नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा (MP Mahua Moitra) ने आरोप लगाया है कि केंद्र और पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार अलपसंख्यक IAS और IPS अफसरों के साथ धार्मिक आधार पर भेदभाव करती है। लोकसभा सांसद मोइत्रा ने इस मुद्दे को अब संयुक्त राष्ट्र (UN) के सामने उठाया है। उन्होंने UN में अल्पसंख्यक मामलों के विशेष दूत प्रोफेसर निकोलस लेवैट को शिकायती पत्र भेजा है और मामले में दखल देने की अपील की है। TMC सांसद ने UN के विशेष प्रतिवेदक (स्वतंत्र विशेषज्ञ) से संपर्क कर आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरों के दौरान, वरिष्ठ मुस्लिम आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को उनके धर्म की वजह से आधिकारिक कार्यक्रमों से बाहर रखा गया।
पढ़ें :- केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जनता को दिलाया भरोसा, कहा- संघर्ष के बीच में भी नहीं होगी देश में उर्वरक की कमीसंयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) में अल्पसंख्यक मामलों के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ निकोलस लेव्रैट को लिखे एक पत्र में मोइत्रा ने आरोप लगाया कि जुलाई और अगस्त में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) के दौरों के दौरान तीन मौकों पर तीन वरिष्ठ अधिकारियों को या तो कार्यक्रम स्थल से जाने के लिए कहा गया या उन्हें आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान उपस्थित नहीं रहने को कहा गया।
इन अधिकारियों को कार्यक्रम से बाहर रखा गया
तृणमूल सांसद ने आरोप लगाया कि इन अधिकारियों को कार्यक्रम से बाहर रखा गया, जबकि दूसरे धर्मों के उनके सहकर्मियों को उस दौरान उपस्थित रहने की इजाजत दी गई। मोइत्रा ने पत्र में कहा कि इन तीनों अधिकारियों में एक बात समान है, और यही बात उन्हें उन सहकर्मियों से अलग करती है जिन्हें कार्यक्रम के दौरान मौजूद रहने की इजाजत दी गई थी और वह है उनका धर्म।
तीन अल्पसंख्यक अफसरों का जिक्र
तृणमूल सांसद ने अपनी चिट्ठी में सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त वकार रजा, पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष कार्य बल (STF) के प्रमुख जावेद शमीम और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारी खलील अहमद का जिक्र किया है। मोइत्रा ने कुछ दिन पहले इस बारे में ‘एक्स’ पर पोस्ट किया था, जिसके बाद उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और उन्हें डायमंड हार्बर पुलिस (Diamond Harbour Police) थाना बुलाया गया। उन्होंने इन कथित घटनाओं को ‘जानबूझकर बाहर रखने’ का एक पैटर्न बताया और कहा कि इस तरह के व्यवहार से अल्पसंख्यक समुदायों के विश्वास और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
Sent urgent appeal to Prof. Nicolas Levrat, UN Special Rapporteur for Minority Issues on the unconstitutional exclusion of Muslim officers from official events in Bengal where Amit Shah was present. Have sent PDF of letter to media. Please msg me if copy required. pic.twitter.com/LfcJYmCfqt
— Mahua Moitra (@MahuaMoitra) September 17, 2026
चिट्ठी सोशल मीडिया पर भी साझा
तृणमूल नेता ने संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र विशेषज्ञ से आग्रह किया कि (अल्पसंख्यक अधिकारियों को आधिकारिक कार्यक्रमों से) कथित तौर पर बाहर रखने के कारणों और इसके पीछे के प्राधिकार के बारे में भारत सरकार से स्पष्टीकरण मांगा जाए। उन्होंने शाह के दौरों से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, यात्रा डायरी और अन्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की भी मांग की। मोइत्रा ने अपनी शिकायत में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा और नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय संधि के प्रावधानों का हवाला दिया। मोइत्रा ने अपनी चिट्ठी सीशल मीडिया पर भी साझा की है।
एक्स पर उन्होंने लिखा है कि भारत, UN के ‘मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा 1948’ और ‘नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय समझौते’ का हस्ताक्षरकर्ता है। पश्चिम बंगाल और केंद्र सरकार द्वारा IPS और IAS अधिकारियों के साथ धार्मिक भेदभाव के मामले को देखने के लिए UN के स्पेशल रैपोर्टियर से तत्काल अपील की है। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा कि बंगाल में उन आधिकारिक कार्यक्रमों से मुस्लिम अधिकारियों को असंवैधानिक रूप से बाहर रखने के मामले पर UN के अल्पसंख्यक मामलों के स्पेशल रैपोर्टियर प्रो. निकोलस लेवराट से तत्काल अपील की है, जिनमें अमित शाह मौजूद थे। पत्र की PDF मीडिया को भेज दी है। अगर कॉपी चाहिए तो कृपया मुझे मैसेज करें।