नगर निगम में सरकारी पैसे के गलत तरीके से इस्तेमाल होने का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें सफाई का काम तो निगम करवा रहा है, लेकिन जिन सड़कों की सफाई हो रही है, वे उसके अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आतीं। फिरोजपुर रोड और एलिवेटेड रोड एनएचएआई के अधीन हैं
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निगम के हेल्थ ब्रांच के अधिकारी के अनुसार यह काम एक साल से ज्यादा समय से चल रहा है। हैरानी की बात है कि एनएचएआई ने न तो निगम को इन सड़कों की मशीनों से सफाई करवाने की लिखित मंजूरी दी और न ही सफाई के बदले भुगतान करने की सहमति।
इसके बावजूद निगम अपने खाते से ठेकेदार को भुगतान कर रहा है। जिम्मेदार अधिकारी हेल्थ अफसर विपुल मल्होत्रा का कहना है कि एनएचएआई से 32 लाख रुपए का क्लेम लेने के लिए दो बार नोटिस जारी किए गए हैं। दूसरी तरफ एनएचएआई की प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रियंका मीणा ने कहा है कि ऐसी कोई मंजूरी नहीं दी गई और यह काम उनके विभाग के दायरे में ही नहीं आता। एनएचएआई एक रुपया नहीं देगा।
153 किमी सड़क में से 64 किमी हाईवे
नगर निगम ने शहर के अंदर की 153 किलोमीटर सड़कों की मैकेनिकल रोड स्वीपिंग का ठेका निजी कंपनी प्यारा सिंह एंड कंपनी को दिया है। इसके लिए कंपनी को 827 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान किया जाता है। अगर फिरोजपुर रोड की बात करें तो ये मेन सड़क और पुल को अप-डाउन और दोनों तरफ से डिवाइडर मिलाकर कुल 64 किलोमीटर बनते हैं। जबकि कांट्रेक्टर को 153 किलोमीटर निगम हद की सड़कें साफ करने का ठेका दिया गया है। ऐसे में इस 64 किमी सड़क की सफाई का खर्चे पर सवाल उठ रहे हैं।
एफएंडसीसी में उठाया जाएगा मामला
एफएंडसीसी मेंबर पार्षद गौरव भट्टी ने कहा कि अधिकारियों को पहले एनएचएआई से सफाई के खर्च की मंजूरी और भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए था। जिस अधिकारी ने बिना मंजूरी एनएचएआई की सड़कों पर सफाई करवाकर निगम के खाते से भुगतान जारी करवाया है, उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। वे इस मुद्दे को एफएंडसीसी में उठाएंगे। वहीं, सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर ने कहा कि निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।
एनएचएआई का दावा- मशीनों से सफाई करवाना हमारी जिम्मेदारी नहीं
वहीं पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु की पत्नी और सीनियर कांग्रेस नेता ममता आशु ने कहा कि उनकी सरकार के समय मैकेनिकल रोड स्वीपिंग प्रोजेक्ट को रद्द करवाया गया था, क्योंकि उनके अनुसार इसमें गड़बड़ियां हो रही थीं। ममता आशु ने कहा कि जिस कंपनी का ठेका उस समय रद्द किया गया था, वही कंपनी अब दोबारा काम कर रही है।
नगर निगम के हेल्थ अफसर विपुल मल्होत्रा के मुताबिक, फिरोजपुर रोड और एलिवेटेड रोड पर गंदगी रहने के कारण शहर की स्वच्छता रैंकिंग प्रभावित होती है। इसी वजह से निगम ने वहां मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों से सफाई करवानी शुरू की। इस सफाई पर 32 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं जिसका क्लेम एनएचएआई से किया जाएगा। क्लेम लेने के लिए एनएचएआई को दो बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
एनएचएआई से पैसा लेकर रहेंगे। वहीं एनएचएआई की प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रियंका मीणा का कहना है कि एनएचएआई के दायरे में मशीनों से सफाई करवाना शामिल नहीं है और उनकी टीमें मैनुअल सफाई करती हैं। निगम अपने स्तर पर सफाई करवाता है तो उसकी जिम्मेदारी होगी। फिलहाल उन्हें निगम से भुगतान के संबंध में नोटिस नहीं मिला है।