा-लॉन्ग बॉन्ड की बिक्री मुख्य रूप से इंश्योरेंस कंपनियों और पेंशन फंड्स की मांग को परखती है। इनकी मैच्योरिटी अवधि काफी ज्यादा होती है, इसलिए ब्याज दरों में मामूली फेरबदल से भी इनकी कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव आता है। अगर नई सप्लाई से यील्ड कर्व तेज होता है, तो लंबी अवधि वाले बॉन्ड कुछ समय के लिए सुस्त प्रदर्शन कर सकते हैं। हालांकि, अगर नीतिगत फैसलों से महंगाई दर काबू में रहती है, तो 'रोल-डाउन' और 'कैरी' रणनीति का फायदा मिलता है। 50 साल वाले बॉन्ड में मिड-कर्व बेंचमार्क के मुकाबले बिड-आस्क स्प्रेड (खरीद और बिक्री दर का अंतर) थोड़ा ज्यादा रहने के आसार हैं।

रिटेल डायरेक्ट G-Sec: कैसे लगाएं बोली, क्या है समय और सेटलमेंट प्रक्रिया?

इसमें बोली लगाने के लिए पैन (PAN), आधार ई-केवाईसी (e-KYC), बैंक अकाउंट, मोबाइल और ईमेल के जरिए ऑनलाइन 'रिटेल डायरेक्ट गिल्ट' खाता खोलें। इसके बाद नॉन-कंपिटिटिव बिड लगाएं, जिसमें अलॉटमेंट नीलामी की वेटेड-एवरेज कीमत पर होता है। हालिया अपडेट्स के मुताबिक, रिटेल निवेशकों के लिए बिडिंग विंडो नीलामी वाले दिन सुबह के आखिरी घंटों में खुलती है; इसलिए इस हफ्ते के शेड्यूल को जरूर चेक कर लें। पैसों का सेटलमेंट T+1 आधार पर यूपीआई (UPI) ब्लॉक या नेट बैंकिंग के जरिए होता है।

टारगेट-मैच्योरिटी फंड बनाम बैंक एफडी: टैक्स, लिक्विडिटी और रिस्क को समझें

टारगेट-मैच्योरिटी फंड (TMF) गिल्ट या स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDL) इंडेक्स को फॉलो करते हैं और एक तय साल में मैच्योर होते हैं। इससे री-इन्वेस्टमेंट का रिस्क काफी कम हो जाता है। टैक्स नियमों की बात करें तो 1 अप्रैल 2023 के बाद, धारा 50AA (Section 50AA) के तहत ज्यादातर डेट फंड से होने वाली कमाई पर निवेशक के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। जी-सेक और एफडी से मिलने वाले ब्याज पर भी स्लैब रेट से टैक्स लगता है, जबकि लिस्टेड बॉन्ड पर बिना इंडेक्सेशन के 10% एलटीसीजी (LTCG) लागू होता है। म्यूचुअल फंड का रिडेम्पशन आमतौर पर T+2 दिनों में क्रेडिट हो जाता है; देरी होने पर 15% ब्याज देने का प्रावधान है। वहीं बैंक एफडी में पेनल्टी देकर समय से पहले निकासी की जा सकती है; ₹1 करोड़ तक की एफडी में निकासी की सुविधा होना अनिवार्य है। निवेश की सही रणनीति: 3 साल से कम अवधि के लिए दर की निश्चितता और एफडी बेहतर है; 5-10 साल के लिए TMF मैच्योरिटी चुनें; और अगर 15 साल से ज्यादा के लिए जोखिम सहने की क्षमता है, तो अल्ट्रा-लॉन्ग जी-सेक पर विचार करें।

Story first published: Monday, August 17, 2026, 19:07 [IST]

Other articles published on Aug 17, 2026