क्लासिक रेस्टोरेंट, प्रीमियम पब और कैफे, जगमगाती सड़कें, हर तरफ पॉप और जैज म्यूजिक का शोर। नाइटलाइफ के लिए मशहूर ये कोलकाता का पॉश इलाका पार्क स्ट्रीट है। यहां क्रिसमस और न्यू ईयर खूब सेलिब्रेट किया जाता है। इस बार पार्क स्ट्रीट की पहचान बदलती दिख रह
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यहीं एलेन पार्क में तांडव थीम पर पंडाल बन रहा है। ये अकेला बदलाव नहीं। इस बार महाअष्टमी पर शराब दुकानें बंद रहेंगी, डीजे पर रोक है और सुरक्षा का जिम्मा 20 हजार सिविक वॉलंटियर संभालेंगे। पढ़िए रिपोर्ट....

कोलकाता के ईडन गार्डन में 10 अक्टूबर को बड़ा प्रोग्राम रखा गया है, जिसमें PM मोदी दुर्गा पूजा का शुभारंभ करेंगे।
सबसे पहले पार्क स्ट्रीट की बात… दुर्गा पूजा बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार, फिर डीजे पर रोक क्यों
पार्क स्ट्रीट के जिस एलेन पार्क में पंडाल बन रहा है, उसके एक तरफ बाजार है, तो दूसरी तरफ बिशप हाउस। आसपास एंग्लो इंडियंस, यहूदी और मुस्लिम परिवार रहते हैं। यहां दुर्गा प्रतिमा तैयार है।
पंडाल में मिलीं फैशन डिजाइनिंग की स्टूडेंट कोनिका गोस्वामी कहती हैं, ‘यहां क्रिसमस तो मनता ही है, तो दुर्गा पूजा करने में भी मुझे कोई बुराई नहीं लगती।’
हालांकि, कोनिका दुर्गा पूजा में डीजे बंद करने के सरकार के फैसले से खफा हैं। वे कहती हैं,

ये बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार है। इसका सेलिब्रेशन कम करना सही नहीं। गणेश पूजा और विश्वकर्मा पूजा में डीजे बज सकता है, तो दुर्गा पूजा में क्या दिक्कत है।

'पार्क स्ट्रीट में दुर्गा पूजा करवाने में 370 साल लग गए'
एलेन पार्क में कोलकाता सनातनी संघ कमेटी दुर्गा पूजा करा रही है। कमेटी के जनरल सेक्रेटरी नवीन मिश्रा कहते हैं, ‘पार्क स्ट्रीट इलाके में 95% हिंदू हैं। फिर भी पूजा करने की परमिशन नहीं दी गई। 2016 और 2017 में हमने परमिशन के लिए पुलिस स्टेशन में एप्लीकेशन दी थी, लेकिन अनुमति नहीं मिली।’
’पश्चिम बंगाल में कांग्रेस, लेफ्ट और ममता बनर्जी की सरकार रही, लेकिन पूजा नहीं हो सकी। ममता सरकार में हमें परमिशन नहीं मिली, तभी हमने सोच लिया था कि हमारी सरकार आने के बाद यहां दुर्गा पूजा जरूर होगी। यहां पूजा करवाने में 370 साल लग गए।’
पूजा की तैयारियों को लेकर नवीन कहते हैं, ’मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी चतुर्थी के दिन पंडाल का उद्घाटन कर सकते हैं। बाकी जैसे पूजा होती है, उसी विधि-विधान से होगी।’

’बंगालियों के लिए दुर्गापूजा का मतलब ही नॉन वेज’
पिछले महीने हावड़ा पहुंचे कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था- ‘मैं बंगाल के लोगों से गुजारिश करता हूं कि दुर्गा पूजा के दौरान नॉन वेज न खाएं।‘ इस पर बंगाल में बहस छिड़ गई। सरकारी प्रतिबंध तो नहीं लगा, लेकिन विश्व हिंदू परिषद ने आयोजकों को पूजा पंडालों के पास नॉनवेज न रखने के निर्देश जारी किए हैं। वहीं सरकार ने महाअष्टमी पर शराब दुकानें बंद रखने के लिए कहा है।
पार्क स्ट्रीट में जॉब करने वाली डोल चक्रवती और सोनल गुप्ता मिलीं। एक बंगाल से हैं और दूसरी बिहार से। दुर्गापूजा दोनों के लिए खास है। शराब पर रोक के फैसले से नाराज होकर वे कहती हैं, ‘जिसे पीना है, वो पिएगा ही। लोग पहले से स्टॉक करके रख लेंगे। दूसरा पहलू ये भी है कि इससे शराब की कालाबाजारी बढ़ेगी।’
’नॉन वेज को लेकर भी कई तरह की बातें हो रही हैं। बंगाली दुर्गापूजा का मतलब ही नॉनवेज समझते हैं। इस दौरान घर और बाहर तक तरह-तरह के नॉन वेज आइटम बनते और बिकते हैं। खुशी बस यही है कि कार्निवल नहीं हो रहा है। इसमें अलग-अलग संस्कृतियों की झलक तो दिखती थी, लेकिन दो-तीन दिन के लिए सड़कें बंद हो जाती थीं। काम के सिलसिले में बाहर जाने वालों की दिक्कतें बढ़ जाती थी।’

