अंबिकापुर के पूर्व कलेक्ट्रेट क्लर्क ऋषि सिंह को आय से अधिक संपत्ति मामले में 4 साल की सजा। ACB जांच में वैध आय से 1049 गुना अधिक संपत्ति मिली थी।
डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, अंबिकापुर
- Published: 15 Aug 2026, 10:09 AM IST
- Last Updated: 15 Aug 2026, 10:09 AM IST
अंबिकापुर। आय से अधिक संपत्ति के मामले में अंबिकापुर कलेक्ट्रेट में पदस्थ रहे क्लर्क ऋषि सिंह को विशेष सत्र न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने वर्ष 2013 में उनके केदारपुर स्थित मकान पर छापा मारकर बड़ी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के जेवर और अचल संपत्तियों का पता लगाया था। जांच में उनकी संपत्ति वैध आय की तुलना में 1049 गुना अधिक पाई गई थी।
2013 में ACB ने मारा था छापा
जानकारी के अनुसार, एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर ने क्लर्क ऋषि सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में मामला दर्ज किया था। इसके बाद 18 जून 2013 को ACB की टीम ने उनके केदारपुर स्थित मकान पर छापा मारा। छापे के दौरान उनके घर से 14 लाख 12 हजार रुपये नकद, लाखों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण और अन्य संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए थे। जांच में उनके नाम पर कई अचल संपत्तियां भी सामने आईं।
वैध आय से 1049 गुना ज्यादा मिली संपत्ति
ACB की जांच में सामने आया कि ऋषि सिंह के पास मौजूद कुल संपत्ति उनकी ज्ञात और वैध आय की तुलना में 1049 गुना अधिक थी। जांच एजेंसी ने संपत्तियों और आय के स्रोतों का विस्तृत परीक्षण किया। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी क्लर्क अपनी बेहिसाब संपत्ति के संबंध में संतोषजनक तरीके से आय का स्रोत नहीं बता सके। इसके बाद ACB ने वर्ष 2018 में विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में अभियोग पत्र पेश किया।
कोर्ट ने सुनाई 4 साल की सजा
लंबी सुनवाई के बाद विशेष सत्र न्यायालय ने ऋषि सिंह को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी मानते हुए 4 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। बताया गया है कि अदालत ने मामले में उनकी जमानत भी खारिज कर दी है। करीब 13 साल पहले हुई ACB की कार्रवाई के बाद अब अदालत के फैसले ने सरकारी सेवा के दौरान बेहिसाब संपत्ति अर्जित करने के मामले में सख्त संदेश दिया है।
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