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रूस में बैक्टीरिया लीक होने पर WHO के खड़े हुए कान, ट्रंप भी पुतिन को करेंगे कॉल

October 7, 2026

रूस के इरकुत्स्क में एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक लैब वर्कर की मौत के बाद प्लेग को लेकर दुनियाभर में चिंता बढ़ गई है. 28 साल की दर्या शिपिलोवा की 2 अक्टूबर को गंभीर निमोनिया के बाद मौत हो गई थी. इसके बाद उनके संपर्क में आए करीब 200 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया. हालांकि, अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि उनकी मौत प्लेग से हुई थी.

मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि शिपिलोवा एक ऐसे संस्थान में काम करती थीं जहां प्लेग और दूसरी खतरनाक संक्रामक बीमारियों पर रिसर्च होती है. मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बीमारी लैब में किसी एक्सपोजर की वजह से हुई हो सकती है. कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि एक टेस्ट ट्यूब टूटने के बाद वह संक्रमित हुई थीं. हालांकि, रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने उनकी बीमारी को अज्ञात कारणों वाला निमोनिया बताया है और लैब में उनके काम से जुड़े किसी खतरनाक माइक्रोऑर्गेनिज्म का सबूत नहीं मिलने की बात कही है.

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WHO ने रूस से मांगी पूरी जानकारी

मीडिया में प्लेग से जुड़ी खबरें सामने आने के बाद WHO ने इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशन्स के तहत रूस से जानकारी मांगी. रूस ने WHO को बताया कि इरकुत्स्क में प्लेग का कोई कन्फर्म केस नहीं है. अधिकारियों के मुताबिक, संपर्क में आए लोगों की जांच की गई और किसी में प्लेग या किसी गंभीर खतरनाक संक्रमण का सबूत नहीं मिला. कुछ लोगों में दूसरे वायरल संक्रमण पाए गए थे.

WHO के मुताबिक, रूस के बाहर इस मामले से जुड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम फिलहाल बहुत कम है. हालांकि, संगठन ने रूस से बीमारी की असली वजह, टेस्ट के नतीजों और दूसरे संभावित बीमार कर्मचारी से जुड़ी जानकारी मांगी है.

ट्रंप पुतिन से करेंगे बात

अब इस मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी नजर है. ट्रंप ने कहा है कि वह बहुत जल्द रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से इस मुद्दे पर बात करेंगे. उन्होंने बताया कि अमेरिका इस मामले पर “बहुत गहरी चर्चा” कर रहा है और जल्द ही और जानकारी सामने आ सकती है.

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इससे एक दिन पहले ट्रंप ने रूस को मदद की पेशकश भी की थी. उन्होंने प्लेग को गंभीर बीमारी बताते हुए कहा था कि पहले जिन कीटाणुओं को काबू करना आसान था, वे अब ज्यादा मजबूत और चालाक हो गए हैं और “एक आर्मी की तरह” हैं.

फिलहाल रूस में प्लेग के प्रकोप की पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की कर्मचारी की रहस्यमय मौत, करीब 200 लोगों की निगरानी और रूस से WHO की लगातार जानकारी मांगने के कारण इस मामले पर दुनियाभर की नजर बनी हुई है.

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