ट्विशा शर्मा मौत मामले में पहली बार आरोपी गिरिबाला सिंह के वकील इनोश जॉर्ज कार्लो सामने आए। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों ने कभी वॉयस सैंपल देने से इनकार नहीं किया। उनका दावा है कि सीबीआई को पहले ही सहमति दे दी गई थी
ट्विशा केस में पहली बार बोले गिरिबाला के वकील
- Published: 15 Jul 2026, 09:37 AM IST
- Last Updated: 15 Jul 2026, 09:37 AM IST
भोपाल: बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में पहली बार आरोपी गिरिबाला सिंह की ओर से उनके वकील इनोश जॉर्ज कार्लो खुलकर मीडिया के सामने आए। उन्होंने सीबीआई के उस दावे पर सवाल उठाए, जिसमें कहा गया था कि आरोपी पक्ष ने वॉयस सैंपल देने से इनकार किया है। कार्लो ने साफ कहा कि उनके मुवक्किलों ने कभी भी वॉयस सैंपल देने से मना नहीं किया और जांच एजेंसी को हर स्तर पर पूरा सहयोग दिया है।
ट्रांसक्रिप्ट को लेकर कुछ कानूनी शंकाएं
वकील कार्लो ने बताया कि वॉयस सैंपल लेने की प्रक्रिया के दौरान सीबीआई ने आरोपियों को एक ट्रांसक्रिप्ट पढ़ने के लिए दी थी। इसी ट्रांसक्रिप्ट को लेकर कुछ कानूनी शंकाएं थीं। उनका कहना था कि किसी भी आरोपी को अपने वकील से कानूनी सलाह लेने का अधिकार होता है, लेकिन उस समय उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। इसके बावजूद गिरिबाला सिंह ने करीब तीन घंटे तक वॉयस सैंपल दिए थे।
कार्लो ने दावा किया कि 11 जुलाई को ही उन्होंने सीबीआई को स्पष्ट रूप से बता दिया था कि उनके मुवक्किल ट्रांसक्रिप्ट पढ़कर वॉयस सैंपल देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जांच में सहयोग करने में उनकी ओर से कभी कोई हिचकिचाहट नहीं रही। "हमारे मन में कोई खोट नहीं है, इसलिए डरने का सवाल ही नहीं उठता," उन्होंने कहा।
आदेश पत्रिका में भी दर्ज की गई बात
वकील के मुताबिक सोमवार को जिला अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दोनों आरोपियों से सीधे पूछा था कि क्या उन्हें वॉयस सैंपल देने में कोई आपत्ति है। इस पर गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने अदालत को बताया कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और जो भी ट्रांसक्रिप्ट पढ़ने के लिए दी जाएगी, वे उसे पढ़ देंगे। कार्लो का दावा है कि यह बात अदालत की आदेश पत्रिका में भी दर्ज की गई है।
सीबीआई आवेदन पर बहस की जरूरत नहीं
उन्होंने यह भी कहा कि जब अदालत के सामने दोनों आरोपियों ने अपनी सहमति दे दी थी, तब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 349 के तहत सीबीआई के आवेदन पर आगे बहस की जरूरत ही नहीं बची। अदालत ने भी माना कि इस विषय पर पहले ही आदेश पारित किया जा चुका है।
कार्लो ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2016 के सुधीर कुमार बनाम स्टेट ऑफ दिल्ली मामले का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वॉयस सैंपल उसी रिकॉर्डिंग के अनुरूप लिया जाना चाहिए, जिससे उसका मिलान किया जाना है। यदि ट्रांसक्रिप्ट को लेकर किसी प्रकार की शंका हो तो जांच एजेंसी की जिम्मेदारी है कि वह आरोपी को उसका उचित स्पष्टीकरण दे।
गौरतलब है कि ट्विशा शर्मा और समर्थ सिंह की शादी 9 दिसंबर 2025 को हुई थी। हाल ही में हुई सुनवाई के बाद सीबीआई ने अदालत में कहा था कि आरोपियों ने अब तक वॉयस सैंपल नहीं दिए हैं, जबकि ट्विशा पक्ष के वकील ने AIIMS भोपाल द्वारा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराए जाने का मुद्दा भी उठाया था। अब आरोपी पक्ष के इस बयान के बाद मामले में वॉयस सैंपल को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।