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5 साल में ED ने 4,622 केस दर्ज किए, लेकिन सिर्फ 43 में सजा मिली; आखिर जांच और ट्रायल में देरी क्यों?

August 5, 2026

पिछले कुछ सालों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) देश की सबसे चर्चित जांच एजेंसियों में रहा है. मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में एजेंसी ने लगातार कार्रवाई बढ़ाई है. लेकिन संसद में सरकार की ओर से दिए गए ताजा आंकड़े एक अलग तस्वीर भी दिखाते हैं. पिछले पांच वित्त वर्षों में ED ने 4,622 मामले दर्ज किए, 2,444 मामलों में शिकायत दाखिल की और 1,243 आरोपियों को गिरफ्तार किया. इसके बावजूद सिर्फ 43 मामलों में दोषसिद्धि हो सकी, जिनमें 104 आरोपियों को सजा मिली.

सरकार ने 4 अगस्त 2026 को राज्यसभा में दिए जवाब में बताया कि 30 जून 2026 तक ED ने PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत विशेष अदालतों में 2,444 शिकायतें दाखिल की हैं. ये सभी मामले अभी अलग-अलग चरणों में विचाराधीन हैं. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जेलों में मौजूद अंडरट्रायल कैदियों का सेंट्रल डेटा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि कई मामलों में गिरफ्तारी मूल जांच एजेंसियों ने की होती है.

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पांच साल में कितने केस दर्ज हुए?

संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक, ED ने 2021-22 में 1,116, 2022-23 में 953, 2023-24 में 698, 2024-25 में 775 और 2025-26 में 1,080 मामले दर्ज किए. यानी पांच साल में कुल 4,622 मामले दर्ज हुए. वहीं इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (ITD) ने इस अवधि में 2,127 मामले दायर किए.

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दोषसिद्धि कितनी हुई?

सरकार के मुताबिक, ED को 2021-22 में 3, 2022-23 में 9, 2023-24 में 13, 2024-25 में 9 और 2025-26 में 9 मामलों में दोषसिद्धि मिली. कुल मिलाकर 43 मामलों में 104 आरोपियों को सजा हुई.

वहीं इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मामलों में पांच साल के दौरान 233 मामलों में दोषसिद्धि हुई, जबकि 854 मामलों में आरोपी बरी हुए. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि या बरी होने वाले मामले जरूरी नहीं कि उसी साल दर्ज किए गए हों, क्योंकि मुकदमों का फैसला कई साल बाद आता है.

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आखिर देरी क्यों?

PMLA के तहत दर्ज मामलों की जांच कई स्तरों पर होती है. पहले ED जांच पूरी करती है, फिर विशेष अदालत में शिकायत दाखिल होती है. इसके बाद आरोप तय होने, गवाहों की गवाही, दस्तावेजों की जांच और अंतिम फैसले तक लंबी न्यायिक प्रक्रिया चलती है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में मामले सालों तक ट्रायल में रहते हैं और दोषसिद्धि का आंकड़ा कम दिखाई देता है.

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ED का केस कैसे आगे बढ़ता है?

ED पहले मामले की जांच करती है. जरूरत पड़ने पर आरोपी को गिरफ्तार किया जाता है. इसके बाद विशेष PMLA अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाती है. अदालत में ट्रायल पूरा होने के बाद कोर्ट आरोपी को दोषी ठहराती है या बरी कर देती है. सरकार का कहना है कि इसी वजह से किसी साल दर्ज हुए मामलों और उसी अवधि में हुई दोषसिद्धि की सीधे तुलना नहीं की जा सकती.

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शुभेंदु प्रताप भूमंडल

शुभेंदु प्रताप भूमंडल

पत्रकारिता में बीते 5 साल से सक्रिय हैं. नेशनल और इंटरनेशनल न्यूज राइटिंग का अनुभव. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से साइंस में ग्रेजुएशन, फिर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता और वीडियो प्रोडक्शन की पढ़ाई. दैनिक भास्कर डिजिटल से करियर की शुरुआत. बतौर न्यूज ब्रीफ एडिटर भास्कर डिजिटल में 800 से ज्यादा बाइलाइन स्टोरी. वीडियो स्क्रिप्टिंग का भी अनुभव. अगस्त 2025 से टीवी9 डिजिटल के साथ नई पारी का आगाज.

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