Published: Tuesday, September 22, 2026, 8:51 [IST]
बिहार के जमुई जिले में एक नाबालिग छात्रा और उसके दोस्त के साथ हुई बदसलूकी का मामला अब तूल पकड़ चुका है। घटना का वीडियो इंटरनेट पर वायरल होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने सिर्फ जुर्म करने वालों पर ही नहीं, बल्कि उस वीडियो को शेयर और फॉरवर्ड करने वाले लोगों पर भी चाबुक चला दिया है। जमुई के साइबर थाने में करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल यूजर्स के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। इस पूरे मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी सूरत में पीड़िता की पहचान उजागर करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अगर आपके पास भी यह वीडियो आया है, तो इसे तुरंत डिलीट कर दें, वरना आप भी कानूनी फेर में फंस सकते हैं। जमुई के एसपी विश्वजीत दयाल ने बताया कि नाबालिग पीड़िता की पहचान सामने लाते हुए वीडियो शेयर करना खुद गंभीर अपराध है। इसी मामले में करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल के खिलाफ साइबर थाने केस दर्ज की गई है।
पहले घटना समझिए, फिर वीडियो वायरल होने की कहानी
यह शर्मनाक वारदात जमुई-लखीसराय मुख्य मार्ग से करीब तीन किलोमीटर दूर एक पहाड़ी इलाके में हुई। शाम के लगभग 6:25 से 6:30 बजे के बीच कुछ मनचलों ने एक नाबालिग छात्रा और उसके साथी को घेर लिया। वायरल हुए फुटेज में साफ दिख रहा है कि 7 से 8 युवकों की भीड़ ने दोनों को घेरकर बदतमीजी की।
आरोपी लड़के छात्रा को जबरन अपनी गोद में उठाते और घसीटते नजर आए। इस दौरान पीड़ित लड़की हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाती रही और छोड़ने की मिन्नतें करती रही, लेकिन दरिंदों का दिल नहीं पसीजा। आरोपियों ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया।
पुलिस का बड़ा एक्शन: 3 आरोपी गिरफ्तार, SIT गठित
घटना की खबर मिलते ही बिहार पुलिस अलर्ट मोड में आ गई। लॉ एंड ऑर्डर के एडीजी के. एस. अनुपम ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जमुई थाने में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 128, 74, 75 और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की धारा 8 व 12 के तहत केस दर्ज किया गया है।
- तीन गिरफ्तार: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक तीन नाबालिग आरोपियों को पकड़ा है। इनकी उम्र 17 से 18 साल के बीच है।
- SIT का गठन: पूरे मामले की निष्पक्ष और तेज जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई है, जिसकी कमान जमुई SDPO संभाल रहे हैं।
- पेट्रोलिंग की जांच: जिस जगह वारदात हुई, वहां पुलिस गश्त की क्या स्थिति थी, इसकी भी समीक्षा की जा रही है। बाकी बचे 4-5 आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी जारी है।
120 सोशल मीडिया यूजर्स पर FIR क्यों?
घटना के बाद कई लोगों ने बिना सोचे-समझे पीड़िता का चेहरा दिखाते हुए वीडियो को फेसबुक, एक्स (ट्विटर), व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर शेयर करना शुरू कर दिया। कानूनन किसी भी यौन उत्पीड़न या बदसलूकी की शिकार नाबालिग की पहचान उजागर करना संगीन अपराध है।
जमुई के एसपी विश्वजीत दयाल ने देर रात मीडिया से बात करते हुए कहा,
"नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करते हुए वीडियो को इंटरनेट पर फैलाना बहुत बड़ा अपराध है। ऐसा करने वालों के खिलाफ हमने सख्त रुख अपनाया है। अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वीडियो शेयर करने वाले 120 प्रोफाइल होल्डर्स को चिन्हित कर साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मुख्य आरोपी भी बहुत जल्द हमारी गिरफ्त में होगा।"
एसपी की सख्त चेतावनी और अपील
जमुई एसपी ने आम जनता और सोशल मीडिया यूजर्स से सीधी अपील की है कि वे कानून अपने हाथ में न लें और संवेदनशीलता दिखाएं। एसपी विश्वजीत दयाल के शब्दों में,
"मैं लोगों से गुजारिश करता हूं कि इस तरह के वीडियो को डाउनलोड या आगे फॉरवर्ड बिल्कुल न करें। ऐसा करने से पीड़िता की निजता भंग होती है और उसकी सुरक्षा को खतरा पैदा होता है। अगर आपके पास कोई ऐसा वीडियो आता है, तो उसे शेयर करने के बजाय तुरंत पुलिस को सूचना दें। हमारी टीम निष्पक्ष होकर काम कर रही है और किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।"
वीडियो शेयर करना जेल क्यों भिजवा सकता है? कानूनी पक्ष समझिए
भारत में नाबालिगों से जुड़े अपराधों को लेकर कानून बेहद सख्त हैं। किसी भी आपराधिक घटना में यदि पीड़िता नाबालिग है, तो उसकी पहचान (नाम, चेहरा, स्कूल, या गांव) को किसी भी माध्यम से सार्वजनिक करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
- पॉक्सो एक्ट (POCSO Act): पॉक्सो कानून की धारा 23 स्पष्ट रूप से कहती है कि पीड़िता की पहचान उजागर करना गैर-जमानती अपराध है। इसमें भारी जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है।
- आईटी एक्ट (IT Act): आपत्तिजनक, अश्लील या किसी की निजता पर हमला करने वाले कंटेंट को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलाना आईटी एक्ट की धाराओं के तहत संज्ञेय अपराध माना जाता है।
- जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act): बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए बना यह कानून भी पीड़िता की गोपनीयता बनाए रखने को अनिवार्य बनाता है।
जमुई पुलिस का 120 सोशल मीडिया अकाउंट्स पर केस दर्ज करना एक कड़ा संदेश है। इंटरनेट पर किसी वीडियो को सिर्फ 'लाइक' या 'शेयर' करना आपको किसी अपराध का सह-आरोपी बना सकता है। डिजिटल स्पेस में सतर्कता और समझदारी ही आपको कानूनी पचड़ों से बचा सकती है।