थायराइड हार्मोन का स्तर कम होना शरीर के मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है, जिससे वजन बढ़ने और थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं, जिसे सही समय पर पहचानकर और डॉक्टर की सलाह से आसानी से संभाला जा सकता है।
Thyroid Control Tips : अक्सर जब भी थायराइड की बात होती है, तो लोगों का ध्यान इसके बढ़ने पर ही जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि थायराइड का स्तर जरूरत से कम होना भी सेहत के लिए उतना ही नुकसानदेह हो सकता है?
जब हमारी थायराइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती, तो इस स्थिति को मेडिकल भाषा में ‘हाइपोथायरायडिज्म’ कहा जाता है।
यह हार्मोन हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म (पाचन और ऊर्जा की दर) को नियंत्रित करता है। जब इसका स्तर गिरता है, तो शरीर के कई जरूरी काम धीमे पड़ जाते हैं।
अगर समय रहते इसके लक्षणों की पहचान कर ली जाए, तो सही इलाज और थोड़ी सी सावधानी से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
लो थायराइड होने पर शरीर में दिखते हैं ये बड़े बदलाव
1. बिना बात के वजन बढ़ना
अगर आप कम खाना खा रहे हैं और फिर भी आपका वजन लगातार बढ़ रहा है, तो इसकी वजह धीमा मेटाबॉलिज्म हो सकती है। थायराइड हार्मोन कम होने से शरीर कैलोरी बर्न नहीं कर पाता, जिससे फैट जमा होने लगता है।
2. हर समय थकान और सुस्ती
पूरी नींद लेने और हल्का काम करने के बाद भी अगर आपको दिनभर सुस्ती और थकान महसूस होती है, तो यह लो थायराइड का एक मुख्य संकेत है।
3. जरूरत से ज्यादा ठंड लगना
मौसम सामान्य होने पर भी अगर आपको दूसरों की तुलना में बहुत अधिक ठंड लगती है या आपके हाथ-पैर ठंडे बने रहते हैं, तो यह शरीर में ऊर्जा उत्पादन कम होने का नतीजा हो सकता है।
4. पाचन धीमा होना और कब्ज
मेटाबॉलिज्म धीमा होने का असर सीधे हमारी आंतों की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। इससे पेट साफ न होना और बार-बार कब्ज की शिकायत रहने लगती है।
5. त्वचा में सूखापन और झड़ते बाल
लो थायराइड का सीधा असर हमारी स्किन और बालों पर दिखता है। त्वचा बहुत ज्यादा ड्राई होने लगती है और बाल तेजी से पतले होकर झड़ने लगते हैं।
6. महिलाओं में अनियंत्रित पीरियड्स
थायराइड हार्मोन का असंतुलन महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ को प्रभावित करता है। इसके कारण पीरियड साइकिल बिगड़ सकती है या फिर ब्लीडिंग ज्यादा हो सकती है।
7. फोकस करने में परेशानी और मूड स्विंग्स
किसी काम में मन न लगना, याददाश्त कमजोर महसूस होना या बिना किसी बात के उदासी और डिप्रेशन जैसा अनुभव होना भी हाइपोथायरायडिज्म का ही एक लक्षण हो सकता है।
बचाव और सही देखभाल के जरूरी तरीके
नियमित दवा: डॉक्टर द्वारा बताई गई थायराइड की दवा (जैसे लेवोथायरोक्सिन) को रोज सुबह खाली पेट तय समय पर लें।
समय पर टेस्ट: हर 3 से 6 महीने में अपना TSH ब्लड टेस्ट कराते रहें, ताकि दवा की सही खुराक तय की जा सके।
खान-पान में बदलाव: डाइट में फाइबर, हरी सब्जियां और आयोडीन युक्त भोजन शामिल करें। अत्यधिक प्रोसेस्ड और जंक फूड से दूरी बनाएं।
सक्रिय रहें: रोजाना 20 से 30 मिनट की हल्की वॉक या योग करने से मेटाबॉलिज्म बेहतर बना रहता है।
यदि आपको ऊपर बताए गए लक्षणों में से कई संकेत एक साथ महसूस हो रहे हैं, तो खुद से दवा लेने के बजाय किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें और ब्लड टेस्ट करवाएं।