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Sarnath UNESCO World Heritage: वाराणसी के सारनाथ को मिला यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा, भारत के लिए बड़ी उपलब्धि - Haribhoomi

July 27, 2026

उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित सारनाथ को यूनेस्को ने विश्व धरोहर (World Heritage Site) का दर्जा दे दिया है। दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को की 48वीं विश्व धरोहर समिति की बैठक में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया। इसके साथ ही भारत के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की संख्या बढ़कर 45 हो गई है।

Sarnath, UNESCO World Heritage

सारनाथ के विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के साथ ही भारत के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की संख्या बढ़कर 45 हो गई है।

  • Published: 27 Jul 2026, 02:42 PM IST
  • Last Updated: 27 Jul 2026, 02:42 PM IST

वाराणसी के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है। दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को की 48वीं विश्व धरोहर समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह निर्णय भारत और उत्तर प्रदेश दोनों के लिए एक बड़ी सांस्कृतिक उपलब्धि माना जा रहा है।

भगवान बुद्ध ने यहीं दिया था पहला उपदेश
सारनाथ बौद्ध धर्म का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है। बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश यहीं दिया था, जिसे धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है। यहीं से बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार की शुरुआत हुई थी। इसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व के कारण सारनाथ को दुनिया भर में विशेष पहचान प्राप्त है।

भारत के विश्व धरोहर स्थलों की संख्या हुई 45
सारनाथ के विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के साथ ही भारत के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की संख्या बढ़कर 45 हो गई है। इससे पहले भारत के कई ऐतिहासिक स्मारक, प्राकृतिक स्थल और सांस्कृतिक धरोहरें इस सूची में शामिल हैं। अब सारनाथ भी इस प्रतिष्ठित सूची का हिस्सा बन गया है।विशेषज्ञों का मानना है कि यूनेस्को की मान्यता मिलने के बाद सारनाथ में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे स्थानीय पर्यटन, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण को भी नई गति मिलेगी। साथ ही भारत की बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर और अधिक पहचान मिलेगी।

उत्तर प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा मिलना उत्तर प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह सम्मान न केवल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाएगा, बल्कि वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर भी सारनाथ की स्थिति को और मजबूत करेगा।