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UP वोटर लिस्ट में गलत नाम जुड़ा तो कौन फंसेगा? EC ने तय की अफसरों की जिम्मेदारी, DM ही नहीं,कमिश्नर भी नपेंगे!

October 26, 2026

Time Published: Monday, October 26, 2026, 10:09 [IST]

UP Voter List: उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट को लेकर सामने आ रही गड़बड़ियों पर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपना लिया है। अब मतदाता सूची में गलत नाम जुड़ने, सही वोटर का नाम कटने या डुप्लीकेट एंट्री मिलने पर सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों से जवाब नहीं मांगा जाएगा। जिले के डीएम और मंडलायुक्त की जिम्मेदारी भी तय होगी। लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने रविवार को अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि वोटर लिस्ट तैयार करने के काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। पीलीभीत और आजमगढ़ में मतदाता सूची से जुड़ी गड़बड़ियों के बाद यह सख्ती बढ़ाई गई है। आयोग ने 10 अप्रैल को विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की अंतिम सूची जारी होने के बाद कंप्यूटर सहायकों की ओर से ऑनलाइन दर्ज किए गए फॉर्म की जांच कराने का निर्देश दिया है।

UP Voter List

वोटर लिस्ट में गलती हुई तो किसकी तय होगी जिम्मेदारी?

चुनाव आयोग ने साफ किया है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदारी तय करने का दायरा अब बढ़ेगा। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी यानी ERO, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी यानी AERO और कंप्यूटर सहायक की भूमिका की जांच होगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि जिला निर्वाचन अधिकारी ने निगरानी में कोई लापरवाही तो नहीं की।

मंडलायुक्तों को भी रोल प्रेक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें अपने मंडल के जिलों में वोटर लिस्ट से जुड़े काम पर नजर रखनी होगी। अगर किसी जिले में गड़बड़ी मिलती है और जांच में निगरानी की कमी सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।

नवदीप रिणवा ने अधिकारियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 का अध्ययन करने की भी हिदायत दी है। इस धारा में चुनाव से जुड़े कर्तव्यों के उल्लंघन पर दो साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।

कंप्यूटर ऑपरेटर अब नहीं भरेंगे वोटर लिस्ट के फॉर्म

आयोग ने प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब कंप्यूटर सहायकों को मतदाता सूची से जुड़े फॉर्म की ऑनलाइन फीडिंग करने की इजाजत नहीं होगी। 10 अप्रैल के बाद से अब तक कंप्यूटर सहायकों ने जितने फॉर्म दर्ज किए हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

फिलहाल यह बदलाव उन आवेदनों पर भी लागू होगा, जिन्हें लोग कागज पर जमा करते हैं। ऐसे फॉर्म को डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज करने का काम अब बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO करेंगे। इसके लिए उन्हें BLO ऐप का इस्तेमाल करना होगा।

इस व्यवस्था का मकसद आवेदन जमा होने से लेकर उसके डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज होने तक जिम्मेदारी साफ रखना है। BLO को भौतिक रूप से मिले सभी आवेदन सुरक्षित रखने होंगे। शिकायत या जांच होने पर मूल दस्तावेज पेश करने पड़ सकते हैं।

आयोग ने खास तौर पर फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की जांच कराने को कहा है। इन फॉर्मों के जरिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने, नाम हटाने और मौजूदा जानकारी में बदलाव जैसे काम होते हैं। इनकी जांच से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कहीं गलत नाम तो नहीं जोड़े गए या किसी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से तो नहीं हटाया गया।

डुप्लीकेट वोटरों की शिकायत पर चार जिलों से मांगी रिपोर्ट

मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियों को लेकर भी आयोग ने सख्ती दिखाई है। नवदीप रिणवा ने बुलंदशहर, सीतापुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ के जिला निर्वाचन अधिकारियों से नाराजगी जताई। इन जिलों से सोशल मीडिया पर सामने आई डुप्लीकेट वोटरों की शिकायतों पर समय से रिपोर्ट नहीं भेजी गई थी।

अधिकारियों को जल्द रिपोर्ट भेजने और शिकायतों की तथ्यात्मक जांच करने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने कहा है कि सोशल मीडिया या किसी दूसरे माध्यम से मिली शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हर शिकायत की तय समयसीमा में जांच होनी चाहिए और रिपोर्ट तथ्यों के आधार पर तैयार की जानी चाहिए।

बूथ पर गैरहाजिर BLO और कॉल का जवाब नहीं देने वालों पर भी कार्रवाई

चुनाव आयोग की सख्ती सिर्फ ऑनलाइन फॉर्म तक सीमित नहीं है। 24 अक्टूबर को हुए विशेष अभियान दिवस पर कई BLO के समय से बूथ पर नहीं पहुंचने या गैरहाजिर रहने की शिकायतें मिली थीं। सीईओ ने ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। साथ ही चेतावनी दी है कि आगामी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान अभियान दिवसों पर इस तरह की लापरवाही दोबारा नहीं होनी चाहिए।

ECINet ऐप और पोर्टल पर 'बुक अ कॉल विद BLO' सुविधा के तहत नागरिकों की कॉल रिक्वेस्ट भी लंबित नहीं रहनी चाहिए। किसी नागरिक की कॉल का जवाब देने में 48 घंटे से ज्यादा की देरी नहीं होनी चाहिए। ऐसा होने पर संबंधित BLO के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

ERONET का पासवर्ड साझा किया तो बढ़ सकती है मुश्किल

डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा के लिए अधिकारियों को ERONET की लॉगिन आईडी और पासवर्ड किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने का निर्देश दिया गया है। सभी अधिकारियों को तय पासवर्ड नीति के तहत अपना पासवर्ड तुरंत बदलने को कहा गया है।

अधिकारियों को ECINet का प्रशिक्षण भी दिया गया। उनसे ऐप में अपना निजी मोबाइल नंबर जोड़ने को कहा गया, ताकि BSNL नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने पर कामकाज प्रभावित न हो।

आयोग की सख्ती का वोटरों पर क्या असर पड़ेगा?

इन निर्देशों का सीधा मकसद वोटर लिस्ट में गलत नाम जुड़ने, योग्य मतदाता का नाम कटने और एक ही व्यक्ति की दोहरी एंट्री जैसी गड़बड़ियों को रोकना है। कंप्यूटर सहायकों से फॉर्म की फीडिंग हटाकर BLO को यह जिम्मेदारी देने से आवेदन दर्ज करने की प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की गई है।

अब जिला और मंडल स्तर के अधिकारियों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि शिकायतों की जांच समय पर हो और मतदाता सूची से जुड़े रिकॉर्ड की निगरानी ठीक से की जाए। हालांकि, इन निर्देशों का वास्तविक असर जांच के नतीजों और शिकायतों पर होने वाली कार्रवाई से साफ होगा। फिलहाल आयोग ने संकेत दे दिया है कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी को केवल किसी एक कर्मचारी की गलती मानकर छोड़ नहीं दिया जाएगा।