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अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा गिनती पर सख्ती, SBI की निगरानी में शुरू हुआ नया मॉडल

July 20, 2026

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान पात्रों में जमा होने वाले नकद चढ़ावे की गिनती व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अब भारतीय स्टेट बैंक एसबीआई की निगरानी में नई व्यवस्था लागू करते हुए दो पालियों में नकदी गिनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सूत्रों के अनुसार, एक सप्ताह तक परीक्षण के बाद रविवार से नई व्यवस्था औपचारिक रूप से लागू कर दी गई है.

इसके तहत चढ़ावे की गिनती की जिम्मेदारी एसबीआई की निगरानी में संचालित की जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित रहे. नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक पाली में 10 से 12 सदस्यों की टीम तैनात की गई है. पहली पाली सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक नकदी की गिनती करेगी.

चार सुपरवाइजर भी होंगे तैनात

चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में पूर्व प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव के जेल भेजे जाने के बाद ट्रस्ट ने शोभनाथ मिश्रा को नकदी गिनती का नया प्रभारी नियुक्त किया है. वहीं पूरी प्रक्रिया की निगरानी को और सुदृढ़ करने के लिए चार सुपरवाइजर भी तैनात किए गए हैं, जिनमें एक पूर्व सैनिक भी शामिल हैं.

ट्रस्ट के सुरक्षा प्रभारी को सौंपी जिम्मेदारी

ट्रस्ट के सुरक्षा प्रभारी एवं सेना के पूर्व अधिकारी कैप्टन के.के. तिवारी को नकदी गिनती प्रक्रिया की दैनिक निगरानी और रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसके अलावा पूर्व रक्षाकर्मी एस.पी. दुबे और शेषमणि तिवारी को भी ट्रस्ट के प्रतिनिधि के रूप में गिनती प्रक्रिया की निगरानी का दायित्व दिया गया है.

जानें क्यों शुरू हुई नई व्यवस्था

राम मंदिर में चढ़ावे के लिए नई व्यवस्था ऐसे समय में लागू की गई है जब मंदिर के दान में गड़बड़ी के आरोपों की जांच चल रही है. यह मामला जून के पहले हफ़्ते में सामने आया था. इसके बाद, 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई. SIT ने 23 जून को सरकार को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंपी. इसके आधार पर, पुलिस ने 25 जून को FIR दर्ज की और जांच शुरू की.

पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी को पत्रकारतिा के क्षेत्र में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है. देश और उत्तरप्रदेश की राजनीति को कवर करते आ रहे हैं. दिल्ली में अमर उजाला और पंजाब केसरी से पत्रकारिता की यात्रा की शुरुआत हुई.  दिल्ली में 2 साल की पत्रकारिता के बाद मिट्टी की खुशबू यूपी खींच लाई और तब से राजधानी लखनऊ में ही पत्रकारिता हो रही है. 2017 में यात्रा को विस्तार देते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े. राजनीतिक खबरों में गहरी रुचि और अंदर की खबर को बाहर लाने का हुनर, साथ ही यूपी की ब्यूरोकेसी में खास पकड़.  पत्रकारिता का फलसफा खबरों को खबर के रूप में ही जनता तक पहुंचाना.

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