अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के बीच लंबे समय से चल रही आर्थिक खींचतान के बीच ट्रंप प्रशासन ने करीब 850 मिलियन डॉलर का भुगतान करने की योजना बनाई है। अमेरिका पर संयुक्त राष्ट्र का लगभग 5 अरब डॉलर बकाया है। प्रस्तावित रकम ट्रंप प्रशासन की ओर से संयुक्त राष्ट्र को दिया जाने वाला अब तक का सबसे बड़ा भुगतान होगा। इससे संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक स्थिति को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका किस मद में कितना पैसा देगा?
अमेरिकी विदेश विभाग ने अमेरिकी सांसदों को भेजी गई सूचनाओं में बताया है कि 725 मिलियन डॉलर संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट में दिए जाएंगे। इसके अलावा 125 मिलियन डॉलर हैती और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में चल रहे संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के लिए दिए जाएंगे। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अमेरिका के बकाये में 2 अरब डॉलर से ज्यादा नियमित बजट का है, जबकि करीब 3 अरब डॉलर शांति अभियानों से जुड़ा है।
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संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक स्थिति इतनी खराब क्यों हुई?
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने फरवरी में चेतावनी दी थी कि अगर सदस्य देश अपना बकाया नहीं चुकाते और वित्तीय व्यवस्था में सुधार नहीं होता तो संगठन गंभीर आर्थिक संकट में फंस सकता है। इसके कुछ समय बाद ट्रंप प्रशासन ने 160 मिलियन डॉलर का भुगतान किया था। हालांकि, 2025 में अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र को कोई भुगतान नहीं किया था। इसके साथ ही अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनेस्को जैसे संगठनों से दूरी भी बनाई है।
ट्रंप प्रशासन संयुक्त राष्ट्र से क्या चाहता है?
ट्रंप और उनके सहयोगी पिछले करीब डेढ़ साल से संयुक्त राष्ट्र में बड़े बदलावों की मांग करते रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि संयुक्त राष्ट्र में कर्मचारियों की संख्या और खर्च जरूरत से ज्यादा है। प्रशासन कई कार्यक्रमों और संस्थाओं के लिए अमेरिकी मदद में कटौती कर चुका है। प्रस्तावित 850 मिलियन डॉलर के भुगतान को लेकर अमेरिकी रिपब्लिकन सांसदों के बीच भी पूरी सहमति नहीं दिखी है। कुछ सांसदों का मानना है कि भुगतान से पहले संयुक्त राष्ट्र में बदलावों को लेकर और कड़ा रुख अपनाया जाना चाहिए।
अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के रिश्ते किस दिशा में?
अमेरिका अब भी संयुक्त राष्ट्र का सबसे बड़ा दानदाता है, लेकिन ट्रंप प्रशासन की नीतियों ने दोनों के रिश्तों में तनाव बढ़ाया है। अमेरिकी सरकार की ओर से प्रस्तावित भुगतान से संयुक्त राष्ट्र को तत्काल आर्थिक राहत मिल सकती है, लेकिन इससे विवाद पूरी तरह खत्म होता नहीं दिख रहा। अमेरिकी सांसदों के बीच इस भुगतान को लेकर सवाल उठ रहे हैं और फलस्तीन के शरणार्थियों से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र एजेंसी को अमेरिकी सहायता रोकने की मांग भी सामने आई है। ऐसे में 850 मिलियन डॉलर का भुगतान आर्थिक राहत जरूर है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के साथ अमेरिका के रिश्तों में बड़ा बदलाव आया है या नहीं, यह अभी साफ नहीं है।