मुंबई के युवा निशानेबाज श्लोक हजारे ने 54वें ग्रां प्री ऑफ प्लजेन राइफल एंड पिस्टल शूटिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर इंटरनेशनल लेवल पर अपनी पहचान बना ली है. सीजे फाउंडेशन ने श्लोक के आगे की ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं का पूरा खर्च उठाने का ऐलान किया है. केवल 16 साल की उम्र में उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में हिस्सा लिया और अनुभवी एवं ओलंपिक स्तर के निशानेबाजों के बीच 621.3 अंक का स्कोर हासिल किया.
हालांकि, श्लोक पोडियम तक पहुंचने में सफल नहीं रहे लेकिन कम उम्र में इंटरनेशनल लेवल पर किया गया उनका यह प्रदर्शन उनके शूटिंग करियर के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. श्लोक ने 2 मई को इस प्रतियोगिता के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया. वह ओपन मेंस कैटेगरी में हिस्सा लेने वाले कम उम्र के खिलाड़ियों में शामिल रहे.
छह साल की उम्र में शुरू हुआ सफर
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श्लोक के निशानेबाजी के सफर की शुरुआत महज छह साल की उम्र में हुई थी. एक स्थानीय कार्यक्रम में एयर राइफल से निशाना साधते समय उन्होंने पहली बार अपनी प्रतिभा दिखाई. उस समय उन्होंने 10 गुब्बारों में से केवल दो को निशाना बनाया था. इसके बाद लगातार अभ्यास और ट्रेनिंग के साथ उनके प्रदर्शन में सुधार होता गया.
बता दें कि श्लोक के पिता सतीश हजारे पुलिस अधिकारी हैं. बेटे की प्रतिभा को देखते हुए उन्होंने शुरुआती दौर में उसके लिए विशेष शूटिंग उपकरण भी तैयार करवाए क्योंकि इतनी कम उम्र के बच्चे के लिए बाजार में उपयुक्त गियर उपलब्ध नहीं था. दस साल की उम्र के बाद श्लोक ने शूटिंग का नियमित और गंभीर प्रशिक्षण शुरू किया. मुंबई पुलिस जिमखाना में कोच स्नेहल पालपांकर कदम और अन्य प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी तकनीक, फिटनेस और अनुशासन पर काम किया.
10 मीटर एयर राइफल में बनाई पहचान
श्लोक ने 10 मीटर एयर राइफल में अपनी पहचान बनाई है. कम उम्र में ही उन्होंने नेशनल लेवल पर कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी क्षमता दिखाई. उनकी ट्रेनिंग में निशानेबाजी के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस और अनुशासन पर भी विशेष जोर दिया गया. चेक रिपब्लिक में प्रतियोगिता के दौरान पुराने राइफल उपकरण के कारण उनके प्रदर्शन पर असर पड़ा. इसके बाद भी उन्होंने अनुभवी निशानेबाजों के बीच 621.3 का स्कोर हासिल किया.
सीजे फाउंडेशन ने उठाया आगे की तैयारी का जिम्मा
श्लोक के प्रदर्शन को देखते हुए सीजे फाउंडेशन ने उनके आगे के शूटिंग करियर में सहयोग करने का फैसला किया है. फाउंडेशन के अध्यक्ष सोनू जालान ने श्लोक को नई राइफल और नया शूटिंग किट उपलब्ध कराने के साथ-साथ आगे होने वाली प्रतियोगिताओं के लिए पूरे स्पॉन्सरशिप की जिम्मेदारी उठाने की बात कही है. उन्होंने कहा कि बिना विशेष सुविधाओं और पर्याप्त संसाधनों के बावजूद श्लोक ने चेक रिपब्लिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया. लेकिन अगर उन्हें सही दिशा, अच्छी ट्रेनिंग और जरूरी सुविधाएं मिलें तो वह भविष्य में शूटिंग के क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर सकते हैं.
शूटिंग के साथ IPS बनने का सपना
शूटिंग में आगे बढ़ने के साथ श्लोक का सपना IPS अधिकारी बनने का भी है. उनके पिता और दादा दोनों पुलिस सेवा से जुड़े रहे हैं और श्लोक उन्हें अपना आदर्श मानते हैं. श्लोक का कहना है कि राइफल चलाना उनके लिए केवल एक खेल नहीं है बल्कि यह भविष्य में देश की सेवा करनी की तैयारी का भी एक अहम हिस्सा है. वह आगे चलकर अपने पिता और दादा की तरह पुलिस सेवा में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहते हैं.
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