अमेरिकी नौसेना का एयरक्राफ्ट कैरियर ‘USS जॉर्ज वॉशिंगटन’ मिडिल ईस्ट की तरफ रवाना हो चुका है। ये ‘USS अब्राहम लिंकन’ को रिप्लेस करेगा, जिस पर तैनात 5 हजार से ज्यादा मरीन्स ने करीब 9 महीने से जमीन नहीं देखी है। USS लिंकन पर नौसैनिकों के सुसाइड की कोशिश
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USS लिंकन पर ऐसा क्या हुआ, समंदर में कूदकर जान पर क्यों उतारू अमेरिकी नौसैनिक; डिकोड करेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: USS लिंकन में मौजूद अमेरिकी सैनिकों की हालत का पता कैसे चला?
जवाब: अमेरिकी सेना की खबर देने वाली वेबसाइट्स नेवी टाइम्स के मुताबिक…
- एनाबेल लोमा नाम की महिला ने बताया कि उनके नौसैनिक पति ने USS अब्राहम लिंकन से कूदने की कोशिश की। उन्हें बचाकर मेडिकल लीव पर रखा गया है। फिलहाल संपर्क करने में दिक्कत हो रही है।
- एनाबेला के मुताबिक, 'मेरे पति डरे हुए हैं। उन्हें लगता है कि बेइज्जत करके नेवी से बर्खास्त कर दिया जाएगा। सिर्फ इसलिए क्योंकि वो काम के बोझ से थककर चूर हो गए हैं। उनका 13 साल का नेवी का करियर यूं ही बर्बाद हो जाएगा।’
- एक अन्य नौसैनिक की पत्नी मारिया रोड्रिगेज ने बताया कि USS लिंकन पर तैनात उनके पति ने समुंदर में कूदने की तैयारी कर रहे एक साथी को आवाज देकर रोका और बांह पकड़कर डेक पर वापस खींच लिया।
6 अगस्त को युद्धपोत पर तैनात सैनिकों के घर वालों ने अमेरिकी नेवी के एक्टिंग सेक्रेटरी हंग काओ और कुछ दूसरे सीनियर ऑफिसर्स के साथ मीटिंग की थी। अमेरिकी वेबसाइट स्टार्स एंड स्ट्राइप्स के मुताबिक…
- एक नौसैनिक की पत्नी ने ऑफिसर्स से रोते हुए बताया कि उसके पति ने संदेश भेजा है- 'मैं उम्मीद करता हूं कि कल सुबह न उठूं।'
- एक सैनिक के पिता ने कहा, 'मेरा बेटा बताता है कि उसके साथी हर समय जहाज से कूदने के बारे में सोचते रहते हैं। हम लोग आराम से घर में सो रहे हैं और वो लोग किसको बचाने लिए वहां लड़ रहे हैं।'
- कई और नौसैनिकों और उनके घर वालों ने बताया कि युद्धपोत पर मौजूद जवान थक चुके हैं। उनका मनोबल गिर गया है। उन्हें खुदकुशी के खयाल आ रहे हैं।

USS अब्राहम लिंकन में 5 हजार से ज्यादा नाविक सवार हो सकते हैं। यह न्यूक्लियर क्षमताओं से लेस है और 70 एयरक्राफ्ट लॉन्च कर सकता है।
सवाल-2: 9 महीने से तैनात USS लिंकन की हालत कैसी हो गई है?
जवाब: 21 नवंबर 2025 को USS अब्राहम लिंकन प्रशांत महासागर के इलाके में तैनाती के लिए अमेरिका के सैन डिएगो से रवाना हुआ था। इसमें 5000 से ज्यादा मरीन सैनिक और क्रू मेंबर्स हैं।
11 दिसंबर को लिंकन प्रशांत महासागर के गुआम द्वीप पर पहुंचा। फिर इसे मिडिल ईस्ट में ईरान के आसपास के इलाके में रवाना कर दिया गया। जनवरी से ये अरब सागर के इसी इलाके में तैनात है।

ईरान के खिलाफ अमेरिकी हवाई हमलों में इस एयरक्राफ्ट कैरियर का इस्तेमाल किया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, लिंकन पर तैनात फाइटर जेट्स ने करीब दस हजार उड़ानें भरी हैं।
मई में इसके वापस आने की उम्मीद थी, लेकिन बिना किसी घोषणा के इसकी तैनाती बढ़ा दी गई।
जुलाई की शुरुआत में लिंकन थोड़ी देर के लिए ओमान के एक पोर्ट पर रुका था। वहां ताजे फल और सब्जियां वगैरह जुटाई गईं। इस दौरान कुछ जवानों को जहाज से उतरने की अनुमति मिली, लेकिन उन्हें पोर्ट के अंदर एक सिक्योर्ड कैंपस में ही रखा गया।
लिंकन पर तैनात कुछ जवानों ने अमेरिकी न्यूज चैनल CNN को बताया कि अभी लिंकन ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी में तैनात है। इसलिए ये मित्र देशों के बंदरगाहों पर नहीं रुक पा रहा। न ही नाविकों को आराम मिल पा रहा और न ही जरूरत के सामान की सप्लाई हो पा रही है।
इसके चलते एयरक्राफ्ट कैरियर पर 2 तरह की दिक्कतें हैं...
