Bihar MLC Election 2026: बिहार विधान परिषद की 8 सीटों के लिए मतगणना शुरू हो गई है। इस चुनाव में 150 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा। चुनाव परिणाम पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ सबकी नजर पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र पर भी टिकी है, जहां जदयू के मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार और जन सुराज समर्थित प्रत्याशी अनुज सिंह के बीच मुकाबला है। इस सीट से मोकामा विधायक अनंत सिंह की प्रतिष्ठा भी जुड़ी हुई है।
पटना स्नातक सीट पर जन सुराज समर्थित प्रत्याशी अनुज सिंह को मोकामा विधायक अनंत सिंह का समर्थन मिला है। नीरज सिंह का विरोध कर अनुज सिंह के समर्थन में उतरने के कारण अनंत सिंह को जदयू से निष्कासित कर दिया गया था। ऐसे में इस सीट का परिणाम उनके लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है।
मतगणना के बीच अनुज सिंह की जीत की उम्मीद में अनंत सिंह के आवास पर जश्न की तैयारियां की गई हैं। उनके घर पर पंडाल बनाया गया है और मिठाइयां भी बड़े पैमाने पर तैयार की गई हैं। मतगणना से पहले अनुज सिंह ने पटना स्नातक सीट पर 5,000 वोटों से जीत का दावा किया था। अब सभी की नजर चुनाव परिणाम पर है।
बिहार विधान परिषद की इन 8 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। मतदान के आंकड़ों में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना में अधिक वोटिंग दर्ज की गई थी। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में औसतन 53.42 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान का औसत 82.85 प्रतिशत रहा। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक 89.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वहीं, तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे कम 48.51 प्रतिशत वोट पड़े।
सभी निर्वाचन क्षेत्रों के लिए संबंधित प्रमंडलीय मुख्यालय वाले शहरों में मतगणना केंद्र बनाए गए हैं। मतगणना के दौरान सबसे पहले प्रत्याशियों को मिले प्रथम वरीयता के मतों की गिनती की जाएगी। यदि पहली गिनती में जीत का फैसला नहीं होता है, तो द्वितीय वरीयता के मतों की गणना की जाएगी। जरूरत पड़ने पर यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
कैसे तय होती है MLC चुनाव में जीत?
विधान परिषद के इन चुनावों में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत यानी सिंगल ट्रांसफरेबल वोट (STV) प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मतदाता अपनी पसंद के प्रत्याशियों को वरीयता क्रम में 1, 2, 3 आदि अंक देते हैं।
सबसे पहले प्रथम वरीयता के मतों की गिनती होती है। इसके बाद निर्धारित चुनावी कोटा और लागू नियमों के आधार पर विजेता का फैसला किया जाता है। यदि कोई प्रत्याशी आवश्यक कोटा हासिल नहीं करता, तो सबसे कम मत पाने वाले प्रत्याशी को बाहर किया जा सकता है और उसके मतपत्रों पर दर्ज अगली वरीयता के मतों को नियमों के अनुसार शेष प्रत्याशियों के बीच स्थानांतरित किया जाता है।
यह प्रक्रिया तब तक जारी रह सकती है, जब तक किसी प्रत्याशी की जीत निर्धारित नहीं हो जाती। इसलिए इन चुनावों में केवल प्रथम वरीयता के मत ही नहीं, बल्कि दूसरी और आगे की वरीयताओं के मत भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों के नतीजे राजनीतिक दृष्टि से अहम माने जा रहे हैं। खासकर पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार और अनुज सिंह के बीच मुकाबले के परिणाम को लेकर उत्सुकता है। इस सीट पर अनंत सिंह के समर्थन और जदयू से उनके निष्कासन के बाद चुनावी मुकाबला और चर्चा में है। अब मतगणना के नतीजों से स्पष्ट होगा कि किस प्रत्याशी को मतदाताओं का समर्थन मिला है और पटना स्नातक सीट पर किसकी जीत होती है।