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ब्रिटेन के आसमान में 5 दिन में दिखे दो रहस्यमयी ऑब्जेक्ट, क्या रूस कर रहा था जासूसी?

October 17, 2026

ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स (RAF) के विमानों के बेहद करीब दो रहस्यमयी उड़ने वाले ऑब्जेक्ट देखे गए. दोनों घटनाएं फरवरी 2026 में सिर्फ पांच दिन के अंतर से उत्तरी सागर के ऊपर हुईं. एक घटना में ऑब्जेक्ट करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान के ऊपर से गुजरा. वह इतना करीब था कि विमान के पायलट ने अनजाने में अपना सिर नीचे कर लिया. दूसरी घटना में एक फाइटर जेट के पायलट ने काले रंग की गोल चीज को अपने विमान के ऊपर से गुजरते देखा.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों घटनाओं की जानकारी ब्रिटिश अधिकारियों को दी गई. जांच भी जारी है. हालांकि, अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि ये ऑब्जेक्ट ड्रोन ही थे या उनका किसी दूसरे देश से संबंध था. दोनों घटनाओं में ये चीजें रडार पर भी नहीं दिखीं.

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पहली घटना: 17 हजार फीट पर विमान के ऊपर से गुजरी चीज

18 फरवरी 2026 को नॉरफॉक के क्रोमर तट के पास RAF का एयरबस वॉयजर विमान एक टाइफून फाइटर जेट में हवा के बीच ईंधन भर रहा था. इसी दौरान पायलट ने एक छोटी, ड्रोन जैसी चीज को विमान के ठीक ऊपर से गुजरते देखा. पायलट ने रेडियो पर रडार कंट्रोलर से पूछा कि क्या उसे स्क्रीन पर कुछ दिखाई दे रहा है. कंट्रोलर ने बताया कि रडार पर ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा. पायलट के मुताबिक, वह चीज पूर्व से पश्चिम की ओर गई और विमान के करीब 100 से 150 फीट ऊपर से गुजरी.

वॉयजर के पायलट ने बाद में बताया कि ऑब्जेक्ट इतना करीब था कि उसने घबराकर अपना सिर नीचे कर लिया. ईंधन भर रहे टाइफून के पायलट ने भी उस चीज को देखा था. हालांकि, वॉयजर के पायलट ने बाद में माना कि वह निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि वह ड्रोन ही था. वह गुब्बारा या वैसी कोई दूसरी चीज भी हो सकती थी.

दूसरी घटना: कार के टायर जैसी दिखी काली चीज

दूसरी घटना 23 फरवरी को हुई. उत्तरी सागर में हंबरसाइड तट से करीब 30 मील दूर एक टाइफून फाइटर जेट दूसरे विमान के साथ हवाई युद्ध का अभ्यास कर रहा था. तभी पायलट ने काले रंग की गोल चीज देखी, जो आकार में कार के टायर जैसी थी. रिपोर्ट के मुताबिक, वह चीज विमान से करीब 300 फीट ऊपर से गुजरी. पायलट ने रडार कंट्रोलर को बताया कि ऑब्जेक्ट करीब 12,500 फीट की ऊंचाई पर पूर्व दिशा में जा रहा था. इस घटना की जानकारी नॉर्थ यॉर्कशायर पुलिस को भी दी गई.

RAF ने दोनों मामलों में पायलटों की कार्रवाई को सही माना. दूसरी घटना की स्थानीय जांच में कहा गया कि ऑब्जेक्ट रडार पर नहीं दिखा और घटना के समय रेडियो संपर्क पर भी इसकी पहचान नहीं हो सकी. इसलिए उसके कारणों का पता नहीं चल पाया.

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400 फीट की सीमा, फिर हजारों फीट ऊपर क्या कर रहा था ऑब्जेक्ट?

ब्रिटेन में आम ड्रोन उड़ाने के लिए सामान्य कानूनी ऊंचाई सीमा 400 फीट यानी करीब 120 मीटर है. ब्रिटेन की सिविल एविएशन अथॉरिटी के नियमों के मुताबिक, सामान्य ड्रोन उड़ानों को इस सीमा के भीतर रहना चाहिए. इसके मुकाबले पहली घटना में ऑब्जेक्ट करीब 17,000 फीट पर था, जबकि दूसरी घटना में फाइटर जेट करीब 12,000 से 12,500 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था. यह अंतर सवाल खड़ा करता है कि आखिर ये ऑब्जेक्ट क्या थे. हालांकि, सिर्फ ऊंचाई के आधार पर यह साबित नहीं होता कि वे किसी देश की सेना या खुफिया एजेंसी के नियंत्रण में थे. दोनों मामलों में अधिकारियों ने ऑब्जेक्ट की पहचान नहीं की है.

क्या रूस की जासूसी गतिविधियों से है कोई संबंध?

ब्रिटेन और यूरोप के सैन्य ठिकानों के आसपास ड्रोन दिखने की घटनाएं पहले भी सामने आई हैं. इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) की जुलाई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2024 से फरवरी 2026 के बीच 12 NATO सदस्य देशों और आयरलैंड में ड्रोन से जुड़ी 144 घटनाएं दर्ज की गईं. इनमें सैन्य ठिकानों के ऊपर उड़ने वाले ड्रोन भी शामिल थे.

रिपोर्ट में एनालिसिस किया गया कि रूस ने इन गतिविधियों में भूमिका निभाई हो सकती है और रूसी तेल टैंकरों के उस बेड़े का इस्तेमाल किया गया हो सकता है, जिसे शैडो फ्लीट कहा जाता है. ये टैंकर प्रतिबंधों के बावजूद तेल के व्यापार से जुड़े रहते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ जहाज ड्रोन लॉन्च करने, उन्हें वापस लेने या संकेत भेजने के लिए इस्तेमाल किए गए हो सकते हैं. हालांकि, इस एनालिसिस से ये साबित नहीं होता कि ब्रिटेन के इन दोनों ऑब्जेक्ट का संबंध रूस से है.

अमेरिका में भी दिखे थे रहस्यमयी ऑब्जेक्ट

ब्रिटेन की घटनाओं के कुछ हफ्ते बाद अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी स्थित फोर्ट मैकनेयर सैन्य ठिकाने के पास भी अज्ञात ड्रोन देखे जाने की खबर आई थी. इस ठिकाने पर अमेरिका के सीनियर सरकारी अधिकारी रहते हैं.

इससे पहले ब्रिटेन के नॉरफॉक और सफोक में अमेरिकी सैन्य हवाई अड्डों के ऊपर भी ड्रोन देखे जाने की घटनाएं सामने आई थीं. उस समय डिफेंस एक्सपर्ट्स ने इन्हें तट के पास मौजूद एक रूसी जहाज से जोड़ा था. लेकिन इन घटनाओं और फरवरी में RAF के विमानों के पास दिखे ऑब्जेक्ट के बीच कोई संबंध सामने नहीं आया है.

साल 2023 में अमेरिका के ऊपर चीन का एक ऊंचाई पर उड़ने वाला गुब्बारा भी देखा गया था. तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन के आदेश पर उसे मार गिराया गया. अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि गुब्बारे में खुफिया जानकारी जुटाने वाले सेंसर लगे थे. बाद में पेंटागन ने कहा था कि चीन का गुब्बारा एक बड़े निगरानी कार्यक्रम का हिस्सा था. चीन ने इसे वेदर बलून बताया था.

ब्रिटेन की सुरक्षा व्यवस्था कितनी तैयार?

ब्रिटेन की डिफेंस मिनिस्ट्री ने कहा कि बेहतर निगरानी और ऑब्जेक्ट पहचानने की तकनीक से संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों को दर्ज करने और उनका आकलन करने की क्षमता बढ़ी है. मंत्रालय ने व्यापक हवाई सुरक्षा और ड्रोन-रोधी तकनीक पर 2 अरब पाउंड से ज्यादा निवेश करने की बात भी कही. इसमें टाइफून विमानों को बेहतर बनाने और उनकी देखभाल पर खर्च शामिल है.

मंत्रालय के मुताबिक, हर ड्रोन दिखने की घटना को दुश्मन की कार्रवाई नहीं माना जा सकता. लेकिन अगर किसी गतिविधि से खतरा होने का आकलन किया जाता है, तो उससे निपटने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं. मंत्रालय ने इन दो घटनाओं के बारे में कोई खास जानकारी साझा नहीं किया है.

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शुभेंदु प्रताप भूमंडल

शुभेंदु प्रताप भूमंडल

पत्रकारिता में बीते 5 साल से सक्रिय हैं. नेशनल और इंटरनेशनल न्यूज राइटिंग का अनुभव. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से साइंस में ग्रेजुएशन, फिर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता और वीडियो प्रोडक्शन की पढ़ाई. दैनिक भास्कर डिजिटल से करियर की शुरुआत. बतौर न्यूज ब्रीफ एडिटर भास्कर डिजिटल में 800 से ज्यादा बाइलाइन स्टोरी. वीडियो स्क्रिप्टिंग का भी अनुभव. अगस्त 2025 से टीवी9 डिजिटल के साथ नई पारी का आगाज.

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