
यूपी 690000 टीचर भर्ती विवाद
UP 69000 Teacher Bharti: यूपी 69000 शिक्षक भर्ती 2020 से जुड़े विवाद का पटापेक्ष होता दिख रहा है. इस भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त हुए 67 हजार से अधिक शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है. उनकी नौकरी नहीं जाएगी. तो वहीं इस शिक्षक भर्ती के तहत नए कैंडिडेट्स को नियुक्ति दी जाएगी, जिनकी संख्या 9 हजार से अधिक हो सकती है. बीते दिनों यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में हलफनामा दाखिल किया है. कुल जमा समझें तो यूपी में शुरू हुआ 69000 शिक्षक भर्ती विवाद खत्म हो गया है. इसके बाद 67 हजार से अधिक शिक्षकों की नौकरी नहीं जाएगी. तो वहीं 9 हजार तक नए कैंडिडेट्स को इस भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त किया जाएगा.
आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं. जानते हैं कि इस भर्ती को लेकर विवाद की वजह क्या थी. इलाहाबाद कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया था और कैसे मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.
यूपी में 69 हजार शिक्षक भर्ती विवाद क्या है?
यूपी में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती के लिए 2018 में विज्ञापन जारी किया गया था, जिसके तहत बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में 69 हजार सहायक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए. आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 6 जनवरी को 2019 को सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा (ATRE-2019) आयोजित की गई. इसके अगले दिन 7 जनवरी को सरकार ने भर्ती में न्यूनतम उत्तीर्णांक निर्धारित किए, जिसमेंसामान्य वर्ग के लिए कटऑफ 65 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए कटऑफ 60 प्रतिशत निर्धारित की गई.
कटऑफ में बदलाव का फैसला बना विवाद की वजह
एग्जाम के बाद भर्ती कटऑफ में बदलाव ही विवाद की वजह बना. राज्य सरकार के इस फैसले को कैंडिडेट्स ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी. कैंडिडेट्स ने एग्जाम के बीच नियमों में बदलाव को असंवैधानिक बताया, लेकिन इन कैंडिडेट्स को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली.6 मई 2020 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार के निर्णय को सही करार दिया. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.
रिजल्ट जारी,67,867 शिक्षकों को मिली नियुक्ति
इसी कड़ी में भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई और 1 जून 2020 को रिजल्ट जारी किया गया. नंबरों के आधार पर मेरिट तैयार की गई और 67,867 कैंडिडेट्स की मेरिट सूची जारी गई, जिन्हें बाद में नियुक्ति दी गई है. वहीं 1133 पद खाली रह गए. ये पद अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के खाली रह गए. क्योंकि इस कैटेगरी के पात्र कैंडिडेट्स उपलब्ध नहीं थे.
ओबीसी की सीट कटौती का आरोप, फिर हाईकोर्ट पहुंचा मामला
69000 शिक्षक भर्ती रिजल्ट जारी होने के बाद ये मामला फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा. कैंडिडेट्स ने भर्ती प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश आरक्षण अधिनियम-1994 और बेसिक शिक्षा सेवा नियमावली-1981 का पालन ना करने का आरोप लगाया. कैंडिडेट्स ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में ओबीसी के पदों की कटौती गई है.
कैंडिडेट्स का आरोप था कि OBC कैंडिडेट्स के लिए कुल 18,598 पद आरक्षित थे, लेकिन 2637 पदों पर ही ओबीसी कैंडिडेट्स को नियुक्तियां दी गई हैं. मसलन, संविधान की तरफ से निर्धारित 27 फीसदी आरक्षण की जगह उन्हें3.86 फीसदी प्रतिनिधित्व मिला. इसी तरह अनुसूचित जाति (SC) कैटेगरी के कैंडिडेट्स ने भी सीट कटौती का आरोप लगाया.वहीं यूपी सरकार ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का पालन किया गया है.
मेरिटोरियस रिजर्व कैटेगरी (MRC) ने बदला गणित
असल में यूपी में 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण को लेकर विवाद की वजह मेरिटोरियस रिजर्व कैटेगरी (MRC) बना, जिसने भर्ती का गणित बदला और विवाद हुआ. असल में MRC ऐसे कैंडिडेट्स को कहा जाता है, जो आरक्षित श्रेणी से होते तो हैं, लेकिन परीक्षा में इने प्राप्तांक सामान्य कैंडिडेट्स से बेहतर हाेते हैं और ये कैंडिडेट्स सामान्य वर्ग की मेरिट में स्थान प्राप्त कर लेते हैं, जिन्हें MRC के तौर पर रेखांकित किया जाता है.सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जारी आदेशों के मुताबिक ऐसे कैंडिडेट्स को सामान्य कोटे की सीटों में समायोजित किया जाएगा. ऐसा करने से आरक्षित वर्ग की सीटें उसी वर्ग के अन्य कैंडिडेट्स के लिए उपलब्ध रहती हैं. याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में इस सिद्धांत का सही ढंग से पालन नहीं किया गया.
सिंगल बेंच और डिवीजन बेंच के अलग-अलग फैसलों से उलझा मामला
69000 शिक्षक भर्ती विवाद मामले में पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई. 13 मार्च 2023 को सिंगल बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आरक्षित वर्ग के जिन कैंडिडेट्स ने एग्जाम में 60 से अधिक और 65 फीसदी से कम नंबर प्राप्त कर मेरिट सूची में जगह बनाई है, उन्हेंसामान्य कैटेगरी में माइग्रेशन का लाभ नहीं दिया जा सकता. ऐसे कैंडिडेट्स को सिर्फ आरक्षित कोटे की सीटों का लाभ दिया जाना चाहिए.
डिविजन बेंच ने ऐसा पलटा फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ बाद में याचिका दायर की गई. 13 अगस्त 2024 को डिविजन बेंज ने इस पर फैसला सुनाते हुए सिंगल बेंच का फैसला रद्द कर दिया. डिविजन बेंच ने मेरिट सूची तैयार करने काे सही बताया. मेरिटोरियस रिजर्व कैटेगरी (MRC) के कैंडिडेट्स को सामान्य कोटे में ही समायोजित करने और इसके बाद क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) लागू करने का आदेश दिया.
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, आदेश पर अंतरिम रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. तो वहीं नियुक्त हुए शिक्षकाें ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए 9 सितंबर 2024 को हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि फिलहाल नई मेरिट सूची लागू नहीं की जाएगी. इसके बाद हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को बीच का रास्ता खोजने का सुझाव दिया था.
SC में यूपी सरकार का जवाब, पुरानों की नौकरी बरकरार, नयों को मिलेगी नियुक्ति
वहीं इस संबंध में बीते रोज सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार ने हलफनाम दाखिल किया है. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में यूपी सरकार ने कहा है कि पूर्व में नियुक्त किए गए 67 हजार से अधिक शिक्षकों की नौकरी बरकरार रहेगी. तो वहीं यदि संशोधित मेरिट सूची तैयार की जाएगी. इसमें अगर कुछ कैंडिडेट्स पात्र पाए जाते हैं तो उन्हें नियुक्ति दी जाएगी. माना जा रहा है कि 9 हजार नए कैंडिडेट्स को इस फैसले के बाद नियुक्ति मिल सकती है.
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