ट्विशा शर्मा डेथ केस में रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ सीबीआई की चार्जशीट पर अब उसी विशेष अदालत में सुनवाई होगी, जहां से गिरिबाला सिंह को पहले अग्रिम जमानत मिली थी। हाईकोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बाद गिरिबाला सिंह जेल में हैं।
उसी विशेष कोर्ट में चलेगा रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह का मुकदमा
- Published: 01 Sep 2026, 11:15 AM IST
- Last Updated: 01 Sep 2026, 11:15 AM IST
भोपाल: चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस में ट्रायल को लेकर स्थिति साफ हो गई है। मामले की सुनवाई किसी दूसरी अदालत में ट्रांसफर नहीं होगी। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने केस को विशेष न्यायाधीश (ओडब्ल्यू) पल्लवी द्विवेदी की अदालत में भेज दिया है। खास बात यह है कि इसी अदालत ने मामले के शुरुआती दौर में पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी। बाद में हाईकोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी थी।
अब सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट पर आगे की कानूनी कार्रवाई इसी विशेष अदालत में होगी। अदालत के अवकाश के कारण सोमवार को मामले में सुनवाई नहीं हो सकी। अब अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी। इसी चरण में आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
गिरिबाला सिंह और बेटे पर गंभीर आरोप
ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में सीबीआई ने 17 अगस्त को पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। जांच एजेंसी ने दोनों पर मानसिक क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े आरोप लगाए हैं।
गिरिबाला सिंह को पहले विशेष अदालत से अग्रिम जमानत मिली थी। इसके बाद जबलपुर हाईकोर्ट ने उस राहत को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट के फैसले के बाद सीबीआई ने उन्हें हिरासत में लिया था। तब से वे जेल में हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी चर्चा
मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी अहम है। सीबीआई की चार्जशीट में एम्स दिल्ली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है। इसमें शरीर पर गंभीर बाहरी चोट के निशान नहीं मिलने की बात सामने आई है। वहीं, इससे पहले एम्स भोपाल की शुरुआती रिपोर्ट में शरीर पर छह चोटों का जिक्र किया गया था। दोनों रिपोर्ट को लेकर मामला पहले से चर्चा में रहा है।
पीड़ित पक्ष के पास ट्रांसफर का विकल्प
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अंकुर पांडे के मुताबिक, यही वह अदालत है जहां से गिरिबाला सिंह को शुरुआती चरण में अग्रिम जमानत मिली थी। उनका कहना है कि यदि पीड़ित परिवार को किसी अदालत में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका होती है, तो कानून के तहत केस ट्रांसफर कराने का विकल्प उपलब्ध रहता है।
फिलहाल मामला उसी विशेष अदालत में चलेगा। 16 सितंबर की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि आरोप तय करने की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।