पूगल क्षेत्र में सौर ऊर्जा की नींव फर्जी तरीके से बेची गई जमीनों पर रखी जा रही है। इनमें सबसे प्रमुख नाम भारत सरकार के उपक्रम मैसर्स एसजेवीएन (सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड) ग्रीन एनर्जी लिमिटेड का है। कंपनी ने यहां एक हजार मेगावाट का सोलर प्लांट लगा
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भास्कर इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि नवरत्न कंपनी मैसर्स एसजेवीएन ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने करणीसर भाटियान और बांदरेवाला में 10 हजार बीघा में एक हजार मेगावाट का सोलर प्लांट लगाया है। इसमें निजी काश्तकारों से खरीदी गई 400 बीघा जमीन का आवंटन फर्जी है। इसी प्रकार, जयपुर की एमआरएस बिल्ड विजन प्राइवेट लिमिटेड को भी 250 बीघा जमीन फर्जी तरीके से बेच दी गई।
मैसर्स अवाड़ा आरजे बीकानेर प्राइवेट लिमिटेड और महाराष्ट्र इंडिया सहित कई सोलर कंपनियों को फर्जी तरीके से सरकारी जमीन बेची गई है। इन कंपनियों ने करोड़ों रुपए का निवेश भी कर दिया। ऐसी कुल 31 जमाबंदियां हैं, जिनमें से ज्यादातर जमीनें फर्जी तरीके से सोलर कंपनियों को बेच दी गईं। उनके म्यूटेशन चढ़ गए और लीज भी रजिस्टर्ड हो गई, जबकि कुछ जमीनों के एग्रीमेंट हो चुके हैं। फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद अब जमाबंदी में नोट लगा दिए गए हैं कि इनका उपयोग किसी भी कोर्ट में साक्षी के रूप में नहीं किया जा सकता। भास्कर के पास इससे संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं।
फर्जीवाड़ा कर 50 साल पुराने पट्टों में लगाई सेंध
दरअसल, बीकानेर में सोलर की चमक से मालामाल होने के लिए भू-माफिया ने भ्रष्ट सरकारी तंत्र से मिलकर यह खेल रचा। करणीसर भाटियान, बांदरेवाला और दीनसर गांव में 50 साल पुराने पट्टों में सेंध लगाकर सरकार की कुल 2010 बीघा बेशकीमती भूमि को ही कब्जा लिया। करीब 2 लाख रुपए प्रति बीघा बाजार कीमत वाली इन जमीनों से सरकार को सीधे तौर पर 40 करोड़ रुपए के राजस्व का चूना लगाया गया है। अब इन जमीनों को वापस अराजीराज करने की तैयारी की जा रही है। यदि ऐसा हुआ तो सोलर कंपनियों को बड़ा भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। उधर, जिला कलेक्टर निशांत जैन ने इस मामले में राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगा है।
10 साल तक चलता रहा खेल
सरकारी जमीनों को हड़पने का यह पूरा खेल मार्च 2014 से लेकर फरवरी-2024 तक चला। आरोपियों ने 52 से 53 साल पुराने पट्टों के आधार पर नॉन टिनेंट/मृत्युपरांत वारिसों के नाम से आवंटन दर्ज किए। इस फर्जीवाड़े के लिए तत्कालीन एसडीएम सीता शर्मा और मनोज खेमदा, तहसीलदार रामेश्वर गढ़वाल व आदित्या, नायब तहसीलदार राजेश शर्मा, महेंद्र सिंह मुवाल, भंवरलाल ऑफिस कानूनगो, भू-अभिलेख निरीक्षक इकबाल सिंह, पटवारी राजेंद्र स्वामी, विकास पूनियां, लूणाराम, कालूराम, जयसिंह, मांगीलाल, रणवीरसिंह के खिलाफ पुलिस-एसीबी में जांच चल रही है।
ऐसे समझें... लैंड स्कैम को अंजाम देने के लिए भू-माफियाओं ने सिस्टम में कैसे किया खेल
- पुराने वर्षों की फर्जी कूट-रचना : जमीन को वैध दिखाने के लिए आरोपियों ने साल 1970, 1971 से लेकर 1976 तक की पुरानी तारीखों में फर्जी आवंटन पत्र और पट्टे तैयार किए। पुराने कागजों के दम पर सरकारी जमीन पर मालिकाना हक जताया।
- फर्जी म्यूटेशन और कंपनियों को बेचान : बिना किसी वैध मूल दस्तावेज के राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से रातों-रात सरकारी जमीनों के नामांतरण 31 निजी व्यक्तियों के नाम खोल दिए गए। जैसे ही जमीन कागजों में निजी हुई, उसे तुरंत मोटी रकम लेकर सोलर कंपनियों को बेच दिया गया।
- नियमों को ताक पर रख पिक एंड चूज नीति : उपनिवेशन और राजस्व विभाग के नियमों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए जमीनों को चिह्नित (पिक एंड चूज) किया गया, ताकि सोलर हब वाले बेल्ट की कीमती जमीनें हथियाई जा सकें।
- सरकारी रिकॉर्ड में लगातार कूट-रचित प्रविष्टियां : यह घोटाला केवल एक बार नहीं, बल्कि एक चेन की तरह चला। 2021, 2022, 2023, जनवरी 2024 तक अलग-अलग तारीखों में कंप्यूटर और रजिस्टरों में फर्जी प्रविष्टियां (म्यूटेशन संख्या 545, 432, 606 आदि) दर्ज की जाती रहीं, ताकि सोलर कंपनियों को बेची गई जमीन का रिकॉर्ड साफ-सुथरा दिखे।
मामला संज्ञान में आया है। उक्त संपूर्ण भूमि की जमाबंदी पर नोट अंकित कर दिया है, ताकि इस भूमि का आगे बेचान न हो सके। प्रकरण शीघ्र निस्तारण के प्रयास किए जा रहे हैं। -निशांत जैन, बीकानेर, कलेक्टर