Jul 28, 2026 11:31 am ISTलाइव हिन्दुस्तान
मुख्य बातें
- Plastic Note: RBI ने स्पष्ट किया है कि पॉलीमर नोट लाने का मुख्य उद्देश्य नकली नोटों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि नोटों की उम्र बढ़ाना और उनकी गुणवत्ता बेहतर बनाना है
- इससे लंबे समय में नोट छापने, ढुलाई और नष्ट करने की लागत में भी कमी आएगी

₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट कब आएंगे, सरकार ने दे दी मंजूरी, जानें यह कितना है जरूरी?
केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 10 और 20 रुपये के प्लॉस्टिक के नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। यानी अब आपके हाथ में बहुत जल्द 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक के नोट नजर आ सकते हैं। करीब 14 साल पुरानी इस योजना को अब दोबारा शुरू किया गया है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा कागजी नोट बंद नहीं होंगे। फिलहाल प्लास्टिक और कागजी नोट दोनों साथ-साथ चलेंगे।
दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में चल रहे प्लास्टिक नोट
द इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मतुाबिक ऑस्ट्रेलिया 1988 में पॉलीमर नोट जारी करने वाला पहला देश था। इसके बाद ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम समेत 60 से अधिक देशों ने विभिन्न मूल्यवर्ग में प्लास्टिक नोट अपनाए हैं।
10 और 20 रुपये के 100-100 करोड़ नोटों का होगा ट्रायल
लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि RBI ने 10 रुपये और 20 रुपये के एक-एक अरब (100 करोड़) पॉलीमर नोट छापने का प्रस्ताव दिया था। सरकार ने इसे मंजूरी दे दी है। अगर फील्ड ट्रायल सफल रहता है तो भविष्य में इन नोटों का नियमित प्रचलन शुरू किया जा सकता है।
क्यों ला रहा है RBI प्लास्टिक नोट?
RBI के मुताबिक पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में कहीं अधिक टिकाऊ होते हैं। खासकर 10 और 20 रुपये जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोट सबसे ज्यादा हाथ बदलते हैं और जल्दी फट जाते हैं। प्लॉस्टिक के नोट इनकी तुलना में 2 से 6 गुना अधिक समय तक चल सकते हैं, जिससे बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम होगी।
डिजिटल पेमेंट पर क्या होगा असर?
सरकार का कहना है कि इस समय इस योजना का डिजिटल भुगतान पर असर बताना जल्दबाजी होगी। सरकार ने साफ किया है कि कैश और डिजिटल पेमेंट दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों का इस्तेमाल आगे भी जारी रहेगा।
पॉलीमर नोट आखिर होते क्या हैं?
पॉलीमर नोट विशेष प्लास्टिक फिल्म पर छापे जाते हैं, जबकि भारत के मौजूदा नोट कपास के लंबे रेशों से बने विशेष कागज पर तैयार किए जाते हैं। इन कागजी नोटों में लकड़ी का गूदा इस्तेमाल नहीं होता।
पर्यावरण के लिए भी बेहतर: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार पॉलीमर नोटों का पर्यावरण पर असर कम होता है। ये कागजी नोटों की तुलना में 32% कम ग्लोबल वार्मिंग प्रभाव पैदा करते हैं और 30% कम ऊर्जा की जरूरत होती है। इस्तेमाल के बाद इन्हें रीसाइकिल कर प्लास्टिक के अन्य उत्पाद, जैसे बगीचे की कुर्सियां आदि बनाने में उपयोग किया जा सकता है।
भारत में बढ़ रही है नकदी की मांग: RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 तक देश में चलन में कुल करेंसी का मूल्य 41.23 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले की तुलना में 12% अधिक है। इसमें 500 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 86% है।
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Drigraj Madheshia
दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें
