पश्चिम एशिया की यात्रा करने वाले अमेरिकी नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे हवाई अड्डों और एयरलाइनों के कामकाज से जुड़े अपडेट पर नजर रखें और किसी भी आपात स्थिति के लिए पहले से योजना तैयार रखें.
Written By : धर्मेंद्र बैरागी | Updated at : 19 Oct 2026 05:21 PM (IST)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प
Source : X/@realDonaldTrump
पश्चिम एशिया या मध्यपूर्व में स्थित अमेरिका के मिशनों ने सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों और ईरान व उसके सहयोगियों की ओर से अमेरिकी मिलिटरी बेस और अमेरिकी को निशाना बनाए जाने की आशंका के बीच अपने नागरिकों को “अधिक सतर्क रहने” की सलाह दी है. अमेरिका ने यह जानकारी एक सिक्युरिटी एड्वाइरी जारी कर दी है. एड्वाइरी में कहा गया है कि “उड़ानें रद्द होने, हवाई क्षेत्र बंद होने और यात्रा में रुकावट की आशंका को ध्यान में रखें.”
पीटीआई के अनुसार इसमें यह भी कहा गया है कि “इन शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के कारण स्थिति पश्चिम एशिया क्षेत्र से बाहर भी तेजी से बिगड़ सकती है.” परामर्श के अनुसार, “ईरान और उसका समर्थन करने वाले समूह विदेश में अमेरिकी प्रतिष्ठानों या अमेरिका व उसके नागरिकों से जुड़े स्थानों को निशाना बना सकते हैं.” यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए गए ड्रोन व मिसाइल हमलों के बाद चिंताएं बढ़ गई हैं.
हाल ही में हुए हैं कई हमले
इनमें 10 अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर किया गया एक घातक हमला भी शामिल है, जिसमें एक भारतीय नागरिक समेत 13 लोगों की मौत हो गई थी. अमेरिका हूतियों को ईरान समर्थित एक प्रमुख सशस्त्र समूह मानता है, जो क्षेत्र में तेहरान के सहयोगी नेटवर्क का हिस्सा है. ईरान हूतियों को हथियार, धन और प्रशिक्षण मुहैया करता है.
पश्चिम एशिया की यात्रा करने वाले या वहां से आने वाले अमेरिकी नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे हवाई अड्डों और एयरलाइनों के कामकाज से जुड़े अपडेट पर नजर रखें और किसी भी आपात स्थिति के लिए पहले से योजना तैयार रखें. यरुशलम में अमेरिकी दूतावास ने भी कुछ जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं और संभावित आपातकालीन सहायता के बारे में जानकारी दी है.
लड़ाई बढ़ने की संभावना
सऊदी अरब पर हूतियों के नए हमलों ने अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में एक नया क्षेत्रीय पहलू जोड़ दिया है. इससे इस बात का खतरा बढ़ गया है कि यह टकराव वाशिंगटन और तेहरान के बीच की सीधी लड़ाई से आगे बढ़कर और भी फैल सकता है.
ईरान-अमेरिकी संघर्ष से बढ़ा खतरा
फरवरी में शुरू हुआ अमेरिका-ईरान संघर्ष, जून में हुए एक समझौते के टूटने के बाद से, सैन्य और राजनयिक गतिरोध की स्थिति में फंसा हुआ है. ईरान 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में जहाजों की आवाजाही को लगातार सीमित कर रहा है, जबकि अमेरिका ने तेहरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी (नेवल ब्लॉकेड) जारी रखी हुई है.
सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने इस क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है. इसी के चलते अमेरिकी मिशनों ने पूरे पश्चिम एशिया में रह रहे अमेरिकी नागरिकों से सतर्क रहने और यात्रा में आने वाली संभावित रुकावटों के लिए तैयार रहने को कहा है.
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About the author धर्मेंद्र बैरागी
धर्मेंद्र बैरागी हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में हिन्दी डिजिटल पत्रकारिता पर शोध कर रहे हैं. इनके रुचि के विषय साहित्य, राजनीति एवं खेल आदि है. वर्तमान में एबीपी न्यूज में इंटर्न के रूप में कार्यरत हैं. संपर्क करें- [email protected]
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Published at : 19 Oct 2026 05:21 PM (IST)
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