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13 अगस्त को खत्म होगा मानसून सत्र, फिर 17 अगस्त को संसद का स्पेशल सेशन क्यों बुला रही सरकार?

August 5, 2026

Time Updated: Wednesday, August 5, 2026, 16:10 [IST]

Parliament Special Session: संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलना है, लेकिन इसके खत्म होते ही केंद्र सरकार 17 अगस्त के आसपास एक विशेष (Special) सत्र बुलाने की तैयारी में है। सवाल यह है कि जब संसद पहले से चल रही है, तो अलग से स्पेशल सेशन की जरूरत क्यों पड़ रही है? इसकी सबसे बड़ी वजह दो अहम संवैधानिक संशोधन विधेयक-परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण संशोधन बिल बताए जा रहे हैं।

अप्रैल में सरकार इन विधेयकों को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण पारित नहीं करा सकी थी। अब बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच सरकार को उम्मीद है कि उसके पास जरूरी समर्थन जुट सकता है।

Parliament Special Session

मानसून सत्र के बाद अलग से स्पेशल सेशन की जरूरत क्यों?

सरकार आमतौर पर विशेष सत्र तब बुलाती है, जब किसी खास विधेयक या राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर केंद्रित चर्चा और फैसला कराना हो। सूत्रों के मुताबिक इस बार स्पेशल सेशन का मुख्य एजेंडा परिसीमन और महिला आरक्षण संशोधन विधेयक होगा। सरकार चाहती है कि नियमित कार्यवाही से अलग इन संवैधानिक संशोधनों पर पूरा फोकस रहे और आवश्यक प्रक्रिया तेजी से पूरी हो सके।

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अप्रैल में सरकार क्यों नहीं पास करा सकी थी ये बिल?

अप्रैल में आयोजित तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान सरकार ने 131वें संविधान संशोधन विधेयक के तहत परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधान पेश किए थे। लेकिन संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती है। उस समय एनडीए के पास लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में आवश्यक विशेष बहुमत नहीं था, इसलिए विधेयक आगे नहीं बढ़ सका।

अब ऐसा क्या बदला कि सरकार फिर से दांव खेल रही है?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण बदले हैं और संसद में भाजपा की स्थिति पहले की तुलना में मजबूत मानी जा रही है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रीय दलों के रुख में संभावित बदलाव की भी चर्चा है। सरकार का मानना है कि अब विशेष बहुमत का अंतर पहले से कम हो गया है। इसी भरोसे पर वह दोबारा विधेयक को सदन में लाने की तैयारी कर रही है।

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दो-तिहाई बहुमत इतना अहम क्यों होता है?

सामान्य कानून साधारण बहुमत से पारित हो जाते हैं, लेकिन संविधान संशोधन के लिए विशेष बहुमत अनिवार्य होता है। लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में दो-तिहाई समर्थन मिलने के बाद ही ऐसा विधेयक पारित माना जाता है। इसलिए सरकार के लिए केवल सबसे बड़ा दल होना काफी नहीं है, बल्कि विपक्ष और सहयोगी दलों का अतिरिक्त समर्थन भी निर्णायक भूमिका निभाता है।

क्या DMK और अन्य विपक्षी दल सरकार का साथ देंगे?

सरकार की नजर कुछ क्षेत्रीय दलों के समर्थन पर है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती DMK का रुख माना जा रहा है। तमिलनाडु में परिसीमन लंबे समय से राजनीतिक विवाद का विषय रहा है और DMK पहले इसका विरोध करती रही है। ऐसे में यदि सरकार को आवश्यक विशेष बहुमत चाहिए, तो उसे सहयोगी दलों के साथ-साथ कुछ विपक्षी सांसदों का भी समर्थन जुटाना होगा। यही तय करेगा कि विशेष सत्र कितना सफल रहता है।