इस बार रेड रोड कॉर्निवल नहीं होगा। इसमें कोलकाता की रेड रोड पर झांकियों निकाली जाती थी। ममता सरकार ने 2016 में इसकी शुरुआत की थी। (फाइल फोटो)
’मटन और इलिश माछ के बिना पूजा की खुशी अधूरी’
सरकारी नौकरी से रिटायर्ड अमिताभ मजूमदार के लिए इस बार दुर्गा पूजा एकदम अलग है। वे बताते हैं, ’कई लोगों को सरकार के फैसले पसंद नहीं आए, लेकिन वे बोलना नहीं चाहते हैं। दुर्गा पूजा का मतलब ही मटन और इलिश माछ (हिलसा मछली) है। इसके बिना पूजा की खुशी अधूरी है। बाकी जिसे वेज खाना है, वो खाए।’
अमिताभ कार्निवल बंद होने से नाराज हैं। वो कहते हैं, ‘बंगाल का कार्निवल दुनिया भर में मशहूर है। ये हमारी संस्कृति को कई हजार किलोमीटर दूर तक पहुंचाता रहा है। इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए था। ये पूरी तरह राजनीतिक फैसला है।‘
वहीं, नेटवर्किंग कंपनी में काम करने वाली शीला डे कहती हैं, ‘नॉन वेज न खाने पर बहस सही नहीं है। साल में एक बार मां घर आती हैं। ये हमारे लिए उत्सव का समय है। ऐसे में खाने-पीने में कोई सख्ती नहीं होनी चाहिए।‘
सरकार ने इस बार मूर्ति विसर्जन के लिए चार दिन का वक्त दिया है। 21 से 24 अक्टूबर के बीच विसर्जन करना अनिवार्य है। शीला इस पर खुशी जताते हुए कहती हैं, ‘पूजा खत्म होने के बाद लोग मूर्ति पर ध्यान नहीं देते। इस नियम के चलते कम से कम श्रद्धा के साथ मां की विदाई हो सकेगी।‘

कोलकाता में चोख्खु दान परंपरा के तहत एक कारीगर दुर्गा मां की आंखों में रंग भर रहा है।
दुर्गा पूजा में मूर्ति बनाने से लेकर स्टॉल लगाने तक सभी धर्मों के लोग शामिल होते हैं। हमने बदलाव को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों से बात करने की कोशिश की, लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ। नॉन वेज स्टॉल लगाने वाले एक वेंडर ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया, 'हम पूजा में स्टॉल लगाने की तैयारी कर रहे थे। इसे लेकर बहस शुरू हुई, प्लान बदल दिया। मैं किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहता।'
खाने-पीने पर बवाल न हो, इसलिए RSS के स्वयंसेवक एक्टिव
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में हमारे एक सूत्र नॉन वेज और शराब बंद पर कहते हैं, ‘देखिए, प्राणप्रतिष्ठा के बाद उस जगह देवी का वास हो जाता है। ऐसे में वहां शराब और नॉनवेज का इस्तेमाल सही नहीं है। हालांकि, किसी पर जबरदस्ती नहीं है। खाने-पीने को लेकर कोई बवाल न हो, इसलिए स्वयंसेवक दल एक्टिव रहेंगे।’
’हमारा बुक स्टॉल लगाने का भी प्लान है। लेफ्ट पार्टियां हर पूजा पंडाल के पास अपना बुक स्टॉल लगाती हैं। उसी तरह संघ के लोग भी पूजा पंडाल के बाहर स्टॉल लगाएंगे। उसमें संघ के काम और स्वयं सेवकों की जिंदगी से जुड़ी किताबें रखी जाएंगी। ताकि लोगों तक उनके किए काम पहुंच सकें।’

दुर्गा पूजा के लिए 45 हजार पाड़ा क्लबों को 1-1 लाख की मदद
बंगाल में करीब 45 हजार पाड़ा क्लब दुर्गा पूजा का आयोजन करते हैं। इनमें से 3 हजार क्लब कोलकाता में हैं। BJP सरकार ने पूजा के लिए हर क्लब को 1-1 लाख रुपए दिए हैं। इस बार फ्री बिजली भी दी जा रही है। पूजा कमेटियों में अध्यक्ष समेत बाकी पदों पर भी BJP के लोग काबिज हो गए हैं।
कोलकाता की सबसे बड़ी दुर्गापूजा कमेटी श्रीभूमि स्पोटिंग क्लब लेक टाउन में पंडाल बनाती है। हर साल अलग-अलग थीम पर पंडाल बनता है। कभी बुर्ज खलीफा, कभी वेटिकन सिटी तो कभी हवा महल। यहां देवी को सोने-चांदी के गहने पहनाए हैं, जिन्हें देखने के लिए बहुत भीड़ पहुंचती है।
TMC सरकार में मंत्री रहे सुजीत बोस क्लब के संरक्षक थे। अभी नगरपालिका भर्ती घोटाला मामले में जेल में हैं, तो क्लब का प्रशासनिक विभाग BJP के लोगों के पास है। यहां दो हफ्ते तक पूजा चलती थी, लेकिन इस बार चतुर्थी से ही पंडाल खोला जाएगा। साथ ही प्रतिमा को सोने-चांदी के गहने नहीं पहनाए जाएंगे।
क्लब के प्रेसिडेंट कनक देवनाथ बताते हैं, ‘इस बार की पूजा सुजीत बोस और उसके परिवार के लिए नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए होगी। सोने-चांदी के गहने पहनाने की वजह से पहले आम लोग न माता के दर्शन कर पाते थे, न पुष्पांजलि दे पाते थे। पंडाल में सिर्फ पुलिस बल और VIP गेस्ट ही आ पाते थे।‘

सरकारी मदद मिलने की वजह से पूजा कमेटियां भी बढ़ रही हैं। सितंबर तक सहज पोर्टल पर कोलकाता में 2318 रजिस्ट्रेशन हो चुके थे, जिसमें 270 नए हैं।
छोटे वेंडर पंडाल से 100 मीटर दूर स्टॉल लगा पाएंगे
कोलकाता म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ने भी दुर्गा पूजा को लेकर निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत पंडाल से 100 मीटर की दूरी पर खाने-पीने की दुकानों लगानी होंगी। इसके पीछे आग से सुरक्षा को बड़ी वजह बताया गया।
इसका असर छोटे वेंडर जैसे- गोलगप्पे, झालमुड़ी और खिलौने बेचने वालों की कमाई पर पड़ेग। पंडाल के मेन गेट से 100-200 मीटर दूर होते ही उनकी ग्राहकी आधी रह जाएगी।
जादवपुर यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर विकास दीक्षित इसे बेहतर समझाते हैं। वे कहते हैं, ‘छोटे वेंडर और रेहड़ी वालों के लिए दुर्गा पूजा ही सालभर में एक्स्ट्रा पैसा कमाने का समय होता है। अगर पंडाल उनसे दूर हो जाएंगे, तो बहुत नुकसान होगा।‘
‘लोग झांकियां देखते हुए रेहड़ी वालों से खाना-पानी लेते हैं। अगर ये पंडाल से दूर हो गए, तो लोग झांकियों से बाहर निकलने के बाद घर और रेस्टोरेंट में जाना ज्यादा पसंद करेंगे। हालांकि अभी ये कहना मुश्किल है कि इन दिशा-निर्देशों का कितना पालन हो पाएगा।‘

आनंदमठ के 150 साल पूरे होने पर खिदिरपुर दुर्गोत्सव कमेटी किताब की बातें पेटिंग के जरिए पूरे पंडाल में दर्शा रही है।
बाकी धर्मों में जब उत्सव नहीं, फिर दुर्गा पूजा शरदोत्सव क्यों
BJP प्रवक्ता देबजीत सरकार का कहना है कि ममता सरकार के दौरान हर पूजा से पहले हाईकोर्ट से ऑर्डर लेना पड़ता है। अबकी धूमधाम से पूजा होगी।
CM शुभेंदु अधिकारी ने पंडालों में शरदोत्सव की जगह दुर्गा पूजा लिखने को कहा है। इसे लेकर देबजीत कहते हैं कि जब बाकी धर्मों में उत्सव नहीं होता, तब दुर्गापूजा को शरदोत्सव क्यों कहा जाए।
हालांकि सियासी दल इससे नाराज हैं। CPM नेता सृजन भट्टाचार्य कहते हैं, ‘हर बंगाली इसे त्योहार की तरह मनाता है। पूजा भले हिंदुओं की है, लेकिन इसे शरदोत्सव की तरह हर कोई मानता है। यही सदियों से बंगाल की खूबसूरती रही है। BJP अपनी राजनीति के लिए माहौल खराब कर रही है। ताकि बाकी धर्मों के लोग इससे दूरी बना लें।‘
‘मां दुर्गा का दूसरा नाम मां शारदा है। शरदोत्सव का साफ मतलब है- शारदा का उत्सव। ये दुर्गा पूजा से अलग नहीं है, लेकिन BJP इसे लेकर विवाद खड़ा कर रही है।‘
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