Updated: Friday, July 31, 2026, 20:05 [IST]
Xi Jinping India visit: भारत और चीन के रिश्तों में सितंबर 2026 एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। खबर है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो जून 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी।
पिछले छह साल में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, सैन्य तनाव और कूटनीतिक खींचतान देखने को मिली। ऐसे में इस दौरे को सिर्फ BRICS सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत-चीन संबंधों की नई शुरुआत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
6 साल बाद भारत आने की तैयारी में शी जिनपिंग
सूत्रों के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आ सकते हैं। अगर उनका दौरा तय होता है तो यह 2019 के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण रहे। ऐसे में यह यात्रा दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
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गलवान के बाद पहली बड़ी कूटनीतिक पहल
जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प ने दोनों देशों के रिश्तों को दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था। इसके बाद कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ताएं हुईं। अब अगर शी जिनपिंग भारत आते हैं तो इसे सीमा पर तनाव कम होने और रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में सबसे बड़ा संकेत माना जाएगा।
डोभाल की चीन यात्रा और WMCC बैठक पर नजर
शी जिनपिंग की संभावित यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल उच्च स्तरीय बातचीत के लिए चीन जा सकते हैं। इसके अलावा सीमा मामलों पर WMCC (वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन) की बैठक भी प्रस्तावित है। इसके बाद विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा विवाद पर बातचीत होने की संभावना है।
क्या मोदी और शी जिनपिंग की होगी अलग बैठक?
BRICS सम्मेलन के दौरान सबसे ज्यादा नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित द्विपक्षीय बैठक पर रहेगी। अगर यह मुलाकात होती है तो सीमा विवाद, व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और दोनों देशों के भविष्य के रिश्तों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। यह बैठक एशिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के संबंधों के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है।
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BRICS से आगे भी होंगे बड़े संदेश
शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा सिर्फ BRICS सम्मेलन तक सीमित नहीं रहेगी। ऐसे समय में यह दौरा हो सकता है, जब दुनिया अमेरिकी टैरिफ, वैश्विक व्यापार तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में भारत और चीन के बीच बेहतर संवाद न सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों बल्कि पूरे एशियाई क्षेत्र और वैश्विक राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश दे सकता है।