जामिया में छात्र संघ बहाली की मांग पर प्रदर्शन तेज, छात्रों का आरोप- गेट बंद करने के लिए बनाई जा रही दीवार
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि लगभग दो दशक से निर्वाचित छात्र संघ नहीं होने के कारण उन्हें अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने के लिए प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है.
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि लगभग दो दशक से निर्वाचित छात्र संघ नहीं होने के कारण उन्हें अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने के लिए प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है.
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Jamia Protest
जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सटी में छात्र संघ की बहाली और चुनाव करवाने की मांग के लिए छात्रों का प्रदर्शन हो रहा है. विद्यालय के छात्र 12 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. अब उनका प्रदर्शन तेज हो गया है. उनकी मांग है कि विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्रों संघ को दोबारा से बहाल किया जाए. चुनाव करवाने की तारीख की औपचारिक रूप से घोषणा की जाएगा. बता दें, साल 2006 में विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के चुनाव बंद हैं.
दीवार बनाने पर बवाल
प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परिसर के गेट नंबर 7 और 10 के पास दीवार बनाने के काम को लेकर भी विवाद सामने आया है. छात्रों का आरोप है कि इस निर्माण का उद्देश्य प्रदर्शन स्थल तक पहुंच सीमित करना है. वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि निर्माण कार्य सुरक्षा और मरम्मत से संबंधित है तथा इसका प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है.
2006 से बंद हैं छात्र संघ के चुनाव
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि लगभग दो दशक से निर्वाचित छात्र संघ नहीं होने के कारण उन्हें अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने के लिए प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है. वे चाहते हैं कि छात्र संघ के चुनाव की समयसीमा तय की जाए और चुनाव प्रक्रिया जल्द शुरू हो.
छात्रों ने छात्रावासों की सुविधाओं, पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, छात्रवृत्ति, शोध अनुदान और उपस्थिति संबंधी नियमों जैसे मुद्दे भी उठाए हैं. हालांकि, उनका कहना है कि फिलहाल उनकी मुख्य मांग छात्र संघ की बहाली और चुनाव की तारीख घोषित करना है.
भूख हड़ताल पर बैठे छात्र
प्रदर्शन के तहत कई छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. छात्रों के अनुसार, आंदोलन का उद्देश्य विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधित्व को बहाल कराना है, ताकि विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक समस्याओं को निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से उठा सकें.
प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्ट समयसीमा देने और आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग भी की है. कुछ छात्रों ने आरोप लगाया है कि आंदोलन के दौरान उन्हें परिसर से हटाने की कोशिश की गई. ये आरोप छात्रों के बयान पर आधारित हैं.
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