1. रहने के लिए बदतर हालात
- एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबे मिशन के दौरान लिंकन जैसे कैरियर के पुर्जे घिसने लगते हैं। समुद्र में इनकी काम चलाऊ मरम्मत ही की जा सकती है। लैंड करने वाले जेट्स को रोकने वाली अरेस्टिंग केबल घिसने लगती हैं। खारा पानी जहाज के अंदर घुसने लगता है।
- अभी लिंकन के टॉयलेट्स में पानी की कमी है। शॉवर में फंफूदी लग गई है। एक सैनिक के परिवार ने CNN को सीवेज से भरे ओवरफ्लो हो रहे टॉयलेट्स की तस्वीरें दिखाईं। नहाने के लिए गर्म पानी की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
2. खाने-पीने की चीजों की कमी
- अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद माइक लेविन ने X पर लिखा, 'हफ्तों से कपड़े धोने का काम रुका हुआ है, खाने में आधा कप चावल और दो रोटी मिलना। साबुन, डियोडोरेंट और टूथपेस्ट तक नहीं मिल रहा है।'
- एक जवान ने बताया, पहले आप जहाज के स्टोर में जितना चाहें, जरूरत का सामान खरीद सकते थे। हाईजीन से जुड़े प्रोडक्ट्स उपलब्ध थे। अब खरीदारी को सीमित कर दिया गया है। साफ-सफाई की शायद की कोई चीज बाकी हो।

USS अब्राहम लिंकन पर दिए जा रहे खाने की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल है।
सवाल-3: आम तौर पर एयरक्राफ्ट कैरियर कितने दिन समुद्र में रहते हैं?
जवाब: USS अब्राहम लिंकन जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर न्यूक्लियर एनर्जी से चलते हैं। इसलिए इन्हें ईंधन भरने के लिए बंदरगाह पर आने की जरूरत नहीं है। करीब एक महीने का राशन भी मौजूद होता है। बीच-बीच में अंडरवे रीप्लेनिशमेंट (UNREP) के जरिए सप्लाई होती रहती है, यानी दूसरे जहाज या हेलीकॉप्टर इन पर रसद पहुंचाते हैं।
सामान्य दिनों में करीब एक महीने के समय में कैरियर बंदरगाहों पर रुकते रहते हैं।
अमेरिकी नेवी एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती के लिए 32 से 36 महीने यानी करीब 3 साल का एक साइकिल प्लान करती है। इसे ‘ऑप्टिमाइज्ड फ्लीट रेस्पॉन्स प्लान’, OFRP कहते हैं।
इन तीन सालों में नौसैनिक 7 महीने, यानी 210 दिन तक एयरक्राफ्ट कैरियर या उसके स्ट्राइक ग्रुप में तैनात दूसरे युद्धपोतों पर तैनात रहते हैं।
अमेरिकी एडमिरल डैरिल कॉडल के मुताबिक, 2018 से 2022 तक ज्यादातर अमेरिकी नौसैनिकों की तैनाती इसी साइकिल के हिसाब से हुई। हालांकि अक्टूबर 2023 में हमास के इजराइल पर हमले के बाद अमेरिका के कुल 11 एयरक्राफ्ट कैरियर में से कई की तैनाती बढ़ानी पड़ी है।
13 अगस्त तक USS लिंकन मई में वापसी के अपने शुरुआती प्लान से 53 दिन से ज्यादा समय से समुद्र में है। किसी पोर्ट पर रुके 200 दिन से ज्यादा हो चुके हैं।
इसके पहले 3 जनवरी 2022 को ये सैन डिएगो से रवाना हुआ, इंडो-पैसिफिक और साउथ चाइना सी में 220 दिन की तैनाती के वापस लौटा। फिर 11 जुलाई 2024 से 20 दिसंबर 2024 तक करीब 162 दिन के पेसिफिक मिशन से वापस सैन डिएगो लौटा।
वहीं, USS जेराल्ड फोर्ड जून 2025 से समुद्र में है। अक्टूबर 2025 में ये वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा करने के मिशन में शामिल रहा। फिर फरवरी 2026 में इसे मिडिल ईस्ट भेजा गया। 16 मई 2026 को ये 326 दिन बाद वापस पोर्ट पर पहुंचा। वियतनाम युद्ध के बाद ये अब तक किसी भी एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती का सबसे लंबा रिकॉर्ड है।
CNN का अनुमान है कि USS लिंकन जब तक अपने घर कैलिफोर्निया पहुंचेगा, तब तक ये फोर्ड का रिकॉर्ड तोड़ सकता है।

इससे पहले फरवरी 2025 में अमेरिका के USS जेराल्ड फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर के टॉयलेट चोक हो गए थे। सैनिकों को लाइन में लगकर 45 मिनट तक इंतजार करना पड़ रहा था।
सवाल-4: इतने दिनों तक लगातार समंदर में रहने पर होता क्या है?
जवाब: दिसंबर के बाद से लिंकन के क्रू मेंबर्स ने जमीन पर कदम नहीं रखा है। इतने दिन समुद्र में रहने से शारीरिक और मानसिक दिक्कतें हो सकती हैं…
प्राइवेसी की कमी: जहाज पर हजारों लोग एक छोटे से बंद दायरे में रहते हैं। अपना पर्सनल स्पेस लगभग खत्म हो जाता है। इसके कारण दूसरों से चिढ़ होने लगती है।
बर्नआउट होना: बार-बार वापसी की तारीख बढ़ा दी जाती है। घर लौटने की तारीख पक्की न होने से सैनिक मानसिक रूप से टूट जाते हैं।
डिप्रेशन का खतरा: इंटरनेट या कॉल की कम पहुंच से सैनिक अपने परिवारों से कटे रहते हैं और उन्हें घर में हो रही अच्छी-बुरी खबरें नहीं पता चलती। वो मदद नहीं कर पाते। ऐसे में गिल्ट यानी अपराधबोध होता है। इससे डिप्रेशन भी बढ़ता है।
नींद न आना: कई सैनिक जहाज के निचले हिस्सों में काम करते हैं, जहां हफ्तों तक प्राकृतिक धूप और साफ हवा नहीं मिलती। इससे विटामिन D की कमी होती है। सर्कैडियन रिदम, यानी शरीर की घड़ी बिगड़ जाती है, जिससे नींद नहीं आती।
लगातार थकावट: 12 से 16 घंटे की लगातार शिफ्ट, जेट इंजन का तेज शोर और हर समय सतर्क रहने की मजबूरी शरीर को पूरी तरह थका देती है। शरीर को आराम लेकर रिसेट होने का वक्त ही नहीं मिलता।
ताजे खाने की कमी: शुरुआती कुछ हफ्तों के बाद ताजे फल, सब्जियां और दूध वगैरह खत्म हो जाते हैं। लंबे समय तक प्रोसेस्ड या पैक्ड फूड खाने से पाचन और पोषण से जुड़ी दिक्कतें होने लगती हैं।
खराब बाथरूम और पानी: लंबे वक्त तक प्लंबिंग नहीं होने से जहाज के टॉयलेट्स और शॉवर बेकार हो जाते हैं। कई बार तो टॉयलेट्स ओवर फ्लो हो जाते हैं और गंदगी बाहर आने लगती हैं। इससे बीमारी या संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
सवाल-5: इस पर ट्रम्प प्रशासन का रुख क्या है?
जवाब: अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने शुरुआत में USS लिंकन के खराब हालात की खबरों को खारिज कर दिया था। 14 अगस्त को जब डोनाल्ड ट्रम्प से कहा गया कि USS लिंकन को लंबा समय हो चुका है, तो उन्होंने कहा, 'नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।' ट्रंप ने इस दावे को भी खारिज किया कि सैनिकों की सेहत चिंताजनक है।
अमेरिका के एक्टिंग नेवी सेक्रेटरी हंग काओ ने कहा, ‘USS लिंकन ने 200 से ज्यादा दिन लड़ाई के इलाके में बिताए। उसकी 266 दिन की तैनाती काफी कठिन रही। उसनेने शानदार तरीके से मिशन को अंजाम दिया।’
काओ ने माना कि कुछ सैनिकों को मेंटल हेल्थ ट्रीटमेंट दिया गया है, लेकिन उन्होंने किसी भी मौत या बड़े हादसे की खबरों को खारिज कर दिया। हालांकि ट्रंप और काओ ने कहा है कि USS लिंकन अब अमेरिका लौट रहा है और जल्द ही उसकी जगह दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर ले लेगा।
अमेरिकी मीडिया 'CBS News' को एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ‘USS जॉर्ज वाशिंगटन’ अब USS लिंकन की जगह लेने के लिए आगे बढ़ रहा है। प्रशांत क्षेत्र में गश्त करने के लिए मई में ये जापान के योकोसुका नौसैनिक अड्डे से रवाना हुआ था।
ब्रिटिश न्यूज आउटलेज BBC का एनालिसिस है कि 13 अगस्त को USS जॉर्ज वाशिंगटन मलेशिया के पास था, जो 22 अगस्त तक ईरान के पास पहुंचकर USS लिंकन की जगह ले सकता है। ये ओमान के दुक्म बंदरगाह पर पहुंच सकता है।
मिडिल ईस्ट में पहुंचने के बाद USS वाशिंगटन उस इलाके में तीसरा अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर होगा, लेकिन प्रशांत महासागर में अब कोई भी अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं होगा।
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