Share Market Today: शुक्रवार को सेंसेक्स 50 अंक से ज्यादा गिरा और निफ्टी 24,250 के नीचे आ गया। वॉल स्ट्रीट की कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से बाजार पर दबाव रहा।
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- Published: 21 Aug 2026, 10:01 AM IST
- Last Updated: 21 Aug 2026, 10:01 AM IST
Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार की तेजी के बाद शुक्रवार, 21 अगस्त को फिर कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 50 अंक से ज्यादा फिसल गया, जबकि निफ्टी 24,250 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी शेयर बाजार में पिछली रात की गिरावट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया। इसके अलावा आईटी शेयरों में बिकवाली से भी बाजार की चाल प्रभावित हुई।
सुबह 9:33 बजे सेंसेक्स 77,486.07 अंक पर कारोबार कर रहा था। इसमें 51.65 अंक यानी 0.06 फीसदी की गिरावट थी। इसी समय निफ्टी 50 24,219.20 अंक पर था और इसमें 12.65 अंक यानी 0.05 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई।
सात दिन की गिरावट के बाद गुरुवार को मिली थी राहत
घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार, 20 अगस्त को राहत देखने को मिली थी। निफ्टी में करीब 0.6 फीसदी की तेजी आई थी और सेंसेक्स-निफ्टी ने लगातार सात कारोबारी सत्रों से चली आ रही गिरावट का सिलसिला तोड़ा था।
निचले स्तरों पर निवेशकों की खरीदारी से बाजार को सहारा मिला था। इससे माना जा रहा था कि लगातार गिरावट के बाद बाजार कुछ संभल सकता है। हालांकि शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में एक बार फिर दबाव दिखाई दिया।
वॉल स्ट्रीट की कमजोरी का घरेलू बाजार पर असर
शुक्रवार की शुरुआत में भारतीय बाजार पर वैश्विक संकेतों का असर साफ नजर आया। अमेरिकी शेयर बाजार में पिछली रात कमजोरी रही, जिसका असर एशियाई बाजारों के साथ भारतीय इक्विटी बाजार पर भी पड़ा।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। तेल की कीमतों में लगातार तेजी से भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि कच्चे तेल की चाल पर घरेलू शेयर बाजार के निवेशकों की नजर बनी हुई है।
IT शेयरों में भी दबाव
शुक्रवार को आईटी शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। आईटी कंपनियों में कमजोरी ने प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया। ऐसे में वैश्विक बाजारों के कमजोर संकेत, महंगा कच्चा तेल और चुनिंदा सेक्टरों में बिकवाली बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के रुख, कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू स्तर पर आने वाले आर्थिक संकेतों पर बनी हुई है।