Tue, 28 Jul 2026 12:23 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो Published by: स्वप्निल शशांक Updated Tue, 28 Jul 2026 12:23 PM IST
सार
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला शॉट पुट F57 स्पर्धा का स्वर्ण जीतने वाली शर्मिला धनखड़ ने सिर्फ एक पदक नहीं जीता, बल्कि संघर्षों पर जीत की ऐसी मिसाल पेश की, जो लाखों लोगों को प्रेरित करती है। पोलियो, गरीबी, घरेलू हिंसा और आर्थिक तंगी जैसी मुश्किलों का सामना करने वाली हरियाणा की इस खिलाड़ी ने आखिरकार इतिहास रचते हुए भारत को पैरा एथलेटिक्स का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक दिलाया।
ग्लासगो में शॉट पुट इवेंट में जब 40 वर्षीय शर्मिला धनखड़ का 9.81 मीटर का थ्रो जमीन पर गिरा तो वह सिर्फ एक दूरी नहीं थी, बल्कि वर्षों के दर्द, संघर्ष, अपमान और उम्मीदों की कहानी थी। इसी थ्रो के साथ उन्होंने महिला शॉट पुट F57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पैरा एथलेटिक्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन गईं। इतना ही नहीं, उन्होंने 20 साल बाद भारत को पैरा एथलेटिक्स में पदक भी दिलाया, लेकिन इस स्वर्ण पदक तक पहुंचने का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। पीएम मोदी ने भी शर्मिला को बधाई दी है। आइए शर्मिला की प्रेरक और भावुक कर देने वाली कहानी के बारे में जानते हैं...
शर्मिला (स्वर्ण जीता) और शिल्पा (कांस्य जीता) - फोटो : PTI
गरीबी में बीता बचपन, पोलियो ने छीनी बचपन की रफ्तार
- हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के छोटे से गांव चित्रौली में जन्मी शर्मिला का बचपन अभावों में बीता। उनके पिता एक छोटे किसान थे और मां दृष्टिबाधित थीं। घर में तीन बेटियां थीं और बेहद सीमित संसाधनों में परिवार का गुजारा होता था।
- महज दो साल की उम्र में शर्मिला पोलियो की शिकार हो गईं। इलाज की पर्याप्त सुविधा नहीं मिलने के कारण उनका एक पैर हमेशा के लिए प्रभावित हो गया। यह वही उम्र थी, जब बच्चे चलना और दौड़ना सीखते हैं, लेकिन शर्मिला के हिस्से में संघर्ष आ गया।
- शर्मिला ने एक बार अपने जीवन के बारे में कहा था, 'मेरी मां दृष्टिबाधित थीं, पिता किसान थे और हमारे पास गुजारा करने के लिए बहुत कम साधन थे। जिंदगी कभी आसान नहीं रही।'
शर्मिला (स्वर्ण जीता) और शिल्पा (कांस्य जीता) - फोटो : PTI
19 साल की उम्र में शादी, फिर घरेलू हिंसा का दर्द
- शर्मिला की शादी दसवीं की परीक्षा के तुरंत बाद कर दी गई। लेकिन यह रिश्ता उनके लिए दर्द और यातना लेकर आया। उन्होंने वर्षों तक घरेलू हिंसा झेली। अपने जीवन के सबसे कठिन दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'एक रात मेरे पहले पति ने रात 11 बजे से सुबह तीन बजे तक मेरी पिटाई की और फिर घर से निकाल दिया। उसके बाद मैं कभी वापस नहीं गई।'
- दो छोटी बेटियों के साथ मायके लौटना आसान नहीं था। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी। ऐसे में उन्होंने घर चलाने के लिए महिलाओं के अस्पताल में सफाईकर्मी, घरेलू सहायक और सुरक्षा गार्ड तक का काम किया। कम आमदनी थी, लेकिन इसी काम ने उन्हें मानसिक रूप से टूटने नहीं दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
शर्मिला (स्वर्ण जीता) और शिल्पा (कांस्य जीता) - फोटो : PTI
दूसरी शादी बनी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट
28 साल की उम्र में शर्मिला ने दूसरी शादी की। इस बार किस्मत ने उनका साथ दिया। उनके पति अजीत सिंह ने उन्हें कभी कमजोर नहीं समझा। उन्होंने शर्मिला को पैरा खेलों में हाथ आजमाने के लिए प्रेरित किया। 34 साल की उम्र में शर्मिला ने पहली बार पैरा एथलेटिक्स की ट्रेनिंग शुरू की। यह वही उम्र होती है, जब कई खिलाड़ी अपने करियर के आखिरी दौर में होते हैं, लेकिन शर्मिला के लिए यहीं से नई जिंदगी की शुरुआत हुई। कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में उन्होंने 2021 पैरा नेशनल चैंपियनशिप में राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतकर सबका ध्यान खींचा।
विज्ञापन
शर्मिला (स्वर्ण जीता) और शिल्पा (कांस्य जीता) - फोटो : PTI
घर बेचकर पूरा किया सपना
खेलों में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ मेहनत ही नहीं, पैसे की भी जरूरत थी। लेकिन आर्थिक तंगी बार-बार रास्ता रोक रही थी। आखिरकार 2023 में परिवार ने रेवाड़ी स्थित अपना घर बेच दिया और किराये के मकान में रहने लगा, ताकि शर्मिला अपने प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का खर्च उठा सकें। उन्होंने कहा, 'खेल ने मुझे दूसरा जीवन दिया है। इस साल कॉमनवेल्थ और एशियाई पैरा खेलों में पदक जीतने के बाद मेरा सपना फिर से अपना घर खरीदने का है।'