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कोल लेवी घोटाला: छठा चालान, 477 करोड़ की वसूली, विधायक देवेंद्र और रामगोपाल समेत 12 नए आरोपी - Raipur News

October 6, 2026

ईओडब्ल्यू ने करीब 500 करोड़ रुपए के कोल लेवी घोटाले में सोमवार को विशेष अदालत में 9500 पन्नों की छठी पूरक चार्जशीट पेश की। इसमें विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, आरपी सिंह, विनोद त

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  • देवेंद्र बोले- भाजपा डराने और फंसाने की राजनीति कर रही
  • कोर्ट की नोटिस के बाद भी कोई नहीं हुए पेश, जबकि कोर्ट पहुंचे थे आरोपी
  • विधायक देवेंद्र यादव व पूर्व विधायक चंद्रदेव राय को 5 नवंबर को पेशी का नया नोटिस

ईओडब्ल्यू के मुताबिक, वसूली के लिए सिंडिकेट बनाया गया था। कोयला परिवहन पर 25 रुपए प्रति टन, गारे-पलमा कोयले पर 70 रुपए और लौह अयस्क-पैलेट परिवहन पर 100 रुपए प्रति टन तक कथित वसूली की जाती थी। ईओडब्ल्यू के अनुसार 15 जुलाई 2020 को ई-परमिट व्यवस्था में बदलाव के बाद कथित वसूली का रास्ता बना। पहले रॉयल्टी और अन्य देय राशि जमा होते ही ई-परमिट स्वत: जारी होता था। बाद में जिला खनिज अधिकारी की भौतिक जांच और मैनुअल मंजूरी अनिवार्य की गई। आरोप है कि इसकी आड़ में कारोबारियों और परिवहनकर्ताओं से 25 रुपए प्रति टन नकद लिए जाते थे। रकम नहीं देने पर अनुमोदन रोकने और परिवहन बाधित करने का आरोप है। वसूली की रकम को आकस्मिक खर्च, कमीशन, खदान खर्च और समन्वय शुल्क जैसे मदों में वैध खर्च दिखाया जाता था। जिलों से नकदी रायपुर पहुंचाने का भी उल्लेख है।

12 आरोपियों पर अलग-अलग भूमिका का आरोप

ईओडब्ल्यू के अनुसार, रामगोपाल अग्रवाल से संबंधित डायरियों में ‘भवन’ और ‘सी पार्टी’ नाम से 32 प्रविष्टियों में 104.20 करोड़ रुपए दर्ज हैं। देवेंद्र यादव से जुड़ी प्रविष्टियों में खैरागढ़ उपचुनाव व निजी कार्यों के लिए 3 करोड़ रुपए का उल्लेख है। विनोद तिवारी पर 2.12 करोड़, आरपी सिंह पर 2.93 करोड़ और चंद्रदेव राय पर चुनाव खर्च के लिए 49.50 लाख रुपए व सोने के आभूषण लेने का आरोप है। आईएएस जयप्रकाश मौर्य पर पैलेट उद्योगपतियों से 100 रुपए प्रति टन वसूली के निर्देश के एवज में 1 करोड़ लेने का आरोप है। जोगेन्दर सिंह पर 8 फर्मों के जरिए करीब 40 करोड़ की कथित फर्जी बैंक प्रविष्टियां कराने का आरोप है।

डायरी में कूट शब्दों से हिसाब

ईओडब्ल्यू के अनुसार लेवी की रकम का हिसाब डायरियों और वाट्सएप समूहों में रखा जाता था। पाल समूह, टुडे समूह, दुर्ग समूह और जुगनू समूह में लेन-देन की प्रविष्टियां की जाती थीं। भवन, सी पार्टी, डी, आरपी, एमयू, नवाज, चंद्र और मौर्य जी जैसे कूट शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था। रकम के लिए मिश्री, शक्कर और गुड़ तथा भुगतान संबंधी संदेशों में गिट्ठी, रेती और मुरूम जैसे शब्द लिखे जाते थे।

एजेंसी के अनुसार, घोटाले की रकम खैरागढ़ उपचुनाव, उत्तरप्रदेश चुनाव, राजीव भवन में भुगतान, अचल संपत्तियों की खरीद, कोल वाशरी, वाहनों और निर्माण कार्यों में इस्तेमाल की गई। रकम को वैध दिखाने के लिए विभिन्न कंपनियों और फार्मों के खातों में असुरक्षित ऋण के रूप में डालकर उसकी परतें बनाने का भी आरोप है। इसमें मामले में ईओडब्ल्यू की जांच जारी है। एजेंसी ने अभी फाइनल चार्जशीट पेश नहीं की है।

जब्त डायरी में पैसे देने की एंट्री...

  • रामगोपाल अग्रवाल को 104.20 करोड़ रुपए।
  • देवेंद्र सिंह यादव को 3 करोड़ रुपए। खैरागढ़ उप चुनाव में 30 लाख रुपए। 40 लाख रुपए वापसी।
  • विनोद तिवारी को 2.12 करोड़ रुपए।
  • आरपी सिंह को 2.93 करोड़ रुपए।
  • चंद्रदेव प्रसाद राय को 49.50 लाख रुपए। 4.38 लाख रुपए के सोने का हार और झुमका।
  • आईएएस जयप्रकाश मौर्य को 1 करोड़ रुपए। इसके अलावा 15 लाख और 90 हजार रुपए।
  • आईएएस रानू के भाई पियूष साहू को 1.29 करोड़ का बैंक में ट्रांसफर। 13 अचल संपत्तियों में 4.08 करोड़ रुपए का निवेश।
  • सूर्यकांत के साथी राहुल मिश्रा को 19.06 करोड़ रुपए आवक और 18.50 करोड़ रुपए की जावक की एंट्री।
  • कारोबारी नवनीत तिवारी को 17.73 करोड़ रुपए की लेवी कलेक्शन।
  • कारोबारी जोगेन्दर सिंह को 29 करोड़ रुपए का आवक और 5.02 करोड़ रुपए की जावक की एंट्री।