'शक्ति की सप्तधारा' क्या है? लालकिले से पीएम मोदी ने देश को दिया विकसित भारत का नया विजन
Published: Saturday, August 15, 2026, 10:12 [IST]
Shakti Ki Saptadhara: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से विकसित भारत के निर्माण का नया विजन देश के सामने रखा। पीएम मोदी ने कहा कि जो काम पिछले पांच दशकों में नहीं हो पाया, उसे अगले पांच से सात वर्षों में पूरा करने की दिशा में देश को तेजी से आगे बढ़ना होगा।
इसके लिए उन्होंने 'शक्ति की सप्तधारा' का आह्वान किया। इस विजन में मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और फूड प्रोसेसिंग, तकनीक एवं इनोवेशन, गतिशक्ति, रक्षा, हरित ऊर्जा और भारत की सॉफ्ट पावर को शामिल किया गया है। पीएम मोदी के मुताबिक, इन सात शक्तियों को युवाओं की ऊर्जा से जोड़कर भारत को वैश्विक विकास का केंद्र बनाना होगा।
पहली शक्ति- उत्पादन: मैन्युफैक्चरिंग में बनेगा भारत ग्लोबल हब
पीएम मोदी ने सप्तधारा की पहली शक्ति उत्पादन की शक्ति को बताया। उन्होंने कहा कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अपनी क्षमता तेजी से बढ़ानी होगी। छोटे पुर्जों से लेकर बड़े उत्पादों तक पूरी वैल्यू चेन देश में विकसित करनी होगी। डिजाइन से उत्पादन तक भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का केंद्र बनना होगा। प्रधानमंत्री ने क्वालिटी, स्केल और 'जीरो डिफेक्ट' उत्पादों को भारत की पहचान बनाने पर जोर दिया।
दूसरी शक्ति- कृषि और फूड प्रोसेसिंग: किसान बनेगा ग्लोबल ब्रांड
सप्तधारा की दूसरी शक्ति कृषि और फूड प्रोसेसिंग है। पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय किसानों के लिए दुनिया के बाजार खुल रहे हैं और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए इन बाजारों तक पहुंच बनानी होगी। कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग बढ़ाकर उन्हें ग्लोबल ब्रांड बनाने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने केमिकल फ्री खेती की बढ़ती मांग का भी जिक्र किया। इससे किसानों की आय और भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान बढ़ाने का लक्ष्य है।
ये भी पढे़ं: क्या है PM मोदी का देश के लिए आने वाले 5 साल को लेकर रोडमैप? अपनी सरकार का 12 सालों का दिया पूरा हिसाब
तीसरी शक्ति- तकनीक और इनोवेशन: दुनिया के लिए समाधान बनाएगा भारत
तीसरी शक्ति तकनीक और इनोवेशन है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक भारत के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रही है। ऐसे में देश को सिर्फ तकनीक का इस्तेमाल करने वाला नहीं, बल्कि नई तकनीक बनाने वाला बनना होगा। भारत को इनोवेशन का ग्लोबल हब बनाने पर जोर दिया गया। डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचाने की बात भी पीएम मोदी ने अपने विजन में प्रमुखता से रखी।
चौथी शक्ति- गतिशक्ति: सड़क, पोर्ट और एयरपोर्ट से बढ़ेगी विकास की रफ्तार
सप्तधारा की चौथी शक्ति गतिशक्ति है। पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लिए देश में सीमलेस कनेक्टिविटी जरूरी है। इसके लिए आधुनिक सड़कों, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, एयरपोर्ट और पोर्ट का विस्तार करना होगा। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से लोगों और सामान की आवाजाही आसान होगी और कारोबार को भी गति मिलेगी। प्रधानमंत्री के विजन में गतिशक्ति सिर्फ परिवहन व्यवस्था नहीं, बल्कि देश की आर्थिक गतिविधियों को तेज करने और अलग-अलग क्षेत्रों को आपस में जोड़ने का माध्यम है।
पांचवीं शक्ति- रक्षा: आत्मनिर्भर डिफेंस से मजबूत होगा भारत
पांचवीं शक्ति रक्षा शक्ति है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना अब भारत की जरूरत है। देश को डिफेंस प्रोडक्ट्स के निर्माण में अपनी क्षमता बढ़ानी होगी और पूरी उत्पादन श्रृंखला विकसित करनी होगी। ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम जैसे आधुनिक रक्षा उपकरणों पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई। पीएम मोदी का जोर भारत को रक्षा उपकरणों के बड़े बाजार के साथ-साथ इनके निर्माण और निर्यात का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने पर रहा।
ये भी पढे़ं: Independence Day 2026: नेहरू से मोदी तक, Red Fort पर किस PM ने कितनी बार फहराया तिरंगा?
छठी शक्ति- ऊर्जा: ग्रीन इकोनॉमी से विकास को मिलेगी नई दिशा
सप्तधारा की छठी शक्ति ऊर्जा शक्ति है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ना होगा। दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग की चुनौती से जूझ रही है और ऐसे समय में स्वच्छ ऊर्जा भारत के विकास का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। प्रधानमंत्री ने देश की लंबी कोस्टलाइन जैसी संभावनाओं का भी जिक्र किया। ग्रीन इकोनॉमी के जरिए विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
सातवीं शक्ति- सॉफ्ट पावर: योग से सिनेमा तक दुनिया में बढ़ेगा भारत का प्रभाव
सप्तधारा की सातवीं और आखिरी शक्ति भारत की सॉफ्ट पावर है। पीएम मोदी ने योग, आयुर्वेद, आस्था के केंद्रों, फिल्मों, हैंडलूम और गेमिंग को भारत की वैश्विक ताकत बताया। उन्होंने कहा कि क्रिएटिव इंडस्ट्री में दुनिया भारत की ओर देख रही है। ऑडियो-वीडियो और एंटरटेनमेंट के साथ पर्यटन और प्राकृतिक संपदा को भी बढ़ावा देने की जरूरत है। लक्ष्य है कि भारत अपनी सांस्कृतिक और रचनात्मक ताकत से पूरी दुनिया को आकर्षित करे।