यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर शुक्रवार को हरदा में बैंककर्मी एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने समेत कई मांगों को लेकर जिले के करीब 197 कर्मचारियों ने काम बंद रखा।
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बैंककर्मियों ने शहर में बाइक रैली निकालकर विरोध जताया। इस दौरान कर्मचारियों ने हाथों में काली पट्टी बांधी और काले झंडे लेकर नारेबाजी की।

पांच दिन बैंक खोलने की मांग
मध्यप्रदेश बैंक एम्पलाईज एसोसिएशन के सचिव नीलेश भाटी ने बताया कि बैंक कर्मचारी लंबे समय से सप्ताह में पांच दिन काम की व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) से जुड़ी कमियों को दूर करने और कर्मचारियों-अधिकारियों को इसका उचित लाभ देने की मांग है।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू पीएलआई योजना को वापस लेने की भी मांग की है। यूनियन का कहना है कि पीएलआई से जुड़े मुद्दे समझौते की प्रक्रिया में लंबित हैं। इसके बावजूद स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए एकतरफा पीएलआई व्यवस्था लागू की गई है।
पेंशन के लंबित मामलों के स्थायी समाधान की मांग
हड़ताल के प्रमुख मुद्दों में पेंशन से जुड़े लंबित मामलों का स्थायी समाधान भी शामिल है। यूनियन नेताओं का कहना है कि कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़े पेंशन मामलों का जल्द निराकरण होना चाहिए। इसके साथ पुराने द्विपक्षीय समझौते के अनुसार केंद्रीय मुद्दों के समाधान की मांग भी की जा रही है।

350 करोड़ के कारोबार पर असर का दावा
यूनियन सचिव कुलदीप ओझा ने बताया कि जिले की 47 राष्ट्रीयकृत बैंक शाखाओं में काम करने वाले करीब 197 कर्मचारी हड़ताल में शामिल रहे। उनके मुताबिक हड़ताल से जिले में करीब 350 करोड़ रुपए के बैंकिंग कारोबार पर असर पड़ने का अनुमान है। बैंक शाखाओं में कैश जमा-निकासी, चेक संबंधी काम और अन्य काउंटर सेवाएं प्रभावित रहीं।
हालांकि डिजिटल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की संभावना है। शाखा जाकर होने वाले जरूरी बैंकिंग कार्यों के लिए ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
आगे भी आंदोलन की चेतावनी
यूनियंस ने पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने और पीएलआई व्यवस्था में सुधार समेत मांगें पूरी नहीं होने पर आगे भी आंदोलन की चेतावनी दी है। संगठन की ओर से 27 अगस्त को देशव्यापी प्रदर्शन और आने वाले महीनों में आंदोलन तेज करने की बात कही गई थी।