August 24, 2026

चंडीगढ़: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर सरकारी कर्मचारियों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले कर्मचारियों से पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने का वादा किया था और 2022 में इसे दिवाली के तोहफे के रूप में प्रस्तुत किया था, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बाद भी यह वादा पूरा नहीं हुआ है। अपने अधिकारों की मांग करने वाले कर्मचारियों को बातचीत और समाधान देने के बजाय पुलिस की लाठियां मिल रही हैं।
चुग ने कहा कि पिछले कुछ सप्ताहों में पंजाब के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों का जिस तरह व्यापक आक्रोश सामने आया है, उससे स्पष्ट है कि सरकार ने कर्मचारियों की समस्याओं को लगातार टालने की नीति अपनाई है। OPS के अलावा लंबित DA एरियर, राज्य वेतनमान, नियमितीकरण और अन्य सेवा संबंधी मांगों को लेकर शिक्षक, सफाई कर्मचारी, बिजली निगम के कर्मचारी, मनरेगा एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारी तथा अन्य सरकारी कर्मचारी लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं।
चुग ने कहा कि वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा आज कर्मचारियों के आक्रोश का प्रमुख केंद्र बन चुके हैं क्योंकि वित्त विभाग ही सरकार के कर्मचारियों से जुड़े अधिकांश वित्तीय दायित्वों और मांगों पर निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्थिति यह है कि कर्मचारी संगठनों द्वारा वित्त मंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन किया जा रहा है और सरकार के खिलाफ असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो हरपाल सिंह चीमा विपक्ष में रहते हुए कर्मचारियों के धरनों में बैठते थे और उन्हें भरोसा देते थे कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर 17 जुलाई 2020 की अधिसूचना सहित कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा, वही सरकार बनने के बाद उन्हीं कर्मचारियों की आवाज दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं?
चुग ने कहा कि पंजाब के करीब सात लाख सरकारी एवं विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके बीच लगातार बढ़ता असंतोष केवल कर्मचारियों का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव राज्य की शासन व्यवस्था और आम आदमी पार्टी की राजनीतिक विश्वसनीयता पर पड़ रहा है। जब सरकार अपने कर्मचारियों से किए वादे पूरे नहीं कर सकती, तो जनता के सामने किए गए उसके बाकी वादों की विश्वसनीयता पर भी स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं।
चुग ने कहा कि AAP सरकार वित्तीय संकट का बहाना बनाकर कर्मचारियों के अधिकारों को अनिश्चितकाल तक नहीं टाल सकती। पंजाब पर लगभग 4.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज होने की बात स्वयं सरकार के सामने है, लेकिन यही वित्तीय संकट उस समय दिखाई नहीं देता जब राजनीतिक घोषणाओं और प्रचार पर सरकार संसाधन खर्च करती है। कर्मचारियों से किया गया वादा पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है, न कि उसे हर बार वित्तीय बाध्यता का नाम देकर टाल देना।
उन्होंने कहा कि DA एरियर के मामले में भी सरकार की स्थिति कर्मचारियों के लिए संतोषजनक नहीं है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में पंजाब के कर्मचारियों को कम DA मिल रहा है और बड़ी राशि का एरियर लंबित है। चार वर्ष से OPS के नाम पर इंतजार कर रहे कर्मचारियों को अब तारीख, आश्वासन और बैठकों के बजाय ठोस निर्णय चाहिए।
चुग ने कहा कि 27 अगस्त को विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा प्रस्तावित महाबंद और राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि सरकार के प्रति कर्मचारियों का असंतोष गंभीर स्तर तक पहुंच चुका है। भगवंत मान सरकार को टकराव का रास्ता छोड़कर कर्मचारियों से तत्काल संवाद करना चाहिए और OPS सहित उनकी सभी लंबित मांगों पर स्पष्ट समयबद्ध निर्णय लेना चाहिए।
चुग ने कहा कि भगवंत मान सरकार को याद रखना चाहिए कि कर्मचारी कोई राजनीतिक विरोधी नहीं हैं। वे वही लोग हैं जो सरकार के हर विभाग को जमीन पर चलाते हैं। उनके अधिकारों की आवाज को लाठियों से दबाया जा सकता है, लेकिन उनकी नाराजगी को समाप्त नहीं किया जा सकता। AAP ने कर्मचारियों को दिवाली का तोहफा देने का वादा किया था, लेकिन चार साल बाद भी वह तोहफा गायब है। अब पंजाब के कर्मचारी इस वादाखिलाफी का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देंगे।