Donald Trump Immigration Policy: कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) पर रोक लगाकर ट्रंप प्रशासन लीगल इमिग्रेशन को रोक रहा है, जिससे अमेरिकी इकोनॉमी को भारी नुकसान हो रहा है।
Gavin Newsom: कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इमिग्रेशन नीति पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन कानूनी रूप से अमेरिका आने वाले विदेशी पेशेवरों के रास्ते बंद करके देश की अर्थव्यवस्था और इनोवेशन को नुकसान पहुंचा रहा है। यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है, जब अमेरिकी प्रशासन ने कई बड़ी टेक कंपनियों को रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया से जुड़े परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) से निलंबित करने का ऐलान किया है।
न्यूसम बोले- टैलेंट के दरवाजे बंद कर अमेरिका मजबूत नहीं बनेगा
गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर न्यूसम के प्रेस ऑफिस ने उनका बयान साझा किया। इसमें कैलिफोर्निया के गवर्नर ने कहा कि अमेरिका को अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करने के लिए घरेलू कर्मचारियों में निवेश करने के साथ दुनिया के बेहतरीन प्रतिभाशाली लोगों को भी आकर्षित करना चाहिए।
न्यूसम ने ट्रंप प्रशासन पर कानूनी इमिग्रेशन के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रशासन अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे कदम उठा रहा है।
जेडी वेंस ने फैसले का किया बचाव
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रशासन के फैसले का समर्थन किया है। डेमोक्रेटिक कांग्रेसवुमन प्रमिला जयपाल को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियों के लिए सस्ते विदेशी कर्मचारियों की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करना समाजवाद का उद्देश्य नहीं हो सकता।
वेंस का तर्क है कि विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार और उनकी मजदूरी पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, इस फैसले के आलोचकों का कहना है कि इससे कानूनी प्रवासियों और अमेरिकी कंपनियों की प्रतिभाशाली कर्मचारियों तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।
प्रमिला जयपाल ने बताया कानूनी इमिग्रेशन पर हमला
डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल ने प्रशासन के कदम की आलोचना करते हुए इसे कानूनी इमिग्रेशन और अमेरिका की नवाचार क्षमता के लिए नुकसानदेह बताया। उन्होंने कहा कि PERM प्रोग्राम उन विदेशी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण रास्ता है, जो रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल करना चाहते हैं।
जयपाल के मुताबिक, तकनीक समेत कई क्षेत्रों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था, समुदाय और परिवार प्रवासियों के योगदान पर निर्भर हैं। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट और PERM प्रोग्राम को निशाना बनाए जाने पर भी सवाल उठाए और इमिग्रेशन सुधारों की जरूरत पर जोर दिया।
H-1B वीजा पर काम करने वालों को लेकर क्या बोले वेंस?
इससे पहले वीजा धोखाधड़ी से जुड़ी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेंस ने H-1B वीजा पर अमेरिका आने वाले कुछ विदेशी कर्मचारियों को 'बंधुआ मजदूर' बताया था। उन्होंने दावा किया कि H-1B वीजा पर काम करने वाले कर्मचारी समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी नागरिकों की तुलना में कम वेतन पाते हैं। उनके अनुसार, विदेशी आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए आने वाले कर्मचारियों के वेतन में यह अंतर और अधिक हो सकता है।
वेंस ने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर नियुक्त करके अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियों और मजदूरी पर दबाव डालती हैं। हालांकि, ये उनके द्वारा दिए गए दावे हैं और इन्हें सभी H-1B कर्मचारियों पर लागू नहीं माना जा सकता।
Cognizant, Infosys समेत कई कंपनियों पर कार्रवाई
अमेरिकी श्रम विभाग के मुताबिक, श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंक ने कई बड़ी आईटी और आउटसोर्सिंग कंपनियों को PERM प्रोग्राम से निलंबित करने की घोषणा की है। इनमें कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी के साथ माइक्रोसॉफ्ट और एडोब के नाम भी शामिल हैं। विभाग ने इस कार्रवाई के पीछे चल रही संघीय जांचों का हवाला दिया है।
श्रम सचिव के अनुसार, 2009 से इन कंपनियों ने करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों की मांग की और उन्हें 2,30,000 से अधिक H-1B वीजा मंजूरियां तथा 1,00,000 से ज्यादा परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन मिले। उन्होंने दावा किया कि इससे अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार पर असर पड़ा।
यह घटनाक्रम अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की ओर से F-1 वीजा पर पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम में नई फीस लागू करने के प्रस्ताव के एक दिन बाद सामने आया। प्रशासन इन कदमों को अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा और इमिग्रेशन व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश बता रहा है, जबकि आलोचकों को आशंका है कि इससे कानूनी प्रवासियों के अवसर सीमित हो सकते हैं।