Sep 11, 2026 05:32 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच इस मामले पस सुनवाई कर रही थी। आपको बताते चलें कि शिक्षक के खिलाफ POCSO एक्ट की धारा 10 के तहत FIR दर्ज की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में टीचर को राहत देते हुए एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज एक मामले पर सुनवाई हुई। यह सुनवाई एक शिक्षक के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर हुई। इसमें आरोप लगाया गया कि उसने क्लास की कई छात्राओं को सजा देने के बहाने उनके शरीर को छुआ। जैसे कि पीठ पर हाथ रखे। कमर को टच किया। आरोप सामने आने के बाद पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ POCSO एक्ट, 2012 की धारा 10 के तहत मामला दर्ज कर दिया। इसे खारिज कराने के लिए टीचर सबसे पहले हाईकोर्ट पहुंचे, जहां से उन्हें निराशा हाथ लगी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
देश की सर्वोच्च अदालत ने उन्हें राहत देते हुए कहा कि शारीरिक सजा देने का उनका तरीका भले ही गलत और असंवेदनशील था लेकिन उससे यौन मंशा का पता नहीं चलता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बाद में बरी हो जाने पर भी मुकदमे से हुए नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती है। एक टीचर पर हमेशा के लिए दाग लग जाएगा। इसे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने शिक्षक को दोषी पाया था।
छात्राओं की शरीर को छुआ
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच इस मामले पस सुनवाई कर रही थी। आपको बताते चलें कि शिक्षक के खिलाफ POCSO एक्ट की धारा 10 के तहत FIR दर्ज की गई थी। महिला टीचरों ने हेडमास्टर से शिक्षक की शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि 10वीं कक्षा की कुछ छात्राओं के शरीर को छुआ गया। इसके बाद जिला बाल संरक्षण इकाई ने स्कूल का दौरा किया और जांच रिपोर्ट तैयार की। इसके आधार पर पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज की।
शिक्षक ने हाईकोर्ट में इस FIR को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी। हालांकि, उसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। देश की सर्वोच्च अदालत ने कार्यवाही पर रोक लगा दी।
पीठ के ऊपरी हिस्से पर मारते थे शिक्षक
बाल संरक्षण इकाई की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, छात्राओं ने कहा कि जब वे क्लास में ध्यान नहीं देती थीं तो टीचर उनकी पीठ के ऊपरी हिस्से पर मारते थे। जिस तरह से वे उन्हें छूते थे वह उनके लिए आरामदायक नहीं था। जैसे लड़कियों की पीठ रगड़ना और उनकी कमर पर चुटकी काटना। एक दिन टीचर ने एक लड़की को मैप न लाने पर थप्पड़ मारा और उसकी गर्दन को गलत तरीके से छुआ। दूसरे स्टूडेंट ने भी शिकायत की कि भले ही टीचर ने उन्हें छुआ नहीं लेकिन वह उन्हें इस तरह देखते थे जिससे उन्हें असहज महसूस होता था।
शिक्षक की अपील पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने POCSO एक्ट के संबंधित प्रावधानों के बारे बताया। धारा 10 में गंभीर यौन उत्पीड़न के लिए पांच से सात साल की कठोर कैद और जुर्माने की सजा का प्रावधान है। इस मामले में लागू धारा 9(f) में ऐसे लोग शामिल हैं जो किसी शिक्षण संस्थान के मैनेजमेंट या स्टाफ में हैं और उस संस्थान में किसी बच्चे के साथ यौन उत्पीड़न करते हैं।
कोर्ट ने माना कि भले ही एक टीचर के तौर पर व्यवहार गलत था, लेकिन यह धारा 10 के दायरे में नहीं आता है। कोर्ट ने कहा, " एक टीचर के तौर पर व्यवहार सही नहीं था। खासकर छात्राओं के साथ पेश आते समय शारीरिक सजा देना और संवेदनशीलता की कमी दिखाना, लेकिन दोनों छात्राओं के बयानों को ध्यान से पढ़ने पर निश्चित रूप से यह नहीं कहा जा सकता कि उन्होंने POCSO एक्ट की धारा 10 के तहत कोई यौन अपराध किया है।"