Published: Friday, October 23, 2026, 16:26 [IST]
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजबूत उम्मीदवार चुनने और संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय रखने की है। इसी कड़ी में प्रदेश की करीब 125 विधानसभा सीटों पर सर्वे पूरा होने की चर्चा है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े की टीम संभावित उम्मीदवारों और मौजूदा विधायकों की स्थिति का फीडबैक जुटा रही है। इस कवायद के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी कुछ मौजूदा विधायकों के टिकट काटकर नए चेहरों पर दांव लगाएगी?
फिलहाल, टिकट काटने को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन चुनाव से पहले उम्मीदवारों की लोकप्रियता, स्थानीय समीकरण और कार्यकर्ताओं के रुख का आकलन पार्टी की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लगातार जिला दौरों और बीजेपी के शीर्ष नेताओं के प्रस्तावित कार्यक्रमों ने भी यूपी की सियासत में हलचल बढ़ा दी है।
125 सीटों पर सर्वे पूरा, BJP किस आधार पर चुनेगी उम्मीदवार?
बीजेपी से जुड़ी चर्चाओं के मुताबिक, प्रदेश की करीब 125 विधानसभा सीटों पर सर्वे का काम पूरा हो चुका है। इस प्रक्रिया में संगठन के अलग-अलग स्तरों से फीडबैक जुटाने की बात कही जा रही है। बूथ कमेटियों, शक्ति केंद्रों और स्थानीय नेताओं से संभावित उम्मीदवारों की लोकप्रियता और चुनाव जीतने की क्षमता को लेकर जानकारी ली जा रही है।
इस तरह के आकलन में सिर्फ विधायक की पहचान या पार्टी में उसकी पकड़ ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में उसकी स्वीकार्यता भी मायने रख सकती है। पार्टी यह समझने की कोशिश कर सकती है कि मौजूदा विधायक के कामकाज को लेकर जनता की राय कैसी है और स्थानीय कार्यकर्ता उसके साथ कितने सक्रिय हैं। हालांकि, सर्वे में किन सीटों को शामिल किया गया है और किन नेताओं का प्रदर्शन कमजोर मिला है, इसकी आधिकारिक सूची सामने नहीं आई है।
विनोद तावड़े की सक्रियता को भी इसी चुनावी तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिलों का दौरा कर रहे हैं। इन गतिविधियों का मकसद संगठन की स्थिति समझना और चुनाव से पहले कमजोर कड़ियों की पहचान करना हो सकता है।
किन विधायकों के टिकट पर चल सकती है कैंची?
बीजेपी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि मौजूदा विधायकों को दोबारा मौका दिया जाए या नए चेहरों को मैदान में उतारा जाए। जिन सीटों पर विधायक के खिलाफ नाराजगी की बात सामने आती है, वहां पार्टी उम्मीदवार बदलने के विकल्प पर विचार कर सकती है। हालांकि, 125 सीटों के सर्वे में किन विधायकों की स्थिति कमजोर मिली है, इसका ब्योरा सार्वजनिक नहीं है। इसलिए अभी किसी खास विधायक का टिकट कटने की पुष्टि नहीं की जा सकती।
उम्मीदवार चुनते समय स्थानीय लोकप्रियता, संगठन में पकड़, कार्यकर्ताओं का समर्थन और क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण अहम हो सकते हैं। टिकट बदलने से पार्टी को नया चेहरा पेश करने का मौका मिलता है, लेकिन इससे पुराने नेताओं और उनके समर्थकों की नाराजगी का खतरा भी रहता है। ऐसे में बीजेपी के लिए उम्मीदवार बदलने और संगठन में एकजुटता बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा।
पूर्वांचल और अवध पर क्यों रहेगा BJP का फोकस?
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सीटें घटने के बाद पार्टी के सामने अपना संगठन मजबूत करने की चुनौती है। इसी वजह से पूर्वांचल और अवध जैसे क्षेत्रों में स्थानीय नेताओं की स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और उम्मीदवारों की स्वीकार्यता पर खास ध्यान दिए जाने की चर्चा है।
यहां उम्मीदवार का चयन सिर्फ पार्टी की छवि के आधार पर नहीं, बल्कि विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर भी करना होगा। बीजेपी की रणनीति में बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करना और नेताओं के बीच तालमेल बढ़ाना भी शामिल है। सितंबर में विनोद तावड़े और बीजेपी के संगठन महासचिव बीएल संतोष ने सांसदों, विधायकों, जिला पदाधिकारियों और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों के जरिए चुनावी तैयारी पर चर्चा की थी।
मोदी, शाह और नितिन नबीन के यूपी दौरे से बढ़ेगी हलचल
यूपी चुनाव की तैयारियों के बीच बीजेपी के बड़े नेताओं के प्रस्तावित कार्यक्रम भी चर्चा में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अक्टूबर को वाराणसी में एयर शो देखने पहुंचने वाले हैं। इसके बाद 27 अक्टूबर को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के आजमगढ़ में ओमप्रकाश राजभर के मंच पर शामिल होने का कार्यक्रम बताया गया है।
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 30 और 31 अक्टूबर को लखनऊ में बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने की संभावना है। इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों, विधायकों, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रियों तथा संगठन के पदाधिकारियों के शामिल होने की बात कही गई है। हालांकि, कुछ रिपोर्टों में बैठक और दौरे को प्रस्तावित बताया गया है, इसलिए कार्यक्रम के अंतिम विवरण की आधिकारिक पुष्टि पर नजर रखना जरूरी है।
दिवाली से पहले पार्टी संगठन की कमियों को दूर करने और सहयोगी दलों के साथ तालमेल मजबूत करने पर भी ध्यान दे सकती है। इन दौरों को केवल राजनीतिक कार्यक्रमों के तौर पर नहीं, बल्कि 2027 के चुनाव से पहले संगठन की तैयारी परखने के मौके के रूप में भी देखा जा रहा है।
नवंबर से बूथ स्तर पर बढ़ेगा संवाद?
बीजेपी की चुनावी रणनीति में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम रहती है। चर्चा है कि नवंबर से बूथ अध्यक्षों, शक्ति केंद्र संयोजकों और दूसरे संगठनात्मक पदाधिकारियों के साथ संवाद तेज किया जा सकता है। इसका मकसद जमीनी स्तर पर पार्टी की स्थिति समझना, कार्यकर्ताओं की दिक्कतें सुनना और चुनावी रणनीति को हर इलाके तक पहुंचाना होगा।
30 और 31 अक्टूबर की प्रस्तावित प्रदेश कार्यसमिति बैठक में भी संगठन की तैयारियों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके बाद पार्टी की गतिविधियां किस दिशा में बढ़ती हैं, इस पर नजर रहेगी।
फिलहाल करीब 125 सीटों पर सर्वे पूरा होने की चर्चा और बड़े नेताओं के प्रस्तावित दौरे बीजेपी की चुनावी तैयारियों की तस्वीर पेश करते हैं। लेकिन मौजूदा विधायकों के टिकट काटने या नए चेहरों को उतारने पर अंतिम फैसला पार्टी का प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। सर्वे के नतीजे, स्थानीय समीकरण और संगठन से मिलने वाला फीडबैक इस फैसले में कितनी भूमिका निभाते हैं, यह आने वाले महीनों में साफ होगा।