Mahakaleshwar Temple: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में दान व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. अब बाबा महाकाल को श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले सोने और चांदी के आभूषणों की शुद्धता महज 30 सेकंड में पता चल सकेगी. इसके लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने करीब 15 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक करेटोमीटर (Karatometer) मशीन स्थापित की है.
अब तक मंदिर में दान की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी निगरानी और डिजिटल भुगतान के लिए क्यूआर कोड जैसी सुविधाएं उपलब्ध थीं. नई मशीन लगने के बाद आभूषणों की जांच भी पूरी तरह तकनीकी तरीके से की जाएगी. इस मशीन की मदद से यह तुरंत पता लगाया जा सकेगा कि दान में दिया गया सोना या चांदी कितने प्रतिशत शुद्ध है और उसमें कितनी मिलावट है.
एक्स-रे फ्लोरोसेंस तकनीक से करेगी जांच
श्री महाकालेश्वर मंदिर की सहायक प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि दान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से यह मशीन खरीदी गई है. उन्होंने बताया कि करेटोमीटर एक्स-रे फ्लोरोसेंस (XRF) तकनीक पर आधारित है. जैसे ही सोने या चांदी का आभूषण मशीन में रखा जाता है, यह विशेष ऊर्जा तरंगों के जरिए उसकी धातु संरचना का विश्लेषण कर लेती है. करीब 30 सेकंड में मशीन यह बता देती है कि आभूषण कितना शुद्ध है और उसमें अन्य धातुओं की कितनी मात्रा मौजूद है. उन्होंने बताया कि अब पहले आभूषण की शुद्धता का परीक्षण किया जाएगा और उसके बाद उसी के आधार पर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा दान की आधिकारिक रसीद जारी की जाएगी.

पहले समिति करती थी जांच
नई मशीन आने से पहले मंदिर में आभूषणों की जांच तीन सदस्यीय समिति करती थी. यह समिति रोस्टर के आधार पर अपनी सेवाएं देती थी. समिति के सदस्य रविंद्र सोनी ने बताया कि सभी सदस्य निशुल्क सेवाएं देते रहे हैं और अनुभव के आधार पर आभूषणों की शुद्धता का आकलन करते थे.
उन्होंने कहा कि मशीन के आने से जांच प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और सटीक हो गई है. हालांकि नई तकनीक लागू होने के बावजूद समिति पहले की तरह अपनी भूमिका निभाती रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर तकनीकी जांच के साथ सहयोग भी करेगी.
श्रद्धालुओं ने फैसले का किया स्वागत
महाकाल मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस नई व्यवस्था का स्वागत किया है. वाराणसी से दर्शन के लिए आए श्रद्धालु शुभम पटेल ने कहा कि दान व्यवस्था में पारदर्शिता लाने का यह सराहनीय कदम है. इससे श्रद्धालुओं का मंदिर प्रबंधन पर विश्वास और मजबूत होगा.
उन्होंने कहा कि कई बार श्रद्धालु अपने साथ पारिवारिक या कीमती आभूषण लेकर आते हैं. ऐसे में यदि उन्हें तुरंत यह जानकारी मिल जाए कि उनका आभूषण कितना शुद्ध है, तो यह उनके लिए भी संतोष की बात होगी. मंदिर प्रशासन का मानना है कि नई तकनीक से दान प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और आधुनिक बनेगी, जिससे श्रद्धालुओं का भरोसा और मजबूत होगा.

रवि सेन, उज्जैन