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SEBI का नया क्लोजिंग नियम: 7 दिसंबर से बदल जाएगी ट्रेडिंग की टाइमिंग, ट्रेडर्स के लिए क्या है खास?

October 16, 2026

SEBI का नया क्लोजिंग नियम: 7 दिसंबर से बदल जाएगी ट्रेडिंग की टाइमिंग, ट्रेडर्स के लिए क्या है खास?

Published: Friday, October 16, 2026, 15:24 [IST]

7 दिसंबर 2026 से सेबी (SEBI) का नया क्लोजिंग फ्रेमवर्क लागू होने जा रहा है। इसके तहत कैश सेगमेंट में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन दोपहर 3:30 से 3:40 बजे तक चलेगा। इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेड दोपहर 3:45 बजे तक किया जा सकेगा, जबकि एक्सपायरी वाले दिन इंडेक्स का कट-ऑफ समय 3:30 बजे रहेगा। एक्सपायर होने वाले कॉन्ट्रैक्ट्स का सेटलमेंट ऑक्शन प्राइस के बजाय, आखिरी 30 मिनट के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) पर होगा।

नए सिस्टम के तहत, क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) अब 1 मिनट के ट्रांजिशन पीरियड से शुरू होगा। इसके बाद 5 मिनट तक सभी तरह के ऑर्डर दिए जा सकेंगे। फिर 4 मिनट का 'लिमिट-ओनली' फेज होगा, जिसके बाद 3:38 से 3:40 बजे के बीच किसी भी वक्त रैंडम क्लोजिंग होगी। कैश मार्केट का पोस्ट-क्लोजिंग सेशन 3:50 से 4:00 बजे तक ही रहेगा, जहां क्लोजिंग प्राइस पर ट्रेड होंगे। वहीं, स्टॉक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी वाले दिन भी 3:45 बजे तक ट्रेड करेंगे, जबकि उस दिन एक्सपायर होने वाले इंडेक्स कॉन्ट्रैक्ट्स का ट्रेड 3:30 बजे बंद हो जाएगा।

SEBI New Closing Framework 2026: New Trading Timings, VWAP Rules, and Trader Checklist Explained

SEBI CAS टाइमिंग और 30-मिनट VWAP नियम: जानिए क्या-क्या बदलेगा

आखिरी 30 मिनट के VWAP को वापस लाने से सेटलमेंट अब ज्यादा लिक्विडिटी वाले दायरे में होगा। इससे ऑक्शन के दौरान होने वाले भारी उतार-चढ़ाव पर लगाम लगेगी और एक्सपायरी के समय प्राइजिंग का गणित पहले की तरह आसान हो जाएगा। एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन को 7 दिनों के भीतर नए ऑपरेटिंग नियम जारी करने होंगे। वहीं, कैरी-फॉरवर्ड और आइसबर्ग ऑर्डर्स के लिए ट्रांजिशन नियम 8 फरवरी 2027 से लागू होंगे। इस बदलाव से क्लोजिंग के समय ज्यादा सटीक संकेत मिलेंगे और अचानक आने वाले झटकों से राहत मिलेगी।

30-मिनट VWAP नियम: ट्रेडर्स के लिए जरूरी चेकलिस्ट और बचत का गणित

नया नियम लागू होने से पहले ट्रेडर्स को अपनी रणनीति बदलनी होगी। एक्सपायरी के दिन इंडेक्स पोजीशन को 3:30 बजे से पहले रोलओवर कर लें। स्टॉक-ऑप्शंस के हेज (Hedge) को 3:45 बजे तक बनाए रखें। अपने अल्गो क्लॉक, रिस्क चेक्स और ऑटो स्क्वायर-ऑफ बफर को समय रहते अपडेट करें। पोर्टफोलियो वैल्यूएशन और प्लेजिंग के लिए CAS क्लोज के बाद आने वाले NAV डेटा पर नजर रखें। किसी गलत ट्रेड से बचने के लिए अपने ब्रोकर के नए कट-ऑफ टाइम और मार्जिन ब्लॉक रूल्स को पहले ही री-चेक कर लें।

पोर्टफोलियो के कैश का हिसाब लगाने वाले निवेशकों के लिए एक सीधा पैमाना है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मौजूदा 1 साल से अधिक वाले डिपॉजिट बैंड के मिड-पॉइंट यानी 6.5% ब्याज दर के हिसाब से ₹1,00,000 की रकम पर कम्पाउंडिंग का गणित नीचे दिया गया है। नए क्लोजिंग नियमों के दौरान फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के मुकाबले अपनी संभावित NAV-लिंक्ड कमाई की तुलना करें, जिससे आपको एसेट एलोकेशन का फैसला लेने में मदद मिलेगी।

अवधिब्याज दर₹1,00,000 पर मैच्योरिटी
5 साल6.5% सालाना₹1,37,009
10 साल6.5% सालाना₹1,87,714
15 साल6.5% सालाना₹2,57,184

इस साल CAS के शुरुआती दौर में आई दिक्कतों के बाद ये बदलाव काफी तेजी से लाए गए हैं। सेटलमेंट के नए नियमों से एक्सपायरी का गणित साफ होगा और आखिरी मिनटों में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव में कमी आएगी। हालांकि, सही नतीजा अनुशासन से ही मिलेगा। अपने नुकसान से बचने और स्लिपेज (Slippage) को रोकने के लिए 3:00 से 3:45 बजे के बीच अपने रोलओवर, स्टॉप-लॉस और लिक्विडिटी का सही प्लान बनाएं। 7 दिसंबर की तारीख कैलेंडर में नोट कर लें और बाजार में पूंजी लगाने से पहले नए क्लोजिंग पैटर्न को अच्छी तरह समझ लें।

Story first published: Friday, October 16, 2026, 15:24 [IST]

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