world-news

Shardiya Navratri 2026: कैसे करें घट स्थापना, कौन-सा मंत्र बोलें? यहां नोट करें पूजा विधि, मुहूर्त सहित हर बात

October 10, 2026

Ghat Sthapna Muhurat 2026: नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करके देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। हिंदू धर्म में इस परंपरा का विशेष महत्व माना गया है।

Shardiya Navratri 2026 Ghat Sthapana Shubh Muhurat: साल 2026 में शारदीय नवरात्रि का पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। इस बार अष्टमी तिथि की वृद्धि होने के कारण नवरात्रि 9 के बजाय 10 दिनों तक मनाई जाएगी। इन दिनों में देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। कई जगहों पर गरबा और डांडिया के आयोजन भी होते हैं, जिनके जरिए भक्त देवी की आराधना करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना करना प्रमुख परंपराओं में से एक है। ऐसे में आइए जानते हैं कलश स्थापना की आसान विधि।

ये भी पढ़ें-
Navratri Mata Bhajans Lyrics: ‘अंगना पधारो महारानी’, सुनें नवरात्रि के 10 सुपरहिट भजन

घट स्थापना के लिए विशेष शुभ मुहूर्त

घट स्थापना के लिए चौघड़िया मुहूर्त

सुबह 7:55 से 9:18 बजे तक
सुबह 9:18 से 10:46 बजे तक
सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक
दोपहर 1:41 से 3:09 बजे तक
शाम 6:04 से 7:36 बजे तक
शाम 7:36 से रात 9:09 बजे तक
रात 9:09 से 10:41 बजे तक
(उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मितेष पाण्डे के अनुसार)

शारदीय नवरात्रि में घट स्थापना कैसे करें?

स्थापना की जगह साफ करें: घर में जिस स्थान पर कलश स्थापित करना है, वहां अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद गंगाजल छिड़ककर उस जगह को पवित्र कर लें।
बाजोट तैयार करें: निर्धारित स्थान पर थोड़े चावल रखें और उनके ऊपर लकड़ी का पटिया यानी बाजोट रख दें। बाजोट पर साफ लाल कपड़ा बिछाएं। आसपास बेकार की चीजें न रखें।
कलश में जल भरें: मिट्टी की मटकी या तांबे के कलश में साफ जल भरकर बाजोट पर रखें। कलश पर कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं। इसमें फूल, दूर्वा, चावल, चंदन, रोली और हल्दी जैसी पूजन सामग्री डालें।
कलश को सजाएं: कलश के मुंह पर मौली यानी पूजा का धागा बांधें। इसके ऊपर आम के पत्ते रखें और नारियल से ढक दें। कलश स्थापित करते समय ‘ऊं नमश्चण्डिकायै’ मंत्र का जाप करें।
देवी दुर्गा की पूजा करें: कलश के पास देवी दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा रखें। उन्हें तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके बाद अबीर-गुलाल, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग भी लगाएं।
देवी की आरती करें: पूजा पूरी होने के बाद देवी दुर्गा की आरती करें। नवरात्रि के दौरान रोज देवी और कलश की पूजा-अर्चना करें। श्रद्धालु अपनी परंपरा और पूजा-विधि के अनुसार पूरे नवरात्रि में नियमित आराधना करते हैं।

मां दुर्गा की आरती (Devi Durga Ki Aarti)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥1॥ जय अम्बे…
माँग सिंदुर विराजत टीको मृगमदको।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको ॥2॥ जय अम्बे.…
कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।
रक्त-पुष्प गल माला, कण्ठनपर साजै ॥3॥ जय अम्बे…
केहरी वाहन राजत, खड्ग खपर धारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहरी ॥4॥ जय अम्बे…
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥5॥ जय अम्बे…
शुंभ निशुंभ विदारे, महिषासुर-धाती।
धूम्रविलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥6॥ जय अम्बे…
चण्ड मुण्ड संहारे, शोणितबीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥7॥ जय अम्बे…
ब्रह्माणी, रूद्राणी तुम कमलारानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी ॥8॥ जय अम्बे…
चौसठ योगिनि गावत, नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा औ बाजत डमरू ॥9॥ जय अम्बे…
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता सुख सम्पति करता ॥10॥ जय अम्बे…
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवाञ्छित फल पावत, सेवत नर-नारी ॥11॥ जय अम्बे…
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
(श्री) मालकेतु में राजत कोटिरतन ज्योती ॥12॥ जय अम्बे…
(श्री) अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख सम्पति पावै ॥13॥ जय अम्बे...


